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Jammu: मचैल यात्रा ने पकड़ी रफ्तार, खराब मौसम पर भारी श्रद्धालुओं का उत्साह; दो दिन में 400 ने किए दर्शन

Thu, 30 Jul 2026 01:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 30 Jul 2026 01:06 AM IST
सार

मौसम की खराब परिस्थितियों के कारण इस वर्ष यात्रा 28 जुलाई से शुरू की जा सकी, जबकि हर वर्ष यह 25 जुलाई से शुरू होती है। पवित्र धाम में श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
 

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Jammu: Machail Yatra gains momentum; 400 offered prayers in two days.
दो दिन पहले शुरू हुई है यात्रा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमरनाथ यात्रा के बाद जम्मू-कश्मीर की दूसरी सबसे बड़ी और प्रसिद्ध श्री मचैल माता यात्रा पूरे उत्साह और उमंग के साथ प्रारंभ हो चुकी है। मौसम की खराब परिस्थितियों के कारण इस वर्ष यात्रा 28 जुलाई से शुरू की जा सकी, जबकि हर वर्ष यह 25 जुलाई से शुरू होती है। पवित्र धाम में श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

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मंदिर के मुख्य पुजारी मनोज सिंह ने बताया कि 25 जुलाई को हवन और विशेष पूजन-अर्चना कर मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए थे। वर्तमान में यात्रा पूरी तरह सुचारु रूप से चल रही है। यात्रा शुरू होने के शुरुआती दो दिनों के भीतर ही 400 से अधिक श्रद्धालु मां मचैल के दर्शन कर चुके हैं।
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अठोली के डीएसपी विजय भगत ने बताया कि गुलाबगढ़ बेस कैंप में बुधवार शाम तक 300 से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके थे। इनमें से कुछ श्रद्धालु बेस कैंप में रुके हुए हैं, जबकि अन्य पवित्र धाम की ओर रवाना हो चुके हैं। आगामी दिनों में मौसम अनुकूल रहने पर श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम और आरएफआईडी कार्ड अनिवार्य
डीएसपी के अनुसार, एसएसपी किश्तवाड़ के निर्देशन में सुरक्षा के व्यापक और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग पर सीआरपीएफ, एसडीआरएफ और भारतीय सेना के जवानों की उचित स्थानों पर तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुलभ आवाजाही के लिए प्रशासन ने इस बार आरएफआईडी कार्ड व्यवस्था अनिवार्य की है। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद गुलाबगढ़ बेस कैंप में श्रद्धालुओं को यह कार्ड दिए जा रहे हैं, जिसके बिना यात्रा की अनुमति नहीं है।

सड़क सुविधा से सुगम हुई कठिन यात्रा
पिछले वर्ष चिशोती में बादल फटने की आपदा के समय सड़क मार्ग सीमित था। श्रद्धालुओं को करीब 8 किलोमीटर कठिन पैदल चलना पड़ता था। इस वर्ष प्रशासन की पहल से सड़क मार्ग माता चंडी के भवन से दो किलोमीटर नजदीक दर्शनी गेट तक पहुंच चुका है। गुलाबगढ़ से छोटे वाहनों द्वारा महज 200 किराये में लगभग दो घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है। पहले इस मार्ग को पैदल तय करने में दो दिन तक लग जाते थे, वहीं अब दो घंटे में श्रद्धालु धाम तक पहुंच रहे हैं।


स्वयंभू शिवलिंग स्वरूप के भी दर्शन
मचैल मंदिर मां चंडी के दिव्य दरबार के साथ-साथ शिव पर्वत पर स्वयंभू शिवलिंग स्वरूप के दर्शन भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। मान्यता है कि मां चंडी की पिंडी एवं प्रतिमा अपने झुमकों और कंगनों की मधुर ध्वनि के साथ भक्तों को साक्षात दर्शन देती हैं। इसी अद्भुत आस्था के कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर वर्ष मां मचैल के दरबार में शीश नवाने पहुंचते हैं।

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