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Jammu News: ढाई किलो से ज्यादा चरस बरामदगी मामले में ड्रग सप्लायर की जमानत अर्जी खारिज
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स्पेशल जज एनडीपीएस मामले की अदालत ने पारित किया आदेश
जम्मू। स्पेशल जज (एनडीपीएस मामले) परवेज इकबाल की अदालत ने ड्रग सप्लाई के आरोपी शौकत अली शाह की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला 2.570 किलोग्राम चरस की बरामदगी से जुड़ा है। अदालत ने एनसीबी बनाम शाहजहां हारुन और अन्य मामले में यह आदेश पारित किया।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अनुसार 26 अक्तूबर, 2024 को शाहजहां मोहम्मद हारून सिद्दीकी और सकीला समद शेख से यह प्रतिबंधित बरामद किया गया था। उस वक्त वे जम्मू में वन संरक्षण बल के मुख्यालय के पास नेशनल हाईवे-44 पर एक यात्री टैक्सी में सफर कर रहे थे।
एनसीबी का आरोप है कि जब्त की गई चरस शौकत अली शाह ने सप्लाई की थी और इसे मुंबई में एक अन्य आरोपी को डिलीवर किया जाना था। एजेंसी ने दावा किया कि कॉल-डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और कॉल के जरिये आवेदक का सह-आरोपी और अंतरराज्यीय ड्रग-ट्रैफिकिंग नेटवर्क से संपर्क हुआ। अभियोजन का आरोप है कि आवेदक और सह-आरोपी के बीच सौ से अधिक व्हाट्सएप मैसेज हुए। आवेदक ने अपने पास से कोई प्रतिबंधित सामान, मोबाइल फोन या सिम कार्ड बरामद न होने के आधार पर जमानत मांगी। तर्क दिया कि उसे मुख्य रूप से एनडीपीएस एक्ट की धारा 67 के तहत सह-आरोपी की ओर से दिए गए बयानों के आधार पर फंसाया गया था।
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कोर्ट ने पाया कि अभियोजन का मामला केवल सह-आरोपी के बयानों पर आधारित नहीं था, क्योंकि आवेदक की भूमिका को साबित करने के लिए कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप बातचीत और दूसरे हालात पर भी भरोसा किया गया था। जेएनएफ
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नशीली चीज की बरामदगी न होना जमानत के दावे का आधार नहीं
कोर्ट ने कहा कि नशीली चीज की बरामदगी न होना जमानत के दावे का आधार नहीं हो सकता। सप्लायर या साजिश करने वाले के तौर पर पर्दे के पीछे काम करने वाला आरोपी इसे आधार बनाकर बच नहीं सकता। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 के तहत साजिश करने वाला या उकसाने वाला भी उतना ही जिम्मेदार है, जितना वह व्यक्ति जिससे प्रतिबंधित वस्तु बरामद हुई है। कोर्ट ने पाया कि आवेदक पर 1.330 किलो चरस की सप्लाई से जुड़े एक और एनसीबी केस में भी ट्रायल चल रहा है। आवेदक एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत दो शर्तों को पूरा करने में नाकाम रहा है।
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जम्मू। स्पेशल जज (एनडीपीएस मामले) परवेज इकबाल की अदालत ने ड्रग सप्लाई के आरोपी शौकत अली शाह की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला 2.570 किलोग्राम चरस की बरामदगी से जुड़ा है। अदालत ने एनसीबी बनाम शाहजहां हारुन और अन्य मामले में यह आदेश पारित किया।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अनुसार 26 अक्तूबर, 2024 को शाहजहां मोहम्मद हारून सिद्दीकी और सकीला समद शेख से यह प्रतिबंधित बरामद किया गया था। उस वक्त वे जम्मू में वन संरक्षण बल के मुख्यालय के पास नेशनल हाईवे-44 पर एक यात्री टैक्सी में सफर कर रहे थे।
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एनसीबी का आरोप है कि जब्त की गई चरस शौकत अली शाह ने सप्लाई की थी और इसे मुंबई में एक अन्य आरोपी को डिलीवर किया जाना था। एजेंसी ने दावा किया कि कॉल-डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और कॉल के जरिये आवेदक का सह-आरोपी और अंतरराज्यीय ड्रग-ट्रैफिकिंग नेटवर्क से संपर्क हुआ। अभियोजन का आरोप है कि आवेदक और सह-आरोपी के बीच सौ से अधिक व्हाट्सएप मैसेज हुए। आवेदक ने अपने पास से कोई प्रतिबंधित सामान, मोबाइल फोन या सिम कार्ड बरामद न होने के आधार पर जमानत मांगी। तर्क दिया कि उसे मुख्य रूप से एनडीपीएस एक्ट की धारा 67 के तहत सह-आरोपी की ओर से दिए गए बयानों के आधार पर फंसाया गया था।
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कोर्ट ने पाया कि अभियोजन का मामला केवल सह-आरोपी के बयानों पर आधारित नहीं था, क्योंकि आवेदक की भूमिका को साबित करने के लिए कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप बातचीत और दूसरे हालात पर भी भरोसा किया गया था। जेएनएफ
नशीली चीज की बरामदगी न होना जमानत के दावे का आधार नहीं
कोर्ट ने कहा कि नशीली चीज की बरामदगी न होना जमानत के दावे का आधार नहीं हो सकता। सप्लायर या साजिश करने वाले के तौर पर पर्दे के पीछे काम करने वाला आरोपी इसे आधार बनाकर बच नहीं सकता। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 के तहत साजिश करने वाला या उकसाने वाला भी उतना ही जिम्मेदार है, जितना वह व्यक्ति जिससे प्रतिबंधित वस्तु बरामद हुई है। कोर्ट ने पाया कि आवेदक पर 1.330 किलो चरस की सप्लाई से जुड़े एक और एनसीबी केस में भी ट्रायल चल रहा है। आवेदक एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत दो शर्तों को पूरा करने में नाकाम रहा है।