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Jammu News: सबूत न मिलने पर कोर्ट ने दी जमानत
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दोस्त की गाड़ी रखने पर जांच के घेरे में आया था युवक, गिरफ्तारी की आशंका पर दायर की थी जमानत याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा की अदालत ने आरोपी को बड़ी राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत को स्थायी कर दिया है। वसीम अकरम निवासी खरा मड़ाना, बड़ी ब्राह्मणा का नाम आपराधिक मामले की जांच के दौरान सामने आया था। इसके बाद उसने गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत में स्टेट्स रिपोर्ट पेश की। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी मोहम्मद आरिफ और वसीम अकरम एक-दूसरे को जानते थे। उनके बीच मित्रतापूर्ण संबंध थे। पुलिस के अनुसार, जम्मू छोड़ने से पहले मोहम्मद आरिफ ने अपनी गाड़ी वसीम अकरम को सौंप दी थी। इसी आधार पर उनका नाम जांच में शामिल हुआ।
हालांकि, विस्तृत जांच के दौरान पुलिस को ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि वसीम अकरम को कथित अपराध की पहले से जानकारी थी या उन्होंने अपराध में किसी प्रकार की मदद, साजिश अथवा भागीदारी की हो। न किसी गवाह के बयान, न दस्तावेजी और न ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से उनकी भूमिका सामने आई।
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अदालत ने जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कहा कि इस स्तर पर आवेदक की संलिप्तता साबित करने के पर्याप्त आधार नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने पहले दी गई अंतरिम अग्रिम जमानत को स्थायी करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा की अदालत ने आरोपी को बड़ी राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत को स्थायी कर दिया है। वसीम अकरम निवासी खरा मड़ाना, बड़ी ब्राह्मणा का नाम आपराधिक मामले की जांच के दौरान सामने आया था। इसके बाद उसने गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत में स्टेट्स रिपोर्ट पेश की। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी मोहम्मद आरिफ और वसीम अकरम एक-दूसरे को जानते थे। उनके बीच मित्रतापूर्ण संबंध थे। पुलिस के अनुसार, जम्मू छोड़ने से पहले मोहम्मद आरिफ ने अपनी गाड़ी वसीम अकरम को सौंप दी थी। इसी आधार पर उनका नाम जांच में शामिल हुआ।
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हालांकि, विस्तृत जांच के दौरान पुलिस को ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि वसीम अकरम को कथित अपराध की पहले से जानकारी थी या उन्होंने अपराध में किसी प्रकार की मदद, साजिश अथवा भागीदारी की हो। न किसी गवाह के बयान, न दस्तावेजी और न ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से उनकी भूमिका सामने आई।
अदालत ने जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कहा कि इस स्तर पर आवेदक की संलिप्तता साबित करने के पर्याप्त आधार नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने पहले दी गई अंतरिम अग्रिम जमानत को स्थायी करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।