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आईआईटी में सुसाइड : दो दिन से तनाव में थी यशस्विनी, खुद कराई थी पिता की टिकट
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जम्मू। आईआईटी की असिस्टेंट लाइब्रेरियन यशस्विनी यादव के आत्महत्या मामले में पुलिस को खुदकुशी नोट मिला है। इसमें किसी को भी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है। तनाव में होने का जिक्र किया है। पुलिस ने फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) को खुदकुशी नोट जांच के लिए भेजा है।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यशस्विनी तीन दिन से तनाव में थी। उन्होंने पिता योगेंद्र यादव और छोटी बहन से फोन पर बात कर परेशानी बताई थी। पिता से कहा था कि या तो वह घर आ जाएगी या फिर आप जम्मू आ जाएं। इसके बाद खुद ही पिता की टिकट बुक कराई। योगेंद्र यादव के अनुसार बेटी कुछ दिन से परेशान थी। कई बार फोन पर तनाव में होने की बात कही थी लेकिन वजह विस्तार से नहीं बताई।
बेटी के आग्रह पर जम्मू आने का फैसला किया। यशस्विनी ने ही कानपुर से दिल्ली तक फ्लाइट और दिल्ली से जम्मू तक ट्रेन में आने की व्यवस्था थी। योगेंद्र यादव रविवार शाम करीब 5:40 बजे जम्मू पहुंचे और सीधे आईआईटी परिसर स्थित यशस्विनी के आवास पर गए। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक आवाज देने और संपर्क करने की कोशिश के बावजूद जवाब नहीं मिला। पुलिस की मौजूदगी में दरवाजा खोला तो यशस्विनी मृत मिलीं। पीड़ित पिता ने बताया कि यशस्विनी लखनऊ विश्वविद्यालय से पीएचडी भी कर रही थीं। परिवार को उम्मीद थी कि जम्मू पहुंचने के बाद वे बात कर परेशानी समझ पाएंगे लेकिन वह मिली ही नहीं। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
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प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यशस्विनी तीन दिन से तनाव में थी। उन्होंने पिता योगेंद्र यादव और छोटी बहन से फोन पर बात कर परेशानी बताई थी। पिता से कहा था कि या तो वह घर आ जाएगी या फिर आप जम्मू आ जाएं। इसके बाद खुद ही पिता की टिकट बुक कराई। योगेंद्र यादव के अनुसार बेटी कुछ दिन से परेशान थी। कई बार फोन पर तनाव में होने की बात कही थी लेकिन वजह विस्तार से नहीं बताई।
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बेटी के आग्रह पर जम्मू आने का फैसला किया। यशस्विनी ने ही कानपुर से दिल्ली तक फ्लाइट और दिल्ली से जम्मू तक ट्रेन में आने की व्यवस्था थी। योगेंद्र यादव रविवार शाम करीब 5:40 बजे जम्मू पहुंचे और सीधे आईआईटी परिसर स्थित यशस्विनी के आवास पर गए। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक आवाज देने और संपर्क करने की कोशिश के बावजूद जवाब नहीं मिला। पुलिस की मौजूदगी में दरवाजा खोला तो यशस्विनी मृत मिलीं। पीड़ित पिता ने बताया कि यशस्विनी लखनऊ विश्वविद्यालय से पीएचडी भी कर रही थीं। परिवार को उम्मीद थी कि जम्मू पहुंचने के बाद वे बात कर परेशानी समझ पाएंगे लेकिन वह मिली ही नहीं। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।