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Jammu News: पत्थरबाजी का दौर खत्म, अब खेल मैदान में जम्मू-कश्मीर की चमक
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- पांच जनवरी को अंडर-16 विजय मर्चेंट और 28 फरवरी को जीती रणजी ट्रॉफी
- क्रिकेट बना सकारात्मक बदलाव का प्रतीक, नई सोच और पारदर्शिता रही अहम
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। तीन दशक से ज्यादा समय तक आतंकवाद का दंश झेलने वाले जम्मू-कश्मीर के युवा पत्थरबाजी और गुमराह होने के कारण देश में चर्चा में रहे थे लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। अब जम्मू-कश्मीर के युवा अपनी क्रिकेट प्रतिभा के लिए जाने जा रहे हैं। जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं का विकास, नई सोच और पारदर्शी व्यवस्था से प्रदेश ने 2025-26 के घरेलू क्रिकेट सत्र में बीसीसीआई की दो सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों (अंडर-16 विजय मर्चेंट और रणजी ट्रॉफी) पर अपना कब्जा जमाया है।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में आई पारदर्शिता ने खिलाड़ियों को एक निष्पक्ष मंच दिया। नतीजतन प्रदेश के उभरते सितारों ने अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्राॅफी (प्लेट ग्रुप) में मिजोरम को शिकस्त देकर जम्मू-कश्मीर के खाते में पहली बीसीसीआई ट्रॉफी डाली। टीम का दबदबा ऐसा रहा कि उसने अपने ग्रुप (जिसमें मिजोरम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मेघालय शामिल थे) के सभी छह मुकाबले पारी के अंतर से जीते। युवाओं की इस ऊर्जा और नई व्यवस्था से मिले आत्मविश्वास का असर सीनियर टीम पर भी दिखा। देश के सबसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में भी जम्मू-कश्मीर ने चैंपियन की तरह खेलते हुए खिताब अपने नाम कर लिया। इस प्रदर्शन ने बताया कि जूनियर स्तर से लेकर रणजी चैंपियन बनने तक का यह जम्मू-कश्मीर के सुनहरे भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। तीन दशक से ज्यादा समय तक आतंकवाद का दंश झेलने वाले जम्मू-कश्मीर के युवा पत्थरबाजी और गुमराह होने के कारण देश में चर्चा में रहे थे लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। अब जम्मू-कश्मीर के युवा अपनी क्रिकेट प्रतिभा के लिए जाने जा रहे हैं। जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं का विकास, नई सोच और पारदर्शी व्यवस्था से प्रदेश ने 2025-26 के घरेलू क्रिकेट सत्र में बीसीसीआई की दो सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों (अंडर-16 विजय मर्चेंट और रणजी ट्रॉफी) पर अपना कब्जा जमाया है।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में आई पारदर्शिता ने खिलाड़ियों को एक निष्पक्ष मंच दिया। नतीजतन प्रदेश के उभरते सितारों ने अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्राॅफी (प्लेट ग्रुप) में मिजोरम को शिकस्त देकर जम्मू-कश्मीर के खाते में पहली बीसीसीआई ट्रॉफी डाली। टीम का दबदबा ऐसा रहा कि उसने अपने ग्रुप (जिसमें मिजोरम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मेघालय शामिल थे) के सभी छह मुकाबले पारी के अंतर से जीते। युवाओं की इस ऊर्जा और नई व्यवस्था से मिले आत्मविश्वास का असर सीनियर टीम पर भी दिखा। देश के सबसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में भी जम्मू-कश्मीर ने चैंपियन की तरह खेलते हुए खिताब अपने नाम कर लिया। इस प्रदर्शन ने बताया कि जूनियर स्तर से लेकर रणजी चैंपियन बनने तक का यह जम्मू-कश्मीर के सुनहरे भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।
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