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Jammu News: प्रदेश की टीम को लाल गेंद से मिली मजबूती, अब सीमित ओवर की कसौटी
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने पिछले दो वर्षों में लंबी अवधि के क्रिकेट में जिस संयम और रणनीति का प्रदर्शन किया जिससे टीम को नई पहचान मिली। वर्ष 2024-25 सत्र में रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना और 2025-26 सत्र में रणजी ट्रॉफी का चैंपियन बनना इस बात का प्रमाण है।
हालांकि सीमित ओवर प्रारूप (टी-20 और वनडे) में अभी वही स्थिरता पूरी तरह नहीं आई। आंकड़े बताते हैं कि टीम में व्यक्तिगत चमक है लेकिन सामूहिक रूप से मैच फिनिश करने की क्षमता को और निखारने की जरूरत है।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में पिछले दो सत्र में जम्मू-कश्मीर का प्रदर्शन रणजी ट्रॉफी के अनुरूप अच्छा नहीं रहा है। वर्ष 2025-26 सत्र में जम्मू-कश्मीर ने सात में से सिर्फ चार मुकाबले जीते हैं। टीम नॉकआउट स्तर तक भी नहीं पहुंची।
बल्लेबाजी में शुभम खजूरिया ने 163 रन बनाए जबकि आकिब नबी ने 15 विकेट लेकर गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभाली। इसके बावजूद नेट रन रेट और डेथ ओवरों में नियंत्रण की कमी टीम को लीग चरण से आगे नहीं ले जा सकी। टी-20 जैसे प्रारूप में शुरुआत और आखिरी पांच ओवरों का प्रदर्शन मैच का परिणाम तय करता है और यहीं टीम पिछड़ती दिख रही है।
वर्ष 2024-25 सत्र में टीम ने सात में से पांच मुकाबले जीते थे। एक दिवसीय प्रारूप में भी कहानी कुछ ऐसी ही रही। विजय हजारे ट्रॉफी में सात में से तीन जीत दर्ज हुईं। यावर ने 341 रन बनाकर शीर्ष क्रम की मजबूती दिखाई थी। आकिब नबी ने 221 रन और 14 विकेट लेकर ऑलराउंड योगदान दिया था। फिर भी शुरुआती विकेट गिरने और मध्य ओवरों में रन गति ठहरने से दबाव बढ़ता गया। ब्यूरो
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हालांकि सीमित ओवर प्रारूप (टी-20 और वनडे) में अभी वही स्थिरता पूरी तरह नहीं आई। आंकड़े बताते हैं कि टीम में व्यक्तिगत चमक है लेकिन सामूहिक रूप से मैच फिनिश करने की क्षमता को और निखारने की जरूरत है।
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सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में पिछले दो सत्र में जम्मू-कश्मीर का प्रदर्शन रणजी ट्रॉफी के अनुरूप अच्छा नहीं रहा है। वर्ष 2025-26 सत्र में जम्मू-कश्मीर ने सात में से सिर्फ चार मुकाबले जीते हैं। टीम नॉकआउट स्तर तक भी नहीं पहुंची।
बल्लेबाजी में शुभम खजूरिया ने 163 रन बनाए जबकि आकिब नबी ने 15 विकेट लेकर गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभाली। इसके बावजूद नेट रन रेट और डेथ ओवरों में नियंत्रण की कमी टीम को लीग चरण से आगे नहीं ले जा सकी। टी-20 जैसे प्रारूप में शुरुआत और आखिरी पांच ओवरों का प्रदर्शन मैच का परिणाम तय करता है और यहीं टीम पिछड़ती दिख रही है।
वर्ष 2024-25 सत्र में टीम ने सात में से पांच मुकाबले जीते थे। एक दिवसीय प्रारूप में भी कहानी कुछ ऐसी ही रही। विजय हजारे ट्रॉफी में सात में से तीन जीत दर्ज हुईं। यावर ने 341 रन बनाकर शीर्ष क्रम की मजबूती दिखाई थी। आकिब नबी ने 221 रन और 14 विकेट लेकर ऑलराउंड योगदान दिया था। फिर भी शुरुआती विकेट गिरने और मध्य ओवरों में रन गति ठहरने से दबाव बढ़ता गया। ब्यूरो