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Jammu News: जीनोमिक्स से एआई तक... स्वास्थ्य सेवाओं का नया केंद्र बनेगा एम्स जम्मू
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- जीन आधारित जांच, कैंसर उपचार और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत,
- अब मेडिकल शिक्षा और शोध का होगा विस्तार, टेलीमेडिसिन और ग्रीन कैंपस पर रहेगा विशेष जोर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जम्मू आधुनिक इलाज, मेडिकल शिक्षा और नई तकनीक का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। संस्थान में जीनोमिक्स, कैंसर उपचार, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्वास्थ्य सेवाएं और डिजिटल चिकित्सा सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं। अब क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों पर अध्ययन, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और नई चिकित्सा तकनीकों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा।
एम्स में स्थापित सेंटर फॉर एडवांस्ड जीनोमिक्स एंड प्रिसिजन मेडिसिन में जीनोमिक जांच और प्रिसिजन मेडिसिन की सुविधा शुरू हो चुकी है। यहां आनुवंशिक जांच के आधार पर बीमारी की अधिक सटीक पहचान कर मरीज के अनुरूप उपचार तय करने में मदद मिल रही है। इससे कैंसर, दुर्लभ और वंशानुगत बीमारियों के इलाज को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
संस्थान में एडवांस्ड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेवाएं भी शुरू हो चुकी हैं। अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, दर्द प्रबंधन सेवाएं, आपातकालीन डायलिसिस और पॉइजन इन्फॉर्मेशन सेंटर जैसी सुविधाओं से गंभीर मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं मिल रही हैं।
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स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों और टेलीमेडिसिन पर रहेगा फोकस
एम्स जम्मू के प्राचार्य प्रो. डीएन शर्मा ने बताया कि संस्थान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर भी विशेष अध्ययन करेगा। थायरॉयड, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली सांस संबंधी संबंधी बीमारियों पर अलग से काम किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं विकसित की जा सकें। दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
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ग्रीन कैंपस और पीजी शिक्षा का विस्तार
संस्थान को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र, जल पुनर्चक्रण और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही है। एमबीबीएस और नर्सिंग के बाद विभिन्न विषयों में पीजी पाठ्यक्रमों का भी विस्तार किया जाएगा। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होंगे और चिकित्सा क्षेत्र में नए अध्ययन को भी बढ़ावा मिलेगा। संस्थान का उद्देश्य इलाज, मेडिकल शिक्षा और नई तकनीक को एक साथ जोड़कर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाना है।
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- अब मेडिकल शिक्षा और शोध का होगा विस्तार, टेलीमेडिसिन और ग्रीन कैंपस पर रहेगा विशेष जोर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जम्मू आधुनिक इलाज, मेडिकल शिक्षा और नई तकनीक का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। संस्थान में जीनोमिक्स, कैंसर उपचार, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्वास्थ्य सेवाएं और डिजिटल चिकित्सा सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं। अब क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों पर अध्ययन, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और नई चिकित्सा तकनीकों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा।
एम्स में स्थापित सेंटर फॉर एडवांस्ड जीनोमिक्स एंड प्रिसिजन मेडिसिन में जीनोमिक जांच और प्रिसिजन मेडिसिन की सुविधा शुरू हो चुकी है। यहां आनुवंशिक जांच के आधार पर बीमारी की अधिक सटीक पहचान कर मरीज के अनुरूप उपचार तय करने में मदद मिल रही है। इससे कैंसर, दुर्लभ और वंशानुगत बीमारियों के इलाज को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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संस्थान में एडवांस्ड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेवाएं भी शुरू हो चुकी हैं। अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, दर्द प्रबंधन सेवाएं, आपातकालीन डायलिसिस और पॉइजन इन्फॉर्मेशन सेंटर जैसी सुविधाओं से गंभीर मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं मिल रही हैं।
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स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों और टेलीमेडिसिन पर रहेगा फोकस
एम्स जम्मू के प्राचार्य प्रो. डीएन शर्मा ने बताया कि संस्थान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर भी विशेष अध्ययन करेगा। थायरॉयड, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली सांस संबंधी संबंधी बीमारियों पर अलग से काम किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं विकसित की जा सकें। दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
ग्रीन कैंपस और पीजी शिक्षा का विस्तार
संस्थान को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र, जल पुनर्चक्रण और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही है। एमबीबीएस और नर्सिंग के बाद विभिन्न विषयों में पीजी पाठ्यक्रमों का भी विस्तार किया जाएगा। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होंगे और चिकित्सा क्षेत्र में नए अध्ययन को भी बढ़ावा मिलेगा। संस्थान का उद्देश्य इलाज, मेडिकल शिक्षा और नई तकनीक को एक साथ जोड़कर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाना है।