67 साल का इंतजार खत्म: आखिरकार जम्मू-कश्मीर बना रणजी ट्रॉफी का चैंपियन, कर्नाटक को हराकर रचा इतिहास
जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी जीतने का इतिहास रचा, कर्नाटक को फाइनल में पहली पारी में 291 रनों की बढ़त के आधार पर हराया।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर ने अपने 67 साल पुराने रणजी ट्रॉफी इतिहास में एक सुनहरा पन्ना जोड़ दिया। टीम ने आठ बार के चैंपियन कर्नाटक को फाइनल में हराकर अपना पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जीत लिया। हुबली में खेला गया फाइनल मैच ड्रॉ रहा, लेकिन जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 291 रनों की भारी बढ़त के आधार पर खिताब अपने नाम किया। जम्मू-कश्मीर ने फाइनल के पांचवें और अंतिम दिन अपनी दूसरी पारी में 342/4 बनाकर कुल बढ़त को 633 रन तक पहुंचाया। ओपनर कामरान इकबाल (160 *) के दूसरे और साहिल लोत्रा (101*) के पहले प्रथम श्रेणी शतक ने इस ऐतिहासिक मौके को और चमकदार बना दिया।
फाइनल में इस जीत की नींव शुभम पुंडीर (121) ने रखी, जिनके शतक से जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 584 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर मैच अपनी ओर मोड़ लिया। फिर आकिब नबी (5/54) ने कर्नाटक को पहली पारी में 293 रन पर ढेर कर जीत लगभग पक्की कर दी। जम्मू-कश्मीर ने पांचवें दिन 186/4 से आगे से खेलना शुरू किया।
साहिल लोत्रा और कामरान इकबाल ने अपने शतक पूरे किए। दोपहर 2:11 बजे चाय से ठीक पहले दोनों कप्तानों (पारस डोगरा और देवदत्त पडिक्कल) ने हाथ मिलाए और जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी मैदान पर दौड़ पड़े। स्टेडियम में ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी की आवाजें गूंज उठीं। पुलिस से घिरे स्टेडियम में खिलाड़ियों ने पहले खिताब का जश्न मनाया।
- सत्र में सर्वाधिक 60 विकेट लेने वाले आकिब को टीम के खिलाड़ी और दर्शकों ने कंधों पर बिठाकर जश्न मनाया।
- 10 हजार रन पूरे किए जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा ने
- रणजी में वह वसीम जाफर के बाद ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी बने।
- जम्मू-कश्मीर : पहली पारी 584, दूसरी पारी 342/4 घोषित, कामरान इकबाल 160*, साहिल लोत्रा 101, प्रसिद्ध 2/42)
- कर्नाटक : पहली पारी 293/10, मयंक अग्रवाल 160, आकिब नबी 5/54
सच हो गया सपना : पारस
सच कहूं तो मेरे पास शब्द नहीं हैं। यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा पल है। जब तक मैं इस दुनिया में हूं, यह उपलब्धि मेरे लिए सबसे बड़ी रहेगी। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे इस शानदार टीम के साथ खेलने का मौका मिला। यह पूरे 14-15 खिलाड़ियों की मेहनत का नतीजा है। शुरू से हमें भरोसा था कि हम ट्रॉफी जीत सकते हैं। आज सपना सच हो गया। - पारस डोगरा, कप्तान
पारस के हाथ कमान आते ही सोना बन गई टीम
रणजी के 2024-25 के सीजन से पहले जम्मू-कश्मीर की कमान पारस डोगरा के हाथ आते ही टीम सोना बन गई। टीम ने वह कर दिखाया जिसका 67 साल से सिर्फ इंतजार चल रहा था। डोगरा न केवल बेहतरीन बल्लेबाज हैं बल्कि एक मंझे हुए कप्तान भी हैं। उनके पास भारतीय घरेलू क्रिकेट में तीन अलग-अलग टीमों (हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी और अब जम्मू-कश्मीर) की कप्तानी का अनुभव है। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दस हजार से ज्यादा रन बना चुके 41 वर्षीय दिग्गज के जम्मू-कश्मीर से जुड़ते ही टीम को अनुभव और सही दिशा मिली जिसकी वर्षों से कमी महसूस की जा रही थी। मैदान पर दबाव के बीच सही समय पर लिए गए उनके सटीक फैसलों से टीम के चैंपियन बनने की राह तैयार हो गई। सही दिशा मिलते ही बाकी का काम टीम ने कर डाला।
पारस ने इस सत्र में रणजी के साथ-साथ विजय हजारे ट्रॉफी में भी शानदार कप्तानी की। उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी कॅरिअर की शुरुआत 2001 में हिमाचल प्रदेश से की थी। 17 वर्षों में 95 मैच खेलने के बाद 2018 में वह पुडुचेरी से जुड़े। रणजी में पुडुचेरी की ओर से पहला शतक जड़ने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है। 2025 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी संभाली। डोगरा के नाम 33 प्रथम श्रेणी शतक और नौ दोहरे शतक दर्ज हैं जो उनके शानदार कॅरिअर को दर्शाता है।
दोहरे शतकों के मामलों में वह चेतेश्वर पुजारा के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर हैं। पारस आईपीएल में राजस्थान, केकेआर, पंजाब और गुजरात से भी खेल चुके हैं। 10 हजार रन और कप्तानी का लंबा अनुभव रखने वाले डोगरा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर ने इतिहास रचते हुए न सिर्फ पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची बल्कि चैंपियन बनने का गौरव भी हासिल किया है।
पूरे सत्र में आक्रामक बल्लेबाजी और घातक गेंदबाजी के शानदार संतुलन ने बदल दी तस्वीर
बेजोड़ प्रदर्शन...। हार न मानने वाला जज्बा...। बड़े मुकाबले में चैंपियन टीम की तरह खेलने का आत्मविश्वास....। यही वो तीन सबसे बड़े हथियार थे जिनके बूते जम्मू-कश्मीर ने घरेलू क्रिकेट में इतिहास रच दिया। कर्नाटक को रौंदकर 67 साल के टीम के इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाया। इस ऐतिहासिक खिताबी जीत में वैसे तो पूरी टीम का योगदान रहा लेकिन पूरे सत्र में आक्रामक बल्लेबाजी और घातक गेंदबाजी के शानदार संतुलन ने पूरी तस्वीर बदल दी। इस शानदार सफलता के छह खिलाड़ी सूत्रधार बने।
आकिब नबी : टूर्नामेंट में लिए सर्वाधिक विकेट
तेज गेंदबाज आकिब नबी इस सत्र में जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी ताकत रहे। 10 मैचों में 60 विकेट लेकर वे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। हर टीम के खिलाफ उन्होंने विकेट चटकाए। गेंदबाजी से उन्होंने न केवल दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल, मध्य प्रदेश, बंगाल और फाइनल में कर्नाटक को हार की ओर धकेला बल्कि अपनी अलग छाप भी छोड़ी। आकिब नबी का अभी तक का रणजी ट्राॅफी का सफर शानदार रहा है। अब तक खेले गए 39 मैचों में उन्होंने 148 विकेट लिए हैं।
अब्दुल समद : 10 मैचों में 748 रन ठोके
अब्दुल समद जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले तूफानी बल्लेबाज रहे। 10 मैचों में उन्होंने कुल 748 रन ठोके। 125 रन की सर्वोच्च पारी खेली। सेमीफाइनल में बंगाल के खिलाफ जब शुरुआती झटके लगे तो समद ने ही टीम को संभाला। कप्तान पारस डोगरा के साथ मिलकर 143 रन की पारी खेली। समद ने पूरे रणजी सीजन में न केवल ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की बल्कि शानदार सूझबूझ का भी परिचय दिया।
पारस डोगरा : दो शतक और तीन अर्धशतक की मदद से 637 रनों का योगदान दिया
कप्तान पारस डोगरा ने 10 मैचों में दो शतक और तीन अर्धशतक की मदद से 637 रन बनाए। संकट की घड़ी में क्रीज पर टिककर खेलना और युवा खिलाड़ियों को साथ लेकर चलना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। इसी ताकत ने टीम को चैंपियन बनाया।
सेमीफाइनल मुकाबले में पारस ने 58 रन की पारी खेल कर टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला। दूसरी पारी में 30 रनों की पारी खेल कर टीम को जीत दिलाई।
आबिद मुश्ताक :
445 रन बनाए तो 20 विकेट भी झटके : बाएं हाथ के स्पिनर आबिद मुश्ताक ने बल्ले ही नहीं गेंद से भी योगदान दिया। 10 मैचों में एक शतक, एक अर्धशतक के साथ 445 रन जोड़े। उन्होंने 20 विकेट भी झटके।
कन्हैया वधावन :
टीम को दी मजबूती : विकेटकीपर कन्हैया वधावन ने मध्यक्रम में टीम को स्थिरता दी। शुरुआती विकेट गिरने पर जिम्मेदारी निभाते हुए साझेदारी की। 10 मुकाबलों में 474 रन बनाए। भरोसेमंद बनकर उभरे।
सुनील कुमार :
तेज गेंदबाज सुनील कुमार ने 10 मैचों में 31 विकेट लिए। नई गेंद से शुरुआती सफलता दिलाने के साथ-साथ उन्होंने निचले क्रम में बल्ले से आकिब नबी का भरपूर साथ दिया।
नया गौरवशाली अध्याय
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम को उनकी पहली ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत पर हार्दिक बधाई देता हूं। इस जीत ने क्षेत्र के खेल इतिहास में एक नया गौरवशाली अध्याय लिखा है। यह एतिहासिक खेल उपलब्धि इस क्षेत्र के बढ़ते आत्म विश्वास प्रतिभा और आकांक्षाओं को दर्शाती है। -सीपी राधाकृष्णन, उपराष्ट्रपति
जीत नए बदलाव की पहचान
ये एक ऐसा क्षण है जो हर नागरिक को अत्यधिक गर्व से भर देता है और इस वास्तविकता को दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर में आए नए बदलाव ही यहां के युवाओं की नई पहचान हैं। शांति, प्रगति व समृद्धि के मंत्र ही नए जम्मू-कश्मीर की असली प्रेरक शक्ति हैं। -अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री
जम्मू-कश्मीर की टीम को दृढ़ता और लगन की एक उल्लेखनीय कहानी लिखने के लिए बधाई। - जय शाह, आईसीसी अध्यक्ष
जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व का क्षण
जम्मू-कश्मीर को उनकी पहली रणजी ट्रॉफी जीत पर हार्दिक बधाई। यह जीत टीम के अद्भुत जज्बे, अनुशासन और जुनून का प्रतीक है। जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए यह बेहद गर्व का क्षण है और यह क्षेत्र में बढ़ती खेल भावना व प्रतिभा को उजागर करता है। आशा है कि यह उपलब्धि राज्य के कई युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और ज्यादा खेलने के लिए प्रेरित करेगी। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
ट्रॉफी जीतते देखने की भावनाएं शब्दों से परे
जम्मू-कश्मीर का सर्वश्रेष्ठ पल आ गया है। अपनी क्रिकेट टीम को रणजी ट्रॉफी जीतते देखने की मेरी भावनाएं शब्दों से परे हैं। अपने दृढ़ संकल्प से इतिहास रचने वाले हर जुझारू खिलाड़ी का पूरे प्रदेश की ओर से धन्यवाद। पूरा प्रदेश आज गर्व से मुस्कुरा रहा है। आपने इतिहास को अमर कर दिया है। इसे पूरे सम्मान के साथ अपनाएं। -मनोज सिन्हा, उपराज्यपाल
घरेलू मैदान पर कर्नाटक पर इस ऐतिहासिक जीत के लिए टीम को बधाई। मैं खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए 2 करोड़ रुपये के नकद इनाम की घोषणा करता हूं। यह जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए एक युगांतकारी क्षण है जिसने पूरे क्षेत्र को गर्व और प्रेरणा से भर दिया है। सभी खिलाड़ी उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए हाल ही में बनाए गए नए नियमों के तहत सरकारी नौकरियों के भी हकदार होंगे। - उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री