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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   The state government will manage 58 schools affiliated to Jamaat-e-Islami in Kashmir.

J&K: कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी से जुड़े 58 स्कूलों का प्रबंधन प्रदेश सरकार देखेगी, सरकारी नियंत्रण बढ़ा

Sun, 19 Apr 2026 11:45 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Sun, 19 Apr 2026 11:45 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में सरकार ने प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़े 58 स्कूलों का प्रबंधन अपने नियंत्रण में ले लिया है। इससे पहले भी 215 स्कूलों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिन पर कथित रूप से संगठन से जुड़कर गतिविधियां संचालित करने और अशांति फैलाने के आरोप थे।

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The state government will manage 58 schools affiliated to Jamaat-e-Islami in Kashmir.
लंगेट में जमात-ए-इस्लामी से संबद्ध स्कूल। - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू-कश्मीर सरकार ने शनिवार को कश्मीर घाटी में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) से जुड़े 58 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया। अधिकारियों ने बताया कि ये स्कूल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जेईआई के फलाह-ए-आम ट्रस्ट (एफएटी) के साथ जुड़े हुए थे।

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अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने इससे पहले पिछले साल अगस्त महीने में घाटी के सभी दस जिलों में जेईआई से जुड़े 215 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लिया था। इनमें से सबसे ज्यादा बारामुला में 53, अनंतनाग में 37, कुपवाड़ा में 36, पुलवामा में 22, बड़गाम में 20, कुलगाम में 16, शोपिया में 15, गांदरबल में 6, बांदीपोरा में 6 और श्रीनगर में 4 स्कूल थे।
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बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने का था आरोप
अधिकारियों ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी ज्यादातर एफएटी स्कूलों, मदरसों, अनाथालयों, मस्जिदों और अन्य परोपकारी कार्यों से अपना काम चलाता  रहा है। इस तरह के संस्थानों ने वर्ष 2008, 2010 और 2016 में बड़े पैमाने पर  अशांति फैलाने में नकारात्मक भूमिका निभाई जिससे आम लोगों को भारी परेशानी  उठानी पड़ी।

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शिक्षा विभाग ने 2022 में इन स्कूलों को बंद करने के दिए थे निर्देश
स्कूल शिक्षा विभाग ने जमात-ए-इस्लामी से जुड़े फलाह-ए-आम (एफएटी) की ओर से चलाए जा रहे 300 से अधिक संस्थानों में जून 2022 में पढ़ाई बंद करने का आदेश दिया था। इन्हें 15 दिनों के भीतर सील करने को कहा गया था। सभी छात्रों को मौजूदा सत्र के लिए नजदीकी सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया गया था। अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि जमात-ए-इस्लामी ज्यादातर एफएटी स्कूलों, मदरसों, अनाथालयों, मस्जिदों और अन्य परोपकारी कार्यों से अपना काम चलाता है और कहा था कि इस तरह के संस्थानों ने 2008, 2010 और 2016 में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाई। आदेश में कहा गया था कि इन प्रतिबंधित संस्थानों में पढ़ने वाले सभी छात्र मौजूदा सत्र के लिए नजदीकी सरकारी स्कूलों में दाखिला ले सकेंगे। 

बंदूक की नोक पर जमीन पर कब्जा करके बनाए थे स्कूल
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 300 से अधिक संख्या वाले लगभग सभी एफएटी स्कूल अवैध रूप से अधिग्रहित सरकारी और सामुदायिक भूमि पर मौजूद पाए गए हैं। इन जमीन पर जबरदस्ती, बंदूक की नोक पर कब्जा किया गया था। साथ ही राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर धोखाधड़ी और जालसाजी करके गलत ढंग से संस्थाएं बनाईं गई। उन्होंने बताया कि कि एसआईए पहले ही इस तरह के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है और एजेंसी जांच के दायरे को बढ़ा रही है ताकि उन सभी धोखाधड़ी, अनधिकृत संस्थाओं और जालसाजी का पता लगाया जा सके जो पिछले 30 वर्षों में आतंकवादियों के इशारे पर की गई हैं।

पिछले साल राजनीतिक दलों ने दी थी तीखी प्रतिक्रिया
कश्मीर में राजनीतिक दलों ने जेईआई से संबद्ध 215 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने पर उस समय तीखी प्रतिक्रिया दी थी। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि जेईआई से जुड़े स्कूलों पर सरकार द्वारा प्रबंधन अपने हाथ में लेना प्रदेश के संस्थानों पर हमला है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्तारूढ़ पार्टी अपने ही लोगों के खिलाफ जा रही है और भाजपा का एजेंडा लागू कर रही है। अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने कहा था कि इन स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के संदर्भ में प्रतिबंध लागू करना न तो जरूरी था और न ही उचित। कहा था कि जमात के साथ सियासी व वैचारिक मतभेद हो सकते हैं पर यह निर्विवाद है कि एफएटी स्कूलों ने दशकों से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक और सराहनीय भूमिका निभाई है।

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