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मेधावियों का सम्मान: गले में मेडल, चेहरे पर चमक और आंखों में बड़े सपने, फलक ने 99% अंकों से मंजिल पाई
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 23 Jun 2026 03:14 PM IST
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सार
श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में कश्मीर के कोने-कोने से पहुंचे मेधावियों का सम्मान किया गया। जैसे ही किसी छात्र का नाम मंच से पुकारा जाता, सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता।
amar ujala medhavi samman
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
किसी के गले में मेडल था तो कोई हाथ में प्रमाणपत्र लिए अपने दोस्तों के साथ तस्वीरें खिंचवा रहा था। चेहरे पर खुशी और आंखों में भविष्य के सपने थे। शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में सोमवार को कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला। यहां अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए कश्मीर संभाग के विभिन्न जिलों से मेधावी छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक पहुंचे थे।
सुबह नौ बजे से ही विद्यार्थियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पंजीकरण के बाद पूरा परिसर इन होनहारों की आवाजाही से भर गया। कोई डॉक्टर तो कोई अफसर बनने की बात कर रहा था। सम्मान समारोह के दौरान मुख्य अतिथि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मेधावियों को प्रमाणपत्र और मेडल देकर सम्मानित किया।
जैसे ही किसी छात्र का नाम मंच से पुकारा जाता, सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता। मेडल पाकर मंच से उतरते मेधावियों के चेहरे की खुशी देखते ही बन रही थी। सम्मान मिलने के बाद अभिभावकों के चेहरे पर भी गर्व साफ दिख रहा था।
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सुबह नौ बजे से ही विद्यार्थियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पंजीकरण के बाद पूरा परिसर इन होनहारों की आवाजाही से भर गया। कोई डॉक्टर तो कोई अफसर बनने की बात कर रहा था। सम्मान समारोह के दौरान मुख्य अतिथि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मेधावियों को प्रमाणपत्र और मेडल देकर सम्मानित किया।
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जैसे ही किसी छात्र का नाम मंच से पुकारा जाता, सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता। मेडल पाकर मंच से उतरते मेधावियों के चेहरे की खुशी देखते ही बन रही थी। सम्मान मिलने के बाद अभिभावकों के चेहरे पर भी गर्व साफ दिख रहा था।
सम्मान पाने के बाद विद्यार्थियों में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ तस्वीर खिंचवाने को लेकर भी खास उत्साह दिखा। मेडल और प्रमाणपत्र हाथ में लिए ये मेधावी उनकी एक झलक पाने तथा इस लम्हे को यादगार बनाने के लिए उत्सुक नजर आए। तस्वीर खिंचवाने के बाद छात्र खुशी साझा करते देखे गए। अपने बच्चों को सम्मानित होते देख अभिभावकों की खुशी भी देखने लायक थी।
पहली बार इतने टॉपर्स को एक साथ देखा...
कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों के लिए भी यह दिन खास रहा। पुलवामा से पहुंचे परवेज अहमद ने कहा कि पहली बार कश्मीर के अलग-अलग जिलों के इतने मेधावी बच्चों को एक मंच पर देखने का मौका मिला। कुपवाड़ा से आए मुजफ्फर भट ने कहा कि अपने बच्चे को सम्मानित होते देख सारी मेहनत सफल लगने लगी। दोनों अभिभावकों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को और अच्छा करने का हौसला देते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों के लिए भी यह दिन खास रहा। पुलवामा से पहुंचे परवेज अहमद ने कहा कि पहली बार कश्मीर के अलग-अलग जिलों के इतने मेधावी बच्चों को एक मंच पर देखने का मौका मिला। कुपवाड़ा से आए मुजफ्फर भट ने कहा कि अपने बच्चे को सम्मानित होते देख सारी मेहनत सफल लगने लगी। दोनों अभिभावकों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को और अच्छा करने का हौसला देते हैं।
सेल्फी स्टैंड पर भीड़
कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए सेल्फी स्टैंड के आसपास दिनभर भीड़ रही। सम्मान मिलने के बाद विद्यार्थी अपने मेडल और प्रमाणपत्र के साथ वहां पहुंचते रहे। कई अभिभावक भी बच्चों के साथ फोटो खिंचवाकर इस पल को यादगार बनाते दिखे।
कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए सेल्फी स्टैंड के आसपास दिनभर भीड़ रही। सम्मान मिलने के बाद विद्यार्थी अपने मेडल और प्रमाणपत्र के साथ वहां पहुंचते रहे। कई अभिभावक भी बच्चों के साथ फोटो खिंचवाकर इस पल को यादगार बनाते दिखे।
आतंकी हमले के बाद थम गई थी पढ़ाई, फलक ने 99% अंकों से मंजिल पाई
बीते साल पहलगाम हमले के बाद स्कूल बंद थे। इंटरनेट प्रभावित था और लोग डरे हुए थे। ऐसे माहौल में पहलगाम से सटे ऐशमुकाम की छात्रा फलक गुलजार ने पढ़ाई जारी रखी और 12वीं विज्ञान में 99 फीसदी अंक हासिल किए। अब उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना है और वह नीट की तैयारी में जुटी हैं।
बीते साल पहलगाम हमले के बाद स्कूल बंद थे। इंटरनेट प्रभावित था और लोग डरे हुए थे। ऐसे माहौल में पहलगाम से सटे ऐशमुकाम की छात्रा फलक गुलजार ने पढ़ाई जारी रखी और 12वीं विज्ञान में 99 फीसदी अंक हासिल किए। अब उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना है और वह नीट की तैयारी में जुटी हैं।
फलक बतातीं हैं कि हमले के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा था। लोगों में डर था। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी हुए। छह-सात दिन तक सामान्य गतिविधियां प्रभावित रहीं। स्कूल लगभग 20 दिन तक बंद रहे। इंटरनेट की रफ्तार भी काफी धीमी थी जिससे पढ़ाई में दिक्कत आई।
स्कूल खुलने के बाद भी शुरुआत में बहुत कम विद्यार्थी पहुंचते थे। धीरे-धीरे माहौल सामान्य हुआ और विद्यार्थी वापस कक्षाओं में आने लगे। फलक कहतीं हैं कि मैंने भी पढ़ाई पर पूरा फोकस किया और तैयारी जारी रखी। मुश्किल वक्त में हार मानने के बजाय लक्ष्य पर ध्यान रखना जरूरी होता है।
पहलगाम को सिर्फ उस घटना से न पहचानें
फलक चाहती हैं कि लोग पहलगाम को सिर्फ उस आतंकी हमले से न जोड़ें। उनके अनुसार यहां पढ़ने वाले, मेहनत करने वाले और बड़े सपने देखने वाले हजारों बच्चे हैं। एक घटना पूरे इलाके की पहचान नहीं हो सकती। यहां के लोग शांति चाहते हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं। जो कुछ हुआ वह पूरी तरह गलत था और पूरे इलाके ने उसका विरोध किया।
फलक चाहती हैं कि लोग पहलगाम को सिर्फ उस आतंकी हमले से न जोड़ें। उनके अनुसार यहां पढ़ने वाले, मेहनत करने वाले और बड़े सपने देखने वाले हजारों बच्चे हैं। एक घटना पूरे इलाके की पहचान नहीं हो सकती। यहां के लोग शांति चाहते हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं। जो कुछ हुआ वह पूरी तरह गलत था और पूरे इलाके ने उसका विरोध किया।
अब नीट पर नजर
12वीं विज्ञान में 99 फीसदी अंक हासिल करने वाली फलक अब नीट की तैयारी में जुटी हैं। उनका सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना है। फलक के पिता और शिक्षक गुलजार अहमद का कहना है कि एक घटना की वजह से पूरे इलाके को नहीं आंका जाना चाहिए। यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।
12वीं विज्ञान में 99 फीसदी अंक हासिल करने वाली फलक अब नीट की तैयारी में जुटी हैं। उनका सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना है। फलक के पिता और शिक्षक गुलजार अहमद का कहना है कि एक घटना की वजह से पूरे इलाके को नहीं आंका जाना चाहिए। यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।