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तय समय में वन अधिकार अधिनियम के लंबित दावे निपटाएं डीसी : राणा
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- मंत्री बोले - प्रक्रिया पूरी होने तक बेदखल नहीं होंगे कब्जाधारक
- ग्रामसभा में व्यक्तिगत व सामुदायिक वन अधिकार दावों का होगा सत्यापन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश सरकार ने उपायुक्तों को वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित और नए दावों के सत्यापन सहित निपटारे की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने तक वन भूमि पर रह रहे अनुसूचित जनजाति निवासी को बेदखल नहीं किया जाएगा।
जनजातीय विभाग के मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा, यह निर्णय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार की जनजातीय समुदायों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के वैध अधिकारों, गरिमा और आजीविका की रक्षा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, वन अधिकार अधिनियम को उसकी वास्तविक भावना के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए। इसके लाभ गांवों, वन बस्तियों, पर्वतीय क्षेत्रों, कस्बों और नगर निकाय क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों तक पहुंचने चाहिए।
पात्र दावेदार को निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए, हर दावे का उचित सत्यापन होना चाहिए और हर निर्णय अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, यह कानून वनों में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के वैध अधिकारों को मान्यता देने के लिए बनाया गया था।
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उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए जनजातीय मामलों के विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है। दावों के निस्तारण में सहायता और प्रक्रियागत कमियों को दूर करने के लिए एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई पहले ही स्थापित की जा चुकी है। जिलास्तरीय एफआरए प्रकोष्ठ भी स्थापित किए जा रहे हैं और उन्हें इस कार्य के लिए सक्रिय बनाया जा रहा है।
मंत्री ने कहा, ये प्रकोष्ठ जिला प्रशासन को सहयोग देंगे और पात्र दावेदारों, विशेषकर दूरदराज क्षेत्रों में रहने वालों की सहायता करेंगे, जिन्हें प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं हो सकती या विभिन्न कार्यालयों तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है। उन्होंने कहा, कोई वास्तविक दावेदार केवल इसलिए अपने वैध अवसर से वंचित नहीं होना चाहिए। मंत्री ने कहा, सभी उपायुक्तों को वन अधिकार दावों को प्राप्त करने, सत्यापित करने और उनका निपटारा करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिनियम के तहत प्रक्रिया ग्रामसभा में व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार दावों का सत्यापन होगा। इसके बाद मामलों पर उपमंडल स्तरीय समिति और अंत में जिला स्तरीय समिति विचार करेगी। कानून असंतुष्ट दावेदार के लिए अपील का प्रावधान भी है ताकि संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए।
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- ग्रामसभा में व्यक्तिगत व सामुदायिक वन अधिकार दावों का होगा सत्यापन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश सरकार ने उपायुक्तों को वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित और नए दावों के सत्यापन सहित निपटारे की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने तक वन भूमि पर रह रहे अनुसूचित जनजाति निवासी को बेदखल नहीं किया जाएगा।
जनजातीय विभाग के मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा, यह निर्णय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार की जनजातीय समुदायों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के वैध अधिकारों, गरिमा और आजीविका की रक्षा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, वन अधिकार अधिनियम को उसकी वास्तविक भावना के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए। इसके लाभ गांवों, वन बस्तियों, पर्वतीय क्षेत्रों, कस्बों और नगर निकाय क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों तक पहुंचने चाहिए।
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पात्र दावेदार को निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए, हर दावे का उचित सत्यापन होना चाहिए और हर निर्णय अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, यह कानून वनों में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के वैध अधिकारों को मान्यता देने के लिए बनाया गया था।
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उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए जनजातीय मामलों के विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है। दावों के निस्तारण में सहायता और प्रक्रियागत कमियों को दूर करने के लिए एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई पहले ही स्थापित की जा चुकी है। जिलास्तरीय एफआरए प्रकोष्ठ भी स्थापित किए जा रहे हैं और उन्हें इस कार्य के लिए सक्रिय बनाया जा रहा है।
मंत्री ने कहा, ये प्रकोष्ठ जिला प्रशासन को सहयोग देंगे और पात्र दावेदारों, विशेषकर दूरदराज क्षेत्रों में रहने वालों की सहायता करेंगे, जिन्हें प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं हो सकती या विभिन्न कार्यालयों तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है। उन्होंने कहा, कोई वास्तविक दावेदार केवल इसलिए अपने वैध अवसर से वंचित नहीं होना चाहिए। मंत्री ने कहा, सभी उपायुक्तों को वन अधिकार दावों को प्राप्त करने, सत्यापित करने और उनका निपटारा करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिनियम के तहत प्रक्रिया ग्रामसभा में व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार दावों का सत्यापन होगा। इसके बाद मामलों पर उपमंडल स्तरीय समिति और अंत में जिला स्तरीय समिति विचार करेगी। कानून असंतुष्ट दावेदार के लिए अपील का प्रावधान भी है ताकि संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए।