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Leh News: लद्दाख को राज्य न देने पर कारगिल में विरोध, सज्जाद कारगिली ने कहा- यह भारत सरकार की विफलता है
अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Wed, 06 Aug 2025 05:36 PM IST
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सार
कारगिल के सज्जाद कारगिली ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने को जनता के साथ विश्वासघात बताया और इसे काला दिवस करार दिया। उन्होंने गृह मंत्रालय की बातचीत में देरी और केडीए की चुप्पी पर भी सवाल उठाए है।
सज्जाद कारगिली
- फोटो : x
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विस्तार
कारगिल हमेशा से केंद्र शासित प्रदेश के विचार का विरोध करता रहा है। सज्जाद कारगिली कहते हैं, किसी भी लोकतंत्र में किसी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा मिलता है, लेकिन पहली बार किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया है और वह भी कारगिल के लोगों की इच्छा और सहमति के विरुद्ध।
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लद्दाख के लोगों के साथ विश्वासघात हुआ है, जहां जनता को लगता है कि 6 साल बीत जाने के बाद भी न तो नौकरियां हैं, न ही लोकतंत्र, लद्दाखी लोगों को शामिल किए बिना नीतियां बनाई जा रही हैं, संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची का वादा भी पूरा नहीं किया जा रहा है। सज्जाद ने स्पष्ट रूप से कहा कि "यह भारत सरकार का एक असफल निर्णय है और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लोगों के मुद्दों को हल करने में विफल रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि यह सबसे बुरा दिन है, जब लोगों से लोकतंत्र और प्रतिनिधित्व छीन लिया जाता है, तो यह एक काला दिन बन ही जाता है।
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सज्जाद ने गृह मंत्रालय द्वारा बातचीत में देरी पर कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने संगठन के एक प्रमुख सदस्य होने के बावजूद केडीए के प्रति अपनी नाखुशी व्यक्त की और कहा कि संगठन की कमियों पर आपत्ति जताना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि केडीए ने इस पर संज्ञान लिया और कोर कमेटी के सदस्यों की एक ऑनलाइन बैठक की, जिसमें 15 अगस्त से पहले किसी न किसी विरोध प्रदर्शन पर सहमति जताई गई। 6 अगस्त को केडीए की बैठक के बाद तारीखों की घोषणा की जाएगी।
केडीए के विपरीत जमीयत-उल-उलेमा इस्ना अशरिया कारगिल हमेशा इस बात पर अड़ा रहा है कि अगर लद्दाख को राज्य का दर्जा मिलता है तो यह भारत सरकार द्वारा लिया गया सबसे अच्छा फैसला होगा, लेकिन किसी कारण से अगर सरकार लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा बरकरार रखने का फैसला करती है तो यह स्वीकार्य नहीं होगा, ऐसी स्थिति में लद्दाख का पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य में विलय कर दिया जाना चाहिए।