54 साल पुरानी व्यवस्था बदलेगी: अब सिर्फ काम नहीं, पढ़ाई, इलाज और मकान खर्च के आधार पर तय होगी न्यूनतम मजदूरी
जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित कोड ऑन वेजेज रूल्स-2026 के तहत न्यूनतम मजदूरी तय करने में अब चार सदस्यीय परिवार के भोजन, कपड़े, मकान, शिक्षा, इलाज और अन्य आवश्यक खर्चों को आधार बनाया जाएगा।
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जम्मू-कश्मीर में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी तय करने का तरीका बदलने की तैयारी है। अब केवल कर्मचारी के काम की श्रेणी नहीं, बल्कि उसके चार सदस्यीय परिवार के भोजन, कपड़े, मकान, शिक्षा और इलाज जैसे जरूरी खर्चों को भी न्यूनतम मजदूरी तय करने का आधार बनाया जाएगा। श्रम एवं रोजगार विभाग ने कोड ऑन वेजेज (जम्मू-कश्मीर) रूल्स-2026 का मसौदा जारी कर 45 दिन में सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
अंतिम नियम लागू होने के बाद 54 वर्ष पुराने न्यूनतम मजदूरी और वेतन भुगतान संबंधी नियमों की जगह नई व्यवस्था प्रभावी होगी।ड्राफ्ट के अनुसार सरकार एक सामान्य श्रमिक के चार सदस्यीय परिवार की न्यूनतम जरूरतों का आकलन कर मजदूरी का निर्धारण करेगी। इसके लिए प्रति उपभोग इकाई प्रतिदिन 2700 कैलोरी भोजन व परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़े की जरूरत को मानक माना जाएगा।
मकान का किराया, बिजली, ईंधन, बच्चों की पढ़ाई, इलाज व अन्य जरूरी खर्चों को भी मजदूरी निर्धारण में शामिल किया जाएगा। नियमों के अनुसार मकान के किराये के लिए भोजन और कपड़ों पर होने वाले खर्च का 10 प्रतिशत, बिजली, ईंधन और अन्य मदों के लिए न्यूनतम मजदूरी का 20 प्रतिशत तथा शिक्षा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए अतिरिक्त 25 प्रतिशत राशि जोड़ी जाएगी। इन सभी मानकों के आधार पर न्यूनतम मजदूरी का नया फार्मूला तैयार होगा।
मजदूरी की नई दरें बाद में होंगी घोषित
सरकार ने कहा कि अभी केवल नियमों का मसौदा जारी किया गया है। 45 दिन के भीतर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। इसके बाद अलग अधिसूचना जारी कर विभिन्न श्रेणियों के कर्मियों की नई न्यूनतम मजदूरी घोषित की जाएगी। सरकार ने उद्योग संगठनों व ट्रेड यूनियनों से निर्धारित अवधि में सुझाव देने की अपील की है।
शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मजदूरी का प्रावधान
नए नियमों के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की जा सकेगी। कर्मचारियों को अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और अत्यधिक कुशल चार श्रेणियों में बांटा जाएगा। महंगाई भत्ते की समीक्षा हर वर्ष एक अप्रैल और एक अक्तूबर से पहले की जाएगी, ताकि बढ़ती महंगाई के अनुसार न्यूनतम मजदूरी में संशोधन किया जा सके।
डिजिटल होंगे रिकॉर्ड, वेब आधारित होगी जांच...नियम लागू होने के बाद वेतन पर्ची, कर्मचारियों से जुड़े रजिस्टर और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी रखे जा सकेंगे। श्रम विभाग वेब आधारित निरीक्षण प्रणाली लागू करेगा, जिससे निरीक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का दावा किया गया है।
नए नियमों का असर प्रदेश के करीब 10 लाख कर्मचारियों पर पड़ेगा। इनमें होटल, रेस्तरां, ढाबे, दुकानें, निजी अस्पताल, निजी स्कूल, फैक्ट्रियां, निर्माण कार्य, सुरक्षा एजेंसियां, परिवहन और अन्य निजी प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं। -चरणदीप सिंह, श्रम आयुक्त, जम्मू-कश्मीर