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Jammu News: पत्थरबाजों ने बिगाड़ा जम्मू का माहौल, कुछ मिनटों में शांत माहौल बदल गया तनाव में
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जम्मू। रायका बांदी में सोमवार को पैदल मार्च के दौरान दोपहर तक माहौल शांतिपूर्ण रहा। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग टूटे हुए मकानों के पास लगे टेंट में जुटने शुरू हुए। दोपहर तक बाहर से आने वाले लोगों का जमावड़ा होता रहा। शाम करीब चार बजे एसडीपीओ सिटी ईस्ट तीन थानों की पुलिस के साथ बांदी पहुंचे। आयोजकों से बातचीत चल रही थी। हालांकि जैसे ही पुलिस ने बिना अनुमति मार्च निकालने पर आपत्ति जताई और आगे बढ़ने से रोका, माहौल तनावपूर्ण हो गया। देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया। अमरनाथ यात्रा से पहले जम्मू संभाग का माहौल बिगाड़ने का पूरा प्रयास किया गया। लेकिन पुलिस ने हालात संभाल लिए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। इसके बाद भीड़ के एक हिस्से ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई। पुलिस ने हलका बल प्रयोग किया तो प्रदर्शनकारियों की तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। कुछ ही समय में पूरा इलाका लोगों के शोर से गूंज उठा। पथराव शुरू होते ही मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को अपनी स्थिति बदलनी पड़ी। कई जवान ढाल की आड़ लेते नजर आए, जबकि कुछ कर्मी पत्थरों से बचने के लिए पीछे हटते और भागते भी दिखे।
पथराव तेज होने के कारण अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस बार-बार लोगों से शांत रहने और पीछे हटने की अपील करती रही, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी। गोलियों की आवाज सुनते ही वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। कुछ ही समय में प्रदर्शन स्थल खाली होने लगा और सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
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संबंध : प्रभावित परिवार बोले- पथराव से हमारा कोई जुड़ाव नहीं
रायका बांदी में वन विभाग की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों ने सोमवार को हुई हिंसक झड़प और पथराव से खुद को अलग बताया है। लोगों का कहना है कि जब हमारे मकान तोड़े गए थे तब हमने पथराव नहीं किया, अब क्या करेंगे। हमारे परिवार का कोई भी व्यक्ति प्रदर्शन में शामिल नहीं था। हमारे मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है, पुनर्वास के लिए न सरकार न प्रशासन कुछ कर रहा है। सोमवार सुबह से ही बाहरी लोगों का पहुंचना शुरू हुआ था। पैदल मार्च या विरोध प्रदर्शन की हमसे किसी ने चर्चा नहीं की थी। हमारा उद्देश्य कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं है। मकान टूटने से जीवन पहले ही कठिन है, अब हमारे नाम पर बस राजनीति हो रही है।
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सवाल : पूर्व घोषित कार्यक्रम, फिर भी सुरक्षा प्रबंध नहीं
बांदी में सोमवार को हुए घटनाक्रम के बाद सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऑल ट्राइबल कोऑर्डिनेशन कमेटी ने पैदल मार्च का कार्यक्रम पहले ही सार्वजनिक कर दिया था। सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों के माध्यम से लोगों से जम्मू से श्रीनगर तक मार्च में शामिल होने की अपील की जा रही थी। इसके बावजूद सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग शहर में जमा हुए। इनमें ऐसे लोग थे जो पुंछ-राजोरी, कठुआ, सांबा, जम्मू जिले के विभिन्न इलाकों से थे। यहां उनके लिए भोजन सहित अन्य व्यवस्था भी की गई थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन को पहले से ही कार्यक्रम की जानकारी थी, तो इतनी बड़ी भीड़ को एकत्रित होने क्यों दिया गया। संवेदनशील मुद्दों से जुड़े कार्यक्रमों में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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सुरक्षा : पुलिस पर पथराव सामान्य बात नहीं
दोपहर तक शांत दिखाई दे रहा प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस के अनुसार बिना अनुमति मार्च निकालने से रोकने पर कुछ प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन का गुज्जर नेता तालिब हुसैन नेतृत्व कर रहे थे। बिना अनुमति के प्रदर्शन न करने के लिए बार-बार अपील के बावजूद प्रदर्शन शुरू किया गया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की। विरोध के बीच हालात ऐसे बने की पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों का सीधे टकराव हो गया। ऐसे में इसे सामान्य बात नहीं मान सकते।
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संवेदनशील : अमरनाथ यात्रा से पहले माहौल बिगाड़ने की कोशिश तो नहीं
घटना ऐसे समय में हुई है जब अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू होने को है। सुरक्षा एजेंसियां पहले से हाई अलर्ट पर हैं। हाल के दिनों में सीमा पार से संचार नेटवर्क, ड्रोन गतिविधियों और आतंकी घुसपैठ की आशंकाओं को लेकर लगातार सुरक्षा समीक्षा की जा रही है। ऐसे में रायका बांदी जैसी घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अभी तक किसी साजिश या संगठित योजना का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम के हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। इसमें देखा जा रहा है कि भीड़ के जुटने, उसके उग्र होने और बाद में हुई झड़प के पीछे केवल स्थानीय असंतोष था या फिर किसी ने माहौल भड़काने की बड़ी साजिश रची थी।
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सियासत : मकान टूटने के बाद रायका बांदी बना रहा सियासत का केंद्र
रायका बांदी में 19 मई को वन विभाग द्वारा अवैध मकान हटाने के बाद यह क्षेत्र राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा। प्रभावित परिवारों से मिलने और उनके समर्थन में आवाज उठाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का आना-जाना लगा रहा। पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, भाजपा और कांग्रेस समेत कई दलों के नेता मौके पर पहुंचे। इसके अलावा विधायक, पूर्व जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न जातीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। कार्रवाई के बाद से यहां लगातार राजनीतिक बयानबाजी होती रही। विपक्षी दलों ने वन विभाग की कार्रवाई को लेकर सरकार और प्रशासन को घेरा, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने उपराज्यपाल प्रशासन पर प्रभावित परिवारों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। विभिन्न संगठनों ने भी पुनर्वास और राहत की मांग उठाई। लेकिन अभी तक किसी ने भी ठोस पहल नहीं की। ऐसे में रायका बांदी अभी बस सियासत का अड्डा ही बनकर रह गया है।
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रायका बांदी पहुंची जांच समिति, प्रभावितों और अधिकारियों से जुटाई जानकारी
जम्मू। सिद्दड़ा के रायका बांदी क्षेत्र में 19 मई को अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई की जांच के लिए प्रदेश सरकार की ओर से गठित तीन सदस्यीय समिति ने सोमवार को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। समिति ने प्रभावित परिवारों, स्थानीय निवासियों और संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। समिति के अध्यक्ष वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग के सचिव राजिंदर सिंह तारा के नेतृत्व में सदस्यों ने रिपोर्ट तैयार की। इस दौरान उधमपुर के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर सत्येंद्र मौर्य और जम्मू के सहायक आयुक्त राजस्व डॉ. राजेश कुमार अत्री भी मौजूद रहे। समिति अपनी रिपोर्ट सात दिन के भीतर सरकार को सौंपेगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। इसके बाद भीड़ के एक हिस्से ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई। पुलिस ने हलका बल प्रयोग किया तो प्रदर्शनकारियों की तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। कुछ ही समय में पूरा इलाका लोगों के शोर से गूंज उठा। पथराव शुरू होते ही मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को अपनी स्थिति बदलनी पड़ी। कई जवान ढाल की आड़ लेते नजर आए, जबकि कुछ कर्मी पत्थरों से बचने के लिए पीछे हटते और भागते भी दिखे।
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पथराव तेज होने के कारण अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस बार-बार लोगों से शांत रहने और पीछे हटने की अपील करती रही, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी। गोलियों की आवाज सुनते ही वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। कुछ ही समय में प्रदर्शन स्थल खाली होने लगा और सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
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रायका बांदी में वन विभाग की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों ने सोमवार को हुई हिंसक झड़प और पथराव से खुद को अलग बताया है। लोगों का कहना है कि जब हमारे मकान तोड़े गए थे तब हमने पथराव नहीं किया, अब क्या करेंगे। हमारे परिवार का कोई भी व्यक्ति प्रदर्शन में शामिल नहीं था। हमारे मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है, पुनर्वास के लिए न सरकार न प्रशासन कुछ कर रहा है। सोमवार सुबह से ही बाहरी लोगों का पहुंचना शुरू हुआ था। पैदल मार्च या विरोध प्रदर्शन की हमसे किसी ने चर्चा नहीं की थी। हमारा उद्देश्य कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं है। मकान टूटने से जीवन पहले ही कठिन है, अब हमारे नाम पर बस राजनीति हो रही है।
सवाल : पूर्व घोषित कार्यक्रम, फिर भी सुरक्षा प्रबंध नहीं
बांदी में सोमवार को हुए घटनाक्रम के बाद सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऑल ट्राइबल कोऑर्डिनेशन कमेटी ने पैदल मार्च का कार्यक्रम पहले ही सार्वजनिक कर दिया था। सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों के माध्यम से लोगों से जम्मू से श्रीनगर तक मार्च में शामिल होने की अपील की जा रही थी। इसके बावजूद सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग शहर में जमा हुए। इनमें ऐसे लोग थे जो पुंछ-राजोरी, कठुआ, सांबा, जम्मू जिले के विभिन्न इलाकों से थे। यहां उनके लिए भोजन सहित अन्य व्यवस्था भी की गई थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन को पहले से ही कार्यक्रम की जानकारी थी, तो इतनी बड़ी भीड़ को एकत्रित होने क्यों दिया गया। संवेदनशील मुद्दों से जुड़े कार्यक्रमों में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सुरक्षा : पुलिस पर पथराव सामान्य बात नहीं
दोपहर तक शांत दिखाई दे रहा प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस के अनुसार बिना अनुमति मार्च निकालने से रोकने पर कुछ प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन का गुज्जर नेता तालिब हुसैन नेतृत्व कर रहे थे। बिना अनुमति के प्रदर्शन न करने के लिए बार-बार अपील के बावजूद प्रदर्शन शुरू किया गया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की। विरोध के बीच हालात ऐसे बने की पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों का सीधे टकराव हो गया। ऐसे में इसे सामान्य बात नहीं मान सकते।
संवेदनशील : अमरनाथ यात्रा से पहले माहौल बिगाड़ने की कोशिश तो नहीं
घटना ऐसे समय में हुई है जब अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू होने को है। सुरक्षा एजेंसियां पहले से हाई अलर्ट पर हैं। हाल के दिनों में सीमा पार से संचार नेटवर्क, ड्रोन गतिविधियों और आतंकी घुसपैठ की आशंकाओं को लेकर लगातार सुरक्षा समीक्षा की जा रही है। ऐसे में रायका बांदी जैसी घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अभी तक किसी साजिश या संगठित योजना का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम के हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। इसमें देखा जा रहा है कि भीड़ के जुटने, उसके उग्र होने और बाद में हुई झड़प के पीछे केवल स्थानीय असंतोष था या फिर किसी ने माहौल भड़काने की बड़ी साजिश रची थी।
सियासत : मकान टूटने के बाद रायका बांदी बना रहा सियासत का केंद्र
रायका बांदी में 19 मई को वन विभाग द्वारा अवैध मकान हटाने के बाद यह क्षेत्र राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा। प्रभावित परिवारों से मिलने और उनके समर्थन में आवाज उठाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का आना-जाना लगा रहा। पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, भाजपा और कांग्रेस समेत कई दलों के नेता मौके पर पहुंचे। इसके अलावा विधायक, पूर्व जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न जातीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। कार्रवाई के बाद से यहां लगातार राजनीतिक बयानबाजी होती रही। विपक्षी दलों ने वन विभाग की कार्रवाई को लेकर सरकार और प्रशासन को घेरा, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने उपराज्यपाल प्रशासन पर प्रभावित परिवारों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। विभिन्न संगठनों ने भी पुनर्वास और राहत की मांग उठाई। लेकिन अभी तक किसी ने भी ठोस पहल नहीं की। ऐसे में रायका बांदी अभी बस सियासत का अड्डा ही बनकर रह गया है।
रायका बांदी पहुंची जांच समिति, प्रभावितों और अधिकारियों से जुटाई जानकारी
जम्मू। सिद्दड़ा के रायका बांदी क्षेत्र में 19 मई को अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई की जांच के लिए प्रदेश सरकार की ओर से गठित तीन सदस्यीय समिति ने सोमवार को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। समिति ने प्रभावित परिवारों, स्थानीय निवासियों और संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। समिति के अध्यक्ष वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग के सचिव राजिंदर सिंह तारा के नेतृत्व में सदस्यों ने रिपोर्ट तैयार की। इस दौरान उधमपुर के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर सत्येंद्र मौर्य और जम्मू के सहायक आयुक्त राजस्व डॉ. राजेश कुमार अत्री भी मौजूद रहे। समिति अपनी रिपोर्ट सात दिन के भीतर सरकार को सौंपेगी।