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Udhampur News: युवाओं में बढ़ती चिंता और तनाव बनी बड़ी समस्या

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उधमपुर। आज के समय में युवाओं में एंग्जाइटी और तनाव तेजी से बढ़ रहा है। पढ़ाई, नौकरी और परिवार की उम्मीदों का दबाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। जागरूकता की कमी और सही समय पर इलाज न मिलने से यह समस्या गंभीर होकर अवसाद का रूप ले सकती है, जिससे युवाओं का भविष्य भी प्रभावित होता है।
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जहां तकनीक और आधुनिकता तेजी से बढ़ रही है वहीं युवाओं के जीवन में तनाव और चिंता भी उतनी ही तेजी से बढ़ती जा रही है। प्रतियोगिता और उम्मीदों का दबाव युवाओं के जीवन का हिस्सा बन चुका है। खासकर बच्चों और किशोरों में चिंता एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख पढ़ाई, नौकरी और परिवार की अपेक्षाएं हैं। अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की तुलना दूसरों से करते हैं और उनसे ज्यादा प्रतिशत लाने की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में बच्चा खुद को साबित करने के दबाव में आ जाता है और धीरे-धीरे तनाव का शिकार हो जाता है। कम अंक आने के डर से मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसे गलत कदम उठा लेते हैं या गहरे अवसाद में चले जाते हैं।
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माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल प्रतिशत ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि ज्ञान और कौशल ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इस बात को समझने की बजाय बच्चे नंबरों की दौड़ में उलझ जाते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास कमजोर होता जाता है। तनाव के कारण बच्चे पढ़ाई से दूर होने लगते हैं। वे मोबाइल और सोशल मीडिया और दोस्तो के साथ में समय बिताकर खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन इससे उनका ध्यान भटकता है और काम अधूरा रह जाता है। कई युवा बुरी आदतों के शिकार हो जाते है इससे तनाव और बढ़ जाता है।
मानसिक दबाव के सामान्य लक्षणों में घबराहट, सांस लेने में दिक्कत, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, नींद न आना, डर और चिंता बढ़ना, अकेलापन महसूस करना और बेचैनी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर डाक्टर से जांच करवानी चाहिए।
कोट
माता-पिता को बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। बच्चों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए और उनकी रुचि के अनुसार उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए, सकारात्मक माहौल बनाएं। समाज में जागरूकता फैलाकर ही इस समस्या से निपटा जा सकता है।
- डॉ. महेश शर्मा, चिकित्सक
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