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Jammu News: एमएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
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- कभी पेपर लीक, कभी भर्ती में विवाद, अब ओएमआर शीट में गड़बड़ी का मामला
- हजारों अभ्यर्थियों को भुगतनी पड़ी देरी, अनिश्चितता और दोबारा तैयारी की मार
- पिछले कुछ वर्षों में कई चयन प्रक्रियाएं विवादों और अनियमितताओं से हुईं प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं के रद्द होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में एमएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा शुरू होने से महज 10 मिनट पहले अचानक रद्द कर दी गई। परीक्षा केंद्र के बाहर अपनी सीटों पर बैठने का इंतजार कर रहे छात्र इस फैसले से सन्न रह गए। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की उस पूरी भर्ती और प्रवेश परीक्षा प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जो पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों, पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों के भंवर में फंसी हुई है। इन घटनाओं ने समय-समय पर परीक्षा और भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता को लेकर बहस छिड़ी है।
हालांकि एमएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा का मामला पहले के विवादों से अलग है। इस बार न तो पेपर लीक की शिकायत सामने आई और न ही चयन प्रक्रिया को लेकर कोई विवाद था। परीक्षा ओएमआर शीट में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद रद्द की गई। फिर भी परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले सामने आई इस चूक ने परीक्षा संचालन की तैयारियों और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। बोर्ड ने मामले की जांच कराने और नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित करने की बात कही है। परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले आए इस फरमान के बाद परीक्षा केंद्रों के बाहर अफरा-तफरी और भारी आक्रोश का माहौल देखने को मिला। दूर-दराज के इलाकों से भारी खर्च और महीनों की तैयारी के बाद पहुंचे अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रशासन का यह रवैया युवाओं के भविष्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है। आखिर परीक्षा के ठीक 10 मिनट पहले ऐसी कौन सी तकनीकी या प्रशासनिक मजबूरी आ गई कि पूरी प्रक्रिया को ही रोकना पड़ा? इस सवाल का जवाब देने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आ रहा है।
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व्यवस्था से उठ रहा युवाओं का भरोसा
लगातार होती इन घटनाओं ने समय-समय पर परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता, गोपनीयता और कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। युवाओं का आरोप है कि बार-बार होने वाली इन चूक से न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि सरकारी तंत्र और पारदर्शी व्यवस्था से उनका भरोसा भी उठता जा रहा है। बुद्धिजीवियों और छात्र संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और बार-बार परीक्षा रद्द होने के खेल पर हमेशा के लिए लगाम लगनी चाहिए।
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एसआई भर्ती विवाद :
सीबीआई जांच, गिरफ्तारियां और दोबारा परीक्षा
वर्ष 2022 में जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (जेकेएसएसबी) की ओर से आयोजित सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा सबसे चर्चित भर्ती विवादों में से एक रही। परीक्षा के बाद अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप सामने आए। मामला बढ़ने पर जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां भी हुईं। बाद में भर्ती प्रक्रिया रद्द कर अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। इस मामले ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
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एफएए और जेई भर्ती :
सरकार को रद्द करनी पड़ी पूरी चयन प्रक्रिया
मार्च 2022 में आयोजित फाइनेंस अकाउंट्स असिस्टेंट (एफएए) भर्ती परीक्षा और जूनियर इंजीनियर (सिविल) भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी व्यापक विवाद खड़ा हुआ था। चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद सरकार ने अगस्त 2022 में दोनों भर्ती प्रक्रियाएं रद्द कर दी थीं। साथ ही मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया गया था।
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फायर सर्विसेज भर्ती :
नियुक्तियां मिलने के बाद भी नहीं थमा विवाद
भर्ती विवाद केवल परीक्षा और चयन सूची तक सीमित नहीं रहे। कुछ मामलों में नियुक्तियां होने के बाद भी कार्रवाई करनी पड़ी। फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज विभाग की भर्ती प्रक्रिया भी ऐसे ही मामलों में शामिल रही। जांच के बाद प्रशासन ने वर्ष 2025 में 103 कर्मचारियों की नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं। प्रशासन का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। हालांकि इस मामले में परीक्षा रद्द नहीं हुई थी लेकिन भर्ती प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठने के कारण नियुक्तियां समाप्त करनी पड़ीं।
- हजारों अभ्यर्थियों को भुगतनी पड़ी देरी, अनिश्चितता और दोबारा तैयारी की मार
- पिछले कुछ वर्षों में कई चयन प्रक्रियाएं विवादों और अनियमितताओं से हुईं प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं के रद्द होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में एमएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा शुरू होने से महज 10 मिनट पहले अचानक रद्द कर दी गई। परीक्षा केंद्र के बाहर अपनी सीटों पर बैठने का इंतजार कर रहे छात्र इस फैसले से सन्न रह गए। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की उस पूरी भर्ती और प्रवेश परीक्षा प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जो पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों, पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों के भंवर में फंसी हुई है। इन घटनाओं ने समय-समय पर परीक्षा और भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता को लेकर बहस छिड़ी है।
हालांकि एमएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा का मामला पहले के विवादों से अलग है। इस बार न तो पेपर लीक की शिकायत सामने आई और न ही चयन प्रक्रिया को लेकर कोई विवाद था। परीक्षा ओएमआर शीट में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद रद्द की गई। फिर भी परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले सामने आई इस चूक ने परीक्षा संचालन की तैयारियों और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। बोर्ड ने मामले की जांच कराने और नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित करने की बात कही है। परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले आए इस फरमान के बाद परीक्षा केंद्रों के बाहर अफरा-तफरी और भारी आक्रोश का माहौल देखने को मिला। दूर-दराज के इलाकों से भारी खर्च और महीनों की तैयारी के बाद पहुंचे अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रशासन का यह रवैया युवाओं के भविष्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है। आखिर परीक्षा के ठीक 10 मिनट पहले ऐसी कौन सी तकनीकी या प्रशासनिक मजबूरी आ गई कि पूरी प्रक्रिया को ही रोकना पड़ा? इस सवाल का जवाब देने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आ रहा है।
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लगातार होती इन घटनाओं ने समय-समय पर परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता, गोपनीयता और कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। युवाओं का आरोप है कि बार-बार होने वाली इन चूक से न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि सरकारी तंत्र और पारदर्शी व्यवस्था से उनका भरोसा भी उठता जा रहा है। बुद्धिजीवियों और छात्र संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और बार-बार परीक्षा रद्द होने के खेल पर हमेशा के लिए लगाम लगनी चाहिए।
एसआई भर्ती विवाद :
सीबीआई जांच, गिरफ्तारियां और दोबारा परीक्षा
वर्ष 2022 में जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (जेकेएसएसबी) की ओर से आयोजित सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा सबसे चर्चित भर्ती विवादों में से एक रही। परीक्षा के बाद अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप सामने आए। मामला बढ़ने पर जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां भी हुईं। बाद में भर्ती प्रक्रिया रद्द कर अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। इस मामले ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
एफएए और जेई भर्ती :
सरकार को रद्द करनी पड़ी पूरी चयन प्रक्रिया
मार्च 2022 में आयोजित फाइनेंस अकाउंट्स असिस्टेंट (एफएए) भर्ती परीक्षा और जूनियर इंजीनियर (सिविल) भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी व्यापक विवाद खड़ा हुआ था। चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद सरकार ने अगस्त 2022 में दोनों भर्ती प्रक्रियाएं रद्द कर दी थीं। साथ ही मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया गया था।
फायर सर्विसेज भर्ती :
नियुक्तियां मिलने के बाद भी नहीं थमा विवाद
भर्ती विवाद केवल परीक्षा और चयन सूची तक सीमित नहीं रहे। कुछ मामलों में नियुक्तियां होने के बाद भी कार्रवाई करनी पड़ी। फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज विभाग की भर्ती प्रक्रिया भी ऐसे ही मामलों में शामिल रही। जांच के बाद प्रशासन ने वर्ष 2025 में 103 कर्मचारियों की नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं। प्रशासन का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। हालांकि इस मामले में परीक्षा रद्द नहीं हुई थी लेकिन भर्ती प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठने के कारण नियुक्तियां समाप्त करनी पड़ीं।