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Udhampur News: बार-बार और लंबे समय तक खून बहने को न करें नजरअंदाज
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उधमपुर। शरीर में चोट लगने के बाद लंबे समय तक खून बहना या बार-बार खून निकलना हीमोफीलिया नाम की बीमारी का संकेत हो सकता है। यह बीमारी अधिकतर जन्म से ही होती है और जीवनभर रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर जांच और नियमित उपचार के माध्यम से गंभीर बीमारी को काफी हद तक नियंत्रण में रखा जा सकता है।
हीमोफीलिया रक्त से जुड़ी जन्मजात और आनुवंशिक बीमारी है जो माता-पिता के माध्यम से बच्चों तक पहुंचती है। यह बीमारी मुख्य रूप से पुरुषों में देखने को मिलती है। पीड़ित मरीज के शरीर में खून जमने (क्लॉटिंग) की प्रक्रिया सामान्य रूप से काम नहीं करती जिससे चोट लगने या शरीर के अंदरूनी हिस्सों में रक्तस्राव होने की स्थिति में खून लंबे समय तक जारी रह सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि यह कोई छुआछूत या फैलने वाली बीमारी नहीं है।
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दो प्रकार की होती है बीमारी
हीमोफीलिया ए : शरीर के भीतर आठवें क्लॉटिंग फैक्टर की कमी हो जाती है। इस कारण चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहता रहता है। गंभीर मामलों में नाक से बार-बार खून आना, जोड़ों में खून जमा होना, सूजन और तीव्र दर्द जैसी परेशानियां सामने आती हैं।
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हीमोफीलिया बी : नौवें क्लॉटिंग फैक्टर की कमी पाई जाती है। इसके लक्षण भी पहले प्रकार जैसे ही होते हैं लेकिन मुख्य कारण अलग कारक की कमी है। इसमें बार-बार अचानक रक्तस्राव, मांसपेशियों में जकड़न व दर्द और अंदरूनी ब्लीडिंग जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।
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प्रमुख लक्षण
नाक से बार-बार खून आना, त्वचा पर नीले निशान, मांसपेशियों में अंदरूनी खून जमा होना, जोड़ों में असहनीय दर्द व सूजन आना और किसी भी चोट के बाद लगातार रक्तस्राव।
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यदि बचपन या शुरुआत में ही लक्षण दिखाई दें तो इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवाएं कि नियमित इलाज इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सके।
-डॉ. शाह नवाज, असिस्टेंट प्रोफेसर, पीडियाट्रिक्स, जीएमसी
हीमोफीलिया रक्त से जुड़ी जन्मजात और आनुवंशिक बीमारी है जो माता-पिता के माध्यम से बच्चों तक पहुंचती है। यह बीमारी मुख्य रूप से पुरुषों में देखने को मिलती है। पीड़ित मरीज के शरीर में खून जमने (क्लॉटिंग) की प्रक्रिया सामान्य रूप से काम नहीं करती जिससे चोट लगने या शरीर के अंदरूनी हिस्सों में रक्तस्राव होने की स्थिति में खून लंबे समय तक जारी रह सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि यह कोई छुआछूत या फैलने वाली बीमारी नहीं है।
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दो प्रकार की होती है बीमारी
हीमोफीलिया ए : शरीर के भीतर आठवें क्लॉटिंग फैक्टर की कमी हो जाती है। इस कारण चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहता रहता है। गंभीर मामलों में नाक से बार-बार खून आना, जोड़ों में खून जमा होना, सूजन और तीव्र दर्द जैसी परेशानियां सामने आती हैं।
हीमोफीलिया बी : नौवें क्लॉटिंग फैक्टर की कमी पाई जाती है। इसके लक्षण भी पहले प्रकार जैसे ही होते हैं लेकिन मुख्य कारण अलग कारक की कमी है। इसमें बार-बार अचानक रक्तस्राव, मांसपेशियों में जकड़न व दर्द और अंदरूनी ब्लीडिंग जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।
प्रमुख लक्षण
नाक से बार-बार खून आना, त्वचा पर नीले निशान, मांसपेशियों में अंदरूनी खून जमा होना, जोड़ों में असहनीय दर्द व सूजन आना और किसी भी चोट के बाद लगातार रक्तस्राव।
यदि बचपन या शुरुआत में ही लक्षण दिखाई दें तो इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवाएं कि नियमित इलाज इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सके।
-डॉ. शाह नवाज, असिस्टेंट प्रोफेसर, पीडियाट्रिक्स, जीएमसी