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उत्सव का संयोग : गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत के साथ धार्मिक माह का कल से आगाज
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जम्मू। धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण महीने में मंदिरों, तवी नदी, हर की पौड़ी सहित अन्य ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा होगा। निर्जला एकादशी, सोमवती अमावस्या, पुरुषोत्तम (कमला) एकादशी, मासिक शिवरात्रि, वट पूर्णिमा, प्रदोष व्रत सहित प्रमुख धार्मिक तिथियां होंगी। व्रत, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान का विशेष महत्व रहेगा।
माह की शुरुआत तीन जून को गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत से होगी जिसमें श्रद्धालु गणेश की पूजा व चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन के संकट दूर होते हैं। छह से 11 जून तक पंचक रहेंगे जिसमें घर बनवाना या दक्षिण दिशा की यात्रा जैसे कार्यों से परहेज रहेगा जबकि पूजा-पाठ और दान शुभ होंगे। 11 जून को भगवान विष्णु को समर्पित पुरुषोत्तम (कमला) एकादशी का व्रत है। 12 जून को प्रदोष व्रत और 13 जून को ज्येष्ठ अधिक मास की मासिक शिवरात्रि रहेगी जिसमें शिव पूजा, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।
15 जून को मिथुन संक्रांति, सोमवती अमावस्या और अधिक मास का समापन एक साथ होगा जिससे स्नान, दान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व रहेगा। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ वर्ष का सबसे बड़ा दिन होगा जिसे ऋतु परिवर्तन और दक्षिणायन की शुरुआत से जोड़ा जाता है। 22 जून को धूमावती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। 25 जून को सबसे महत्वपूर्ण निर्जला एकादशी का व्रत रहेगा जिसमें बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने और उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। महीने के अंत में 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत, ज्येष्ठ पूर्णिमा और बटुक भैरव जयंती मनाई जाएगी जहां विवाहित महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु की कामना करेंगी।
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व्रत-त्योहार श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य, पूजा-अर्चना और आत्मिक शांति का विशेष अवसर लाएंगे। यह महीना धार्मिक रूप से अत्यंत विशेष रहेगा क्योंकि इसमें प्रमुख व्रत और पर्व आ रहे हैं।
-महंत रोहित शास्त्री
माह की शुरुआत तीन जून को गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत से होगी जिसमें श्रद्धालु गणेश की पूजा व चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन के संकट दूर होते हैं। छह से 11 जून तक पंचक रहेंगे जिसमें घर बनवाना या दक्षिण दिशा की यात्रा जैसे कार्यों से परहेज रहेगा जबकि पूजा-पाठ और दान शुभ होंगे। 11 जून को भगवान विष्णु को समर्पित पुरुषोत्तम (कमला) एकादशी का व्रत है। 12 जून को प्रदोष व्रत और 13 जून को ज्येष्ठ अधिक मास की मासिक शिवरात्रि रहेगी जिसमें शिव पूजा, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।
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15 जून को मिथुन संक्रांति, सोमवती अमावस्या और अधिक मास का समापन एक साथ होगा जिससे स्नान, दान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व रहेगा। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ वर्ष का सबसे बड़ा दिन होगा जिसे ऋतु परिवर्तन और दक्षिणायन की शुरुआत से जोड़ा जाता है। 22 जून को धूमावती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। 25 जून को सबसे महत्वपूर्ण निर्जला एकादशी का व्रत रहेगा जिसमें बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने और उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। महीने के अंत में 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत, ज्येष्ठ पूर्णिमा और बटुक भैरव जयंती मनाई जाएगी जहां विवाहित महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु की कामना करेंगी।
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-महंत रोहित शास्त्री