{"_id":"6a399e9e940d8b6ee50e898b","slug":"mansoon-plantation-forest-jammu-news-c-10-jmu1062-944395-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: हरी-भरी फाइलें खुलीं तो मुरझा गए पौधे, सवालों में मानसून का पौधरोपण अभियान, वर्ष 2025 में लगाए 60 हजार पौधों में से काफी कम बचे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: हरी-भरी फाइलें खुलीं तो मुरझा गए पौधे, सवालों में मानसून का पौधरोपण अभियान, वर्ष 2025 में लगाए 60 हजार पौधों में से काफी कम बचे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चजम्मू। पिछले मानसून में चला पौधरोपण अभियान सवालों में आ गया है। निगरानी और देखभाल की कमी के कारण वर्ष 2025 में लगाए 60 हजार पौधों में से काफी कम पौधे बचे हैं। हालांकि वन विभाग का दावा है कि करीब 20 फीसदी पौधे मुरझाए हैं लेकिन जमीनी हकीकत विपरीत है।
ग्राउंड रिपोर्ट में अभियान पर 33 लाख खर्च होने की फाइल खुलते ही जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली घिर गई है। इस बार मानसून में हरियाली बढ़ाने के लिए 52 हजार पौधे लगाने की तैयारी की जा रही है। हैरानी तो इस बात की है कि संबंधित अधिकारियों के पास कितने पौधे मुरझा गए उसका रिकॉर्ड तक मौजूद नहीं है। फाइन आर्ट इंस्टीट्यूट, भगवती नगर व बेलीचराना रोड सहित कई स्थानों पर पौधों के अवशेष तक नहीं हैं।
पिछले वर्ष भगवती नगर, कासिम नगर, सैनिक कॉलोनी, रूपनगर, महामाया, छन्नी, गांधीनगर रोड, जम्मू विश्वविद्यालय रोड, केरन, मुठ्ठी पार्क, चुआदी व सतवारी सहित कई अन्य स्थानों पर पौधरोपण किया था। अधिकांश पौधे वन विभाग की तालाब तिल्लो स्थित नर्सरी में तैयार हुए थे। शुरुआती दिन में सिंचाई की व्यवस्था की गई लेकिन बाद में पौधों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। नियमित देखरेख और संरक्षण के अभाव में बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो गए। कई स्थानों पर ट्री-गार्ड तो मौजूद हैं लेकिन भीतर पौधे नहीं हैं। अब नगर निगम के साथ वन विभाग करीब 29 लाख रुपये खर्च कर एयरपोर्ट रोड, सतवारी, तवी रिवर फ्रंट, भगवती नगर, चुआदी-सुंजवां, कोट भलवाल डंपिंग साइट और रेलवे स्टेशन से नानक नगर चौक तक क्षेत्र को हरा-भरा करने जा रहा है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
सर्वाइवल ऑडिट जरूरी
पर्यावरण विशेषज्ञ व जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर पंकज मेहता का कहना है कि अभियान की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित रखने से तय होती है। ऐसे में सवाल है कि क्या इस बार हरियाली जमीन पर दिखेगी या फिर केवल फाइलों और आंकड़े तक सीमित रहेगी। पिछले पौधों का सर्वाइवल ऑडिट करवाया जाना चाहिए।
-- -- -- -
ट्री-गार्ड ही बना पेड़ का दुश्मन
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) कार्यालय के समीप पेड़ के चारों ओर लगाया लोहे का ट्री-गार्ड तने में धंस चुका है। समय पर गार्ड नहीं हटाने से पेड़ को नुकसान हो रहा है। साफ है कि पौधरोपण के बाद निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। वहीं तवी रिवर फ्रंट के बाएं ओर और चुआदी-सुंजवां में नए ग्रीन स्पेस विकसित किए जाएंगे। हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
-- -- -
इस वर्ष चिन्हित स्थलों पर करीब 52 हजार पौधे लगाए जाएंगे। निगरानी के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे ताकि सर्वाइवल रेट बेहतर हो सके।
- अश्वनी कुमार प्रभागीय वनाधिकारी, जम्मू
ग्राउंड रिपोर्ट में अभियान पर 33 लाख खर्च होने की फाइल खुलते ही जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली घिर गई है। इस बार मानसून में हरियाली बढ़ाने के लिए 52 हजार पौधे लगाने की तैयारी की जा रही है। हैरानी तो इस बात की है कि संबंधित अधिकारियों के पास कितने पौधे मुरझा गए उसका रिकॉर्ड तक मौजूद नहीं है। फाइन आर्ट इंस्टीट्यूट, भगवती नगर व बेलीचराना रोड सहित कई स्थानों पर पौधों के अवशेष तक नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले वर्ष भगवती नगर, कासिम नगर, सैनिक कॉलोनी, रूपनगर, महामाया, छन्नी, गांधीनगर रोड, जम्मू विश्वविद्यालय रोड, केरन, मुठ्ठी पार्क, चुआदी व सतवारी सहित कई अन्य स्थानों पर पौधरोपण किया था। अधिकांश पौधे वन विभाग की तालाब तिल्लो स्थित नर्सरी में तैयार हुए थे। शुरुआती दिन में सिंचाई की व्यवस्था की गई लेकिन बाद में पौधों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। नियमित देखरेख और संरक्षण के अभाव में बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो गए। कई स्थानों पर ट्री-गार्ड तो मौजूद हैं लेकिन भीतर पौधे नहीं हैं। अब नगर निगम के साथ वन विभाग करीब 29 लाख रुपये खर्च कर एयरपोर्ट रोड, सतवारी, तवी रिवर फ्रंट, भगवती नगर, चुआदी-सुंजवां, कोट भलवाल डंपिंग साइट और रेलवे स्टेशन से नानक नगर चौक तक क्षेत्र को हरा-भरा करने जा रहा है।
सर्वाइवल ऑडिट जरूरी
पर्यावरण विशेषज्ञ व जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर पंकज मेहता का कहना है कि अभियान की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित रखने से तय होती है। ऐसे में सवाल है कि क्या इस बार हरियाली जमीन पर दिखेगी या फिर केवल फाइलों और आंकड़े तक सीमित रहेगी। पिछले पौधों का सर्वाइवल ऑडिट करवाया जाना चाहिए।
ट्री-गार्ड ही बना पेड़ का दुश्मन
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) कार्यालय के समीप पेड़ के चारों ओर लगाया लोहे का ट्री-गार्ड तने में धंस चुका है। समय पर गार्ड नहीं हटाने से पेड़ को नुकसान हो रहा है। साफ है कि पौधरोपण के बाद निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। वहीं तवी रिवर फ्रंट के बाएं ओर और चुआदी-सुंजवां में नए ग्रीन स्पेस विकसित किए जाएंगे। हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस वर्ष चिन्हित स्थलों पर करीब 52 हजार पौधे लगाए जाएंगे। निगरानी के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे ताकि सर्वाइवल रेट बेहतर हो सके।
- अश्वनी कुमार प्रभागीय वनाधिकारी, जम्मू