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Jammu News: प्रतिवादी एक अदालत में एक ही कारण के आधार पर दो अलग-अलग शिकायतें दायर नहीं कर सकता
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हाईकोर्ट ने एक्जीक्यूटिव इंजीनियर और एक अन्य के खिलाफ कार्रवाई के आदेश को रद्द किया
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रतिवादी एक अदालत में एक ही कारण के आधार पर दो अलग-अलग शिकायतें दायर नहीं कर सकता। एक शिकायत के पहले ही खारिज होने पर दूसरी शिकायत में कार्रवाई जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इस टिप्पणी के साथ जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस रजनेश ओसवाल ने एक्जीक्यूटिव इंजीनियर समेत एक अन्य के खिलाफ कार्रवाई का आदेश रद्द कर दिया।
याचिकाकर्ता के अनुसार पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन और मैसर्स कोस्टल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड नोएडा के बीच एक अनुबंध हुआ था। यह पावर प्रोजेक्ट के लिए इंजीनियरिंग खरीद एवं निर्माण अनुबंध पैकेज के कार्यान्वयन के लिए प्लांट और उपकरणों की आपूर्ति से संबंधित था।
याचिका में कहा गया कि प्रतिवादी जो स्वयं को मैसर्स मंटीना कंस्ट्रक्शन कंपनी का अधिकृत एजेंट होने का दावा करता है ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), डोडा के समक्ष दो नवंबर, 2019 को दो शिकायतें दायर कीं। ये शिकायतें याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध आईपीसी की धारा 341 और 506 के तहत थीं। सीजेएम ने इन शिकायतों को जांच के लिए एसएचओ पुलिस स्टेशन गंदोह और ठाठरी को स्थानांतरित कर दिया था।
ठाठरी थाने के एसएचओ ने याचिकाकर्ताओं को तलब कर जांच के बाद प्रतिवादी की शिकायत को निराधार बताते हुए रिपोर्ट सीएजेएम को सौंप दी। गंदोह पुलिस थाने से भेजी गई शिकायत में जांच अधिकारी इस नतीजे पर पहुंचे कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पहली नजर में धारा 506 के तहत मामला बनता है। गवाह के बयान के बाद सीजेएम ने 16 दिसंबर, 2019 को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि प्रतिवादी ने उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से एक ही कारण के आधार पर दो शिकायतें दर्ज कराईं। इनमें घटना की तिथि का भी उल्लेख नहीं। नोटिस तामील होने के बावजूद वर्तमान याचिका पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए कोई भी पक्ष उपस्थित नहीं हुआ। रिकॉर्ड की जांच से अदालत ने पाया कि वर्तमान शिकायत में लगाए गए आरोप दूसरी शिकायत में लगाए गए आरोपों की ही हूबहू नकल हैं। जस्टिस ओसवाल ने सीजेएम डोडा के समक्ष मंसूर अहमद भट बनाम विनय गुप्ता और अन्य शीर्षक से लंबित शिकायत पर कार्रवाई समेत उससे उत्पन्न अन्य सभी कार्यवाहियों को रद्द किए जाने के आदेश दिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रतिवादी एक अदालत में एक ही कारण के आधार पर दो अलग-अलग शिकायतें दायर नहीं कर सकता। एक शिकायत के पहले ही खारिज होने पर दूसरी शिकायत में कार्रवाई जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इस टिप्पणी के साथ जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस रजनेश ओसवाल ने एक्जीक्यूटिव इंजीनियर समेत एक अन्य के खिलाफ कार्रवाई का आदेश रद्द कर दिया।
याचिकाकर्ता के अनुसार पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन और मैसर्स कोस्टल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड नोएडा के बीच एक अनुबंध हुआ था। यह पावर प्रोजेक्ट के लिए इंजीनियरिंग खरीद एवं निर्माण अनुबंध पैकेज के कार्यान्वयन के लिए प्लांट और उपकरणों की आपूर्ति से संबंधित था।
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याचिका में कहा गया कि प्रतिवादी जो स्वयं को मैसर्स मंटीना कंस्ट्रक्शन कंपनी का अधिकृत एजेंट होने का दावा करता है ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), डोडा के समक्ष दो नवंबर, 2019 को दो शिकायतें दायर कीं। ये शिकायतें याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध आईपीसी की धारा 341 और 506 के तहत थीं। सीजेएम ने इन शिकायतों को जांच के लिए एसएचओ पुलिस स्टेशन गंदोह और ठाठरी को स्थानांतरित कर दिया था।
ठाठरी थाने के एसएचओ ने याचिकाकर्ताओं को तलब कर जांच के बाद प्रतिवादी की शिकायत को निराधार बताते हुए रिपोर्ट सीएजेएम को सौंप दी। गंदोह पुलिस थाने से भेजी गई शिकायत में जांच अधिकारी इस नतीजे पर पहुंचे कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पहली नजर में धारा 506 के तहत मामला बनता है। गवाह के बयान के बाद सीजेएम ने 16 दिसंबर, 2019 को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि प्रतिवादी ने उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से एक ही कारण के आधार पर दो शिकायतें दर्ज कराईं। इनमें घटना की तिथि का भी उल्लेख नहीं। नोटिस तामील होने के बावजूद वर्तमान याचिका पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए कोई भी पक्ष उपस्थित नहीं हुआ। रिकॉर्ड की जांच से अदालत ने पाया कि वर्तमान शिकायत में लगाए गए आरोप दूसरी शिकायत में लगाए गए आरोपों की ही हूबहू नकल हैं। जस्टिस ओसवाल ने सीजेएम डोडा के समक्ष मंसूर अहमद भट बनाम विनय गुप्ता और अन्य शीर्षक से लंबित शिकायत पर कार्रवाई समेत उससे उत्पन्न अन्य सभी कार्यवाहियों को रद्द किए जाने के आदेश दिए।