चार साल, 24 संदिग्ध... कोई सुराग नहीं: हथियार और विस्फोटक बरामद, अपराधियों का पता नहीं, जांच के बाद केस बंद
चार साल की जांच, चार जांच अधिकारियों और 24 संदिग्धों के बावजूद जम्मू के सांबा में बरामद पिस्तौल और आईईडी मामले में अपराधियों का कोई सुराग नहीं मिला।
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सड़क किनारे पिस्तौल, जिंदा कारतूस और 15 बोतलों में बंद आईईडी मिलने के मामले में चार साल जांच के बाद केस बंद कर दिया गया है। इस बीच, चार जांच अधिकारी बदले, 24 संदिग्धों से पूछताछ हुई, लेकिन अपराधियों का कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार, पुलिस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। इस मामले को सुरक्षा व संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया था।
फाइनल रिपोर्ट से संतुष्टि जता अन्य महत्वपूर्ण मामलों की जांच पर असर पड़ने के मद्देनजर एनआईए कोर्ट ने फिलहाल यह केस बंद करने के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 14 फरवरी, 2021 को सुबह 07:30 बजे कांस्टेबल अजय शर्मा और एसपीओ राजीव कुमार सुरक्षा गश्त पर थे। इस दौरान उन्हें रख झांग नाले की झाड़ियों के पास रस्सी के साथ दो पैकेट और दो छोटे लकड़ी के ढांचे बरामद हुए। पैकेट खोलने उनमें से एक पैकेट में पांच पिस्तौल, 10 पिस्तौल मैगजीन और 149 गोलियां मिलीं। इनमें से 31 अलग से पॉलिथीन पेपर में लिपटी हुई थीं, बाकी मैगजीन में भरी हुई। दूसरे पैकेट में एक पिस्तौल, 30 गोलियां भरे दो पिस्तौल मैगजीन और पॉलीथिन से लिपटी आईईडी से भरी 15 सफेद बोतलें बरामद हुईं।
रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसा लगता है जैसे किसी अज्ञात व्यक्ति/व्यक्तियों ने देश की संप्रभुता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने और सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के इरादे और साजिश के तहत ये गोला-बारूद और विस्फोटक रखे हैं। कांस्टेबल अजय शर्मा और एसपीओ राजीव कुमार ने इस डॉकेट को अपनी बाइक पर रामगढ़ थाने पहुंचाया। यहां आईपीसी की धारा 122 और यूएपीएए अधिनियम की धाराओं में एफआरआई दर्ज की गई।
तत्कालीन एसएसपी सांबा के मौखिक निर्देश के आधार पर मामले की जांच तत्कालीन डीएसपी लव करण तनेजा, एसडीपीओ विजयपुर को सौंपी गई। उन्होंने एसएचओ रामगढ़ इंस्पेक्टर इंदरपाल सिंह के पास से हथियार और गोलाबारूद समेत सामग्री अपने कब्जे में ली। इसके बाद गवाहों के बयान दर्ज किए और घटनास्थल का दौरा किया गया।
उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम के बम निरोधक दस्ते से राय ली। बताया गया कि जब्त की गई विस्फोटक पदार्थ के किसी भी समय फट जाने और इससे बड़े पैमाने पर मानव जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
इसके बाद तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जम्मू की इजाजत से आईईडी मैटीरियल को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में डिस्पोज करा दिया गया। अन्य दस्तावेजों को सील करके, वस्तुओं को जांच के लिए सीएफएसएल चंडीगढ़ भेज दिया।
इसी बीच लव करण तनेजा का तबादल हो गया और आगे की जांच डीएसपी प्रियंका कुमारी को सौंपी गई। सीएफएसएल, चंडीगढ़ से रिपोर्ट आने के बाद हथियारों को मार्क करके 9एमएम पिस्तौल से टेस्ट फायर किया गया। टेस्ट फायरिंग सफल रही। 9एमएम पिस्टल कार्ट्रिज जिंदा पाए गए। कुछ ही समय बाद डीएसपी प्रियंका कुमारी का तबादला हो गया और जांच डीएसपी गारू राम, एसडीपीओ विजयपुर के पास आ गई। वे भी कोशिशों के बावजूद असल आरोपियों का पता नहीं लगा पाए।
उनके तबादले के बाद केस की जांच डीएसपी रोहित कुमार ने संभाली। जांच के दौरान 24 संदिग्धों से पूछताछ की। लेकिन कोई ठोस सबूत या सुराग नहीं मिल पाया। करीब चार साल जांच के बावजूद कोई सुराग न मिलने और भविष्य में भी इसकी संभावना न मानते हुए इसे बंद कर दिया गया।
जांच अधिकारी रोहित कुमार, लवकरण अैर प्रियंका कुमारी के फाइनल रिपोर्ट के समर्थन में बयान के आधार पर मामले की जांच अनट्रेस्ड के रूप में बंद कर दी गई।
अदालत ने जांच अधिकारी के बयान पर संतुष्टि जताई
तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मदन लाल की अदालत ने पुलिस की कोशिशों और जांच अधिकारी के बयान पर संतुष्टि जताई। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर खुली जांच जारी रखना बेकार है। आरोपियों की खुफिया तलाश जारी रहेगी। फाइल रिकॉर्ड में भेजते हुए यह भी कहा कि अगर किसी भी स्तर पर पुलिस को कोई और सुराग या सबूत मिलता है, तो जांच फिर से प्राथमिकता के आधार पर शुरू की जा सकती है।