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Jammu News: 8 माह से जेल में बंद छात्र को मिली जमानत
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सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायालय सांबा ने एक अहम फैसले में करीब 8 महीने से न्यायिक हिरासत में बंद एक छात्र को जमानत दे दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मुकदमे के पूरा होने से पहले किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना बिना अपराध सिद्ध हुए सजा देने के समान है।
यह मामला रामबन निवासी अखिलेश सिंह कटोच से जुड़ा है। इस पर एक आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वायरल करने का आरोप है। बाड़ी ब्राह्मणा थाना में मामला दर्ज होने के बाद आरोपी पिछले आठ माह से जेल में था।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद शर्मा ने कई अहम पहलुओं पर विचार किया। अदालत ने पाया कि पीड़िता और आरोपी के बीच पहले से दोस्ती के संबंध थे और दोनों ने स्वेच्छा से साथ समय बिताया था। साथ ही पीड़िता व उसके परिवार के बयान पहले ही दर्ज हो चुके हैं जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की संभावना कम हो गई है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि वीडियो किसने वायरल किया, यह ट्रायल के दौरान स्पष्ट होगा। फिलहाल आरोपी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राहत दी गई है।
अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने के साथ सख्त शर्तें लगाई है। आरोपी को पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी प्रकार का संपर्क करने से रोका गया है और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली किसी गतिविधि में शामिल न होने के निर्देश दिए गए हैं।
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यह मामला रामबन निवासी अखिलेश सिंह कटोच से जुड़ा है। इस पर एक आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वायरल करने का आरोप है। बाड़ी ब्राह्मणा थाना में मामला दर्ज होने के बाद आरोपी पिछले आठ माह से जेल में था।
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सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद शर्मा ने कई अहम पहलुओं पर विचार किया। अदालत ने पाया कि पीड़िता और आरोपी के बीच पहले से दोस्ती के संबंध थे और दोनों ने स्वेच्छा से साथ समय बिताया था। साथ ही पीड़िता व उसके परिवार के बयान पहले ही दर्ज हो चुके हैं जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की संभावना कम हो गई है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि वीडियो किसने वायरल किया, यह ट्रायल के दौरान स्पष्ट होगा। फिलहाल आरोपी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राहत दी गई है।
अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने के साथ सख्त शर्तें लगाई है। आरोपी को पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी प्रकार का संपर्क करने से रोका गया है और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली किसी गतिविधि में शामिल न होने के निर्देश दिए गए हैं।