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Jammu News: दुष्कर्म मामले में फोरेंसिक चूक पर जांच अधिकारी तलब
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- फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सीएफएसएल की पेन ड्राइव और डेटा विश्लेषण रिपोर्ट मांगी
- आदेश की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
जम्मू। दुष्कर्म के मामले में फोरेंसिक चूक सामने आने पर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और सीएफएसएल से प्राप्त पेन ड्राइव की प्रति के साथ डेटा विश्लेषण रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
यह आदेश पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह ने थाना दोमाना से जुड़े मामले में पारित किया। आरोपी अंकित सलगोत्रा के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज है। अदालत के अनुसार मामला फिलहाल अभियोजन साक्ष्य के चरण में लंबित है। बचाव पक्ष ने सीएफएसएल रिपोर्ट और पेन ड्राइव की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की थी। अभियोजन ने पेन ड्राइव देने के लिए समय मांगा गया और बाद में 15 नवंबर को आपत्तियां दाखिल की गईं। इसके बाद 30 दिसंबर को अदालत ने जांच अधिकारी को पेन ड्राइव की प्रति के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान सामने आया कि पेन ड्राइव में मौजूद डेटा की विश्लेषण रिपोर्ट अब तक रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई है।
अदालत ने टिप्पणी की कि जांच अधिकारी का दायित्व है कि वह विश्लेषण रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इलेक्ट्रॉनिक डेटा में ऐसा कौन सा साक्ष्य है, जिसे अभियोजन को मुकदमे में साबित करना है। विश्लेषण रिपोर्ट के बिना यह आकलन करना संभव नहीं है कि डेटा अभियोजन के मामले से जुड़ा है या नहीं। अदालत को बताया गया कि पहले दिया आदेश संबंधित पुलिस थाने को भेजा जा चुका है। इसके बावजूद अदालत ने दोहराया कि जांच अधिकारी अगली तारीख पर पेन ड्राइव और विश्लेषण रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।
अदालत ने साफ किया कि आदेश की अवहेलना की स्थिति में जांच अधिकारी के खिलाफ जानबूझकर अवहेलना की कार्रवाई की जाएगी। आदेश की प्रति वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रियासी के माध्यम से जांच अधिकारी को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।
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- आदेश की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
जम्मू। दुष्कर्म के मामले में फोरेंसिक चूक सामने आने पर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और सीएफएसएल से प्राप्त पेन ड्राइव की प्रति के साथ डेटा विश्लेषण रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
यह आदेश पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह ने थाना दोमाना से जुड़े मामले में पारित किया। आरोपी अंकित सलगोत्रा के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज है। अदालत के अनुसार मामला फिलहाल अभियोजन साक्ष्य के चरण में लंबित है। बचाव पक्ष ने सीएफएसएल रिपोर्ट और पेन ड्राइव की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की थी। अभियोजन ने पेन ड्राइव देने के लिए समय मांगा गया और बाद में 15 नवंबर को आपत्तियां दाखिल की गईं। इसके बाद 30 दिसंबर को अदालत ने जांच अधिकारी को पेन ड्राइव की प्रति के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान सामने आया कि पेन ड्राइव में मौजूद डेटा की विश्लेषण रिपोर्ट अब तक रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई है।
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अदालत ने टिप्पणी की कि जांच अधिकारी का दायित्व है कि वह विश्लेषण रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इलेक्ट्रॉनिक डेटा में ऐसा कौन सा साक्ष्य है, जिसे अभियोजन को मुकदमे में साबित करना है। विश्लेषण रिपोर्ट के बिना यह आकलन करना संभव नहीं है कि डेटा अभियोजन के मामले से जुड़ा है या नहीं। अदालत को बताया गया कि पहले दिया आदेश संबंधित पुलिस थाने को भेजा जा चुका है। इसके बावजूद अदालत ने दोहराया कि जांच अधिकारी अगली तारीख पर पेन ड्राइव और विश्लेषण रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।
अदालत ने साफ किया कि आदेश की अवहेलना की स्थिति में जांच अधिकारी के खिलाफ जानबूझकर अवहेलना की कार्रवाई की जाएगी। आदेश की प्रति वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रियासी के माध्यम से जांच अधिकारी को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।