जल्दबाजी और लापरवाही का दर्दनाक अंजाम: बनतालाब हादसे के बाद सन्नाटे में डूबा इलाका, लोग अब भी सहमे हुए
बनतालाब में हुए दर्दनाक हादसे के बाद इलाके में सन्नाटा पसरा है लोग अब भी मलबे और अपनों की चीखों की याद से सहमे हुए हैं।
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बनतालाब के ठठर पेट्रोल पंप के पास अब सब कुछ थमा हुआ सा नजर आ रहा है... पर इस खामोशी के बीच लोगों को चीखें गूंजने का अहसास हो रहा है। दर्दनाक हादसे के अगले दिन शनिवार को क्षेत्र में सन्नाटा था। लोग घटना से दुखी भी थे और डरे हुए भी। उनसे जब घटना के बारे में जिक्र किया गया तो बोले- मृतकों के शव की हालत डरा देने वाली थी। मौके पर अपनों की वे चीखें और मलबे के ढहने का मंजर याद आते ही सब सिहर जाते हैं।
स्थानीय निवासी नजर हुसैन कहते हैं कि अगर काम में जल्दबाजी न होती और सुरक्षा का ध्यान रखा जाता तो शायद ये हादसा नहीं होता। रात भर नींद नहीं आई। वह मंजर बार-बार याद आता रहा। पास के दुकानदार फिरोज के मुताबिक मजदूरों में डर साफ दिख रहा है। शनिवार को कोई भी मजदूर काम पर नहीं आया। जो आ रहे हैं, वे भी मलबे को देखकर सहम जाते हैं।
आदेश दिए जाते हैं, जिम्मेदारी तय नहीं होती
लोअर ठठर के मोहम्मद आबिद और अन्य लोगों का कहना है कि हर बार हादसे के बाद जांच के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं होती। हादसे से पहले निगरानी क्यों नहीं हुई। सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज क्यों किया गया।
दूरी बढ़ने से झाड़ियों के बीच से गुजर रहे लोग
घटनास्थल के आसपास शुक्रवार से ट्रैफिक विभाग की ओर से रूट डायवर्जन है, लेकिन लोगों के मन में जो डर और आक्रोश है, वह कहीं ज्यादा है। कुछ लोग तो दूरी बढ़ने से तंग आकर अपनी गाड़ी छोड़कर झाड़ियों के बीच से होकर गुजर रहे हैं। राहगीर अनामिका ने कहा कि प्रशासन ने जांच के आदेश तो दे दिए हैं लेकिन रास्ता कब तक बहाल होगा।
पिछले साल भी ढहा था यही हिस्सा
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पिछले साल भी हादसा हुआ था। फ्लाईओवर का वही हिस्सा ढह गया था। तब रेहड़ी के साथ गुजर रहे बुजुर्ग चपेट में आए थे और उनकी मौत हो गई थी।
