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Jammu News: अरनिया क्षेत्र में बरसीम चारे से दर्जनों पशु बीमार
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खेत में उगा बरसीम का चारा।
- फोटो : arnia news
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अरनिया। सीमांत क्षेत्र अरनिया के पिंडी कठार, आल्हा, ब्यासपुर, कूल कलां, कल्याणा, मुलेचक, करियाल खुर्द, मडोल और सुहागपुर गांवों में बड़ी संख्या में पशुओं के बीमार होने के मामले सामने आए हैं। पशुपालकों ने बताया कि जानवर चारा छोड़ रहे हैं, दूध उत्पादन में भारी गिरावट आ रही है तथा मुंह से अत्यधिक लार टपकना और गोबर न करना जैसे लक्षण दिख रहे हैं।
पशु चिकित्सा सहायक सर्जन डॉ. अश्वनी कुमार ने फील्ड विजिट के दौरान करीब 20 मामलों का निरीक्षण किया, जहां सभी पशुओं में एक समान लक्षण पाए गए। उन्होंने कृषि अधिकारियों से बरसीम चारे की जांच कराई, जिसमें यूरिया का अत्यधिक उपयोग और फूल आने के बाद चारे के रूप में इस्तेमाल मुख्य कारण सामने आए।
कृषि अधिकारी महेश शर्मा ने बताया कि बरसीम में फूल आने पर कच्चे प्रोटीन की मात्रा घट जाती है और फाइबर बढ़ जाता है जो दुग्ध पशुओं के लिए हानिकारक है। उच्च नाइट्रेट स्तर वाले चारे से पशुओं के पेट में सूक्ष्मजीव नाइट्रेट को नाइट्राइट में बदल देते हैं, जो रक्त में मिलकर हीमोग्लोबिन को मेटहीमोग्लोबिन में परिवर्तित कर पाचन क्षमता कमजोर करता है। नतीजा पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते और पशु बीमार पड़ जाते हैं।
सहायक सर्जन डॉक्टर अश्वनी कुमार ने बताया कि शुरुआत में जानवर चारा नहीं खा रहा है। जानवरों के मुंह से अत्यधिक थूक और लार निरंतर टपक रही है। शुरुआती जांच में संक्रमित चारा खाने से जानवर बीमार पड़ रहे हैं। हालांकि बीमार पशुओं को दवाई देकर ठीक किया जा रहा है, परंतु किसानों को चारे के प्रति जागरूक करना अति आवश्यक है।
क्षेत्र में पशुओं में अचानक बीमारी के आने से पशुपालक चिंतित हैं। इसको मद्देनजर रखते हुए कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने तथा वैकल्पिक चारे की सलाह दी है।
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पशु चिकित्सा सहायक सर्जन डॉ. अश्वनी कुमार ने फील्ड विजिट के दौरान करीब 20 मामलों का निरीक्षण किया, जहां सभी पशुओं में एक समान लक्षण पाए गए। उन्होंने कृषि अधिकारियों से बरसीम चारे की जांच कराई, जिसमें यूरिया का अत्यधिक उपयोग और फूल आने के बाद चारे के रूप में इस्तेमाल मुख्य कारण सामने आए।
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कृषि अधिकारी महेश शर्मा ने बताया कि बरसीम में फूल आने पर कच्चे प्रोटीन की मात्रा घट जाती है और फाइबर बढ़ जाता है जो दुग्ध पशुओं के लिए हानिकारक है। उच्च नाइट्रेट स्तर वाले चारे से पशुओं के पेट में सूक्ष्मजीव नाइट्रेट को नाइट्राइट में बदल देते हैं, जो रक्त में मिलकर हीमोग्लोबिन को मेटहीमोग्लोबिन में परिवर्तित कर पाचन क्षमता कमजोर करता है। नतीजा पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते और पशु बीमार पड़ जाते हैं।
सहायक सर्जन डॉक्टर अश्वनी कुमार ने बताया कि शुरुआत में जानवर चारा नहीं खा रहा है। जानवरों के मुंह से अत्यधिक थूक और लार निरंतर टपक रही है। शुरुआती जांच में संक्रमित चारा खाने से जानवर बीमार पड़ रहे हैं। हालांकि बीमार पशुओं को दवाई देकर ठीक किया जा रहा है, परंतु किसानों को चारे के प्रति जागरूक करना अति आवश्यक है।
क्षेत्र में पशुओं में अचानक बीमारी के आने से पशुपालक चिंतित हैं। इसको मद्देनजर रखते हुए कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने तथा वैकल्पिक चारे की सलाह दी है।