रणजी ट्रॉफी: जम्मू-कश्मीर के बीच 'एंड' का फासला मिटा तो चैंपियन बनकर उभरी टीम, क्रिकेट में आएगा बड़ा बदलाव
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने 'एंड' की दीवार को समाप्त कर इतिहास रचा और रणजी ट्रॉफी जीतने के बाद अपनी एकता का परिचय दिया। पूर्व मुख्य कोच मिलाप मेवाड़ा का कहना है कि टीम में बदलाव और मानसिकता में सुधार ने चैंपियन बनने की राह आसान की।
विस्तार
एक छोटा-सा शब्द भी कई बार बहुत दूरियां पैदा कर देता है। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम में वह शब्द था 'एंड'। हिंदी में कहें तो और। जम्मू और कश्मीर...। और लगते ही वैचारिक धरातल पर जम्मू अलग ध्रुव तो कश्मीर अलग ध्रुव पर खड़ा नजर आता। मनोवैज्ञानिक स्तर पर यह फासला बहुत बड़ा था। सबसे बड़ी चुनौती टीम को तकनीक सिखाने की नहीं थी बल्कि जम्मू-कश्मीर के बीच 'एंड' को हटाकर उन्हें एक सूत्र में पिरोने की थी। इसमें कामयाबी मिली तो टीम ने इतिहास रच दिया।' यह कहना है जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य कोच मिलाप मेवाड़ा का।
मेवाड़ा (2018-2020) जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के साथ रहे। वह कहते हैं, मेरे कार्यकाल का सबसे बड़ा काम टीम का एकीकरण ही था। हमने ऐसी सोच विकसित की जिससे सभी एक होकर जम्मू-कश्मीर के लिए खेलने लगे। इसके लिए ड्रेसिंग रूम का माहौल बदला। खिलाड़ियों की छोटी-छोटी उपलब्धियों का जश्न मनाना शुरू किया। इससे खेल भावना की संस्कृति बनी। कप्तान पारस डोगरा इस बात के प्रमाण हैं।
मेवाड़ा कहते हैं, हमने खिलाड़ियों की फिटनेस पर फोकस किया। तेज गेंदबाजों की खोज की। बल्लेबाजों को लंबी पारी खेलने के लिए उनका माइंडसेट बदला। कुल मिलाकर कहें तेा पहले टीम सिर्फ प्रतिभागिता तक सीमित थी लेकिन हमने उसे चैंपियन वाले माइंडसेट में बदला। उन्हीं बदलावों का ही नतीजा था कि टीम 2019-2020 के रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची। मजेदार बात यह है कि तब कर्नाटक से हमें हार मिली थी और आज हमने फाइनल में उसे करारी शिकस्त दी है।
हमने आकिब को मौका दिया
मेवाड़ा कहते हैं, अब जब बड़े टूर्नामेंट में जीत का स्वाद चखते हैं तो एहसास होता है कि जीत के मायने क्या हैं। मेरा मानना रहा है कि बल्लेबाज एक मैच जिता सकता है लेकिन गेंदबाज पूरा टूर्नामेंट जिता सकता है। 2018 से 2020 के बीच ही आकिब नबी टीम से जुड़े। हमने प्रमुख तेज गेंदबाज को विश्राम देकर आकिब को मौका दिया। इसी दौर में रासिख सलाम, बाएं हाथ के स्पिनर आबिद मुश्ताक और कन्हैया वधावन जैसे खिलाड़ी टीम में आए। शुभम पुंडीर को टीम की कमान सौंपी गई थी।
अगले तीन साल तक अजेय रहेगी टीम
अगर टीम ऐसे ही खेलती रही तो अगले तीन साल तक नतीजे ऐसे ही शानदार रहेंगे। कोई भी टीम इन्हें हरा नहीं पाएगी। इस टीम में जीतने वाले कई खिलाड़ी लंबे समय से साथ खेल रहे हैं। ऐसी टीमों का रुतबा ही अलग होता है, बिल्कुल सौराष्ट्र की तरह जिसके खिलाड़ी 12 साल से साथ खेल रहे हैं। लंबे समय तक साथ खेलने से एक-दूसरे की क्षमता का पता होता है। हर खिलाड़ी अपना योगदान समझता है।
अगले तीन साल तक अजेय रहेगी टीम
अगर टीम ऐसे ही खेलती रही तो अगले तीन साल तक नतीजे ऐसे ही शानदार रहेंगे। कोई भी टीम इन्हें हरा नहीं पाएगी। इस टीम में जीतने वाले कई खिलाड़ी लंबे समय से साथ खेल रहे हैं। ऐसी टीमों का रुतबा ही अलग होता है, बिल्कुल सौराष्ट्र की तरह जिसके खिलाड़ी 12 साल से साथ खेल रहे हैं। लंबे समय तक साथ खेलने से एक-दूसरे की क्षमता का पता होता है। हर खिलाड़ी अपना योगदान समझता है।
अंडर-19 से महिला टीम तक आएगा बदलाव
मेवाड़ा कहते हैं, एक कहावत है -खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है, बिल्कुल वैसा ही जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के साथ होगा। रणजी चैंपियन बनने से पूरे सिस्टम में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आएगा। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इन सफलताओं को देखते हुए अन्य युवा भी इस खेल के प्रति आकर्षित होंगे।
इसका सीधा फायदा जमीनी स्तर पर दिखेगा जिससे अंडर-19 से लेकर महिला क्रिकेट टीम तक में एक नई ऊर्जा और व्यापक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। चयनकर्ताओं की नजर खिलाड़ियों पर होगी। भविष्य में जम्मू-कश्मीर से बड़े खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा होंगे।