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Jammu News: आपदा से निपटने के लिए विद्यार्थियों व जवानों को तैयार कर रही एमआरटी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। मानसर के पहाड़ी इलाकों में पुलिस की माउंटेन रेस्क्यू टीम (एमआरटी) आपदा से निपटने के लिए जवानों व स्कूली बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दे रही है।
इस वर्ष 500 छात्रों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। एमआरटी के इंचार्ज इंस्पेक्टर राम सिंह ने बताया कि 35 वर्षों से वे पर्वतारोहण से जुड़े हैं। 2008 में माउंट एवरेस्ट अभियान के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस में एमआरटी विंग का गठन किया गया। आज दो से बढ़कर 18 टीमें हो चुकी हैं।
अमरनाथ यात्रा के दौरान 250 जवान पूरे रूट पर तैनात रहते हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि अमरनाथ यात्रा का मार्ग बेहद दुर्गम है जहां श्रद्धालु 15 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर दर्शन करने पहुंचते हैं। हाई एल्टीट्यूड के कारण कई बार यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आती हैं। ऐसे में एमआरटी टीम उन्हें मेडिकल सहायता प्रदान करने, खाई या पहाड़ से सुरक्षित निकालने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का कार्य करती है। जवान दिन-रात ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण कोर्स चलाया जाता है जिसमें जवानों को रैपलिंग, रॉक क्लाइंबिंग, जुमारिंग, जिपलाइन, जेट पुली सिस्टम के माध्यम से खाई से रेस्क्यू, स्ट्रेचर के जरिए पहाड़ से नीचे लाने और प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) व सीपीआर जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
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सांबा। मानसर के पहाड़ी इलाकों में पुलिस की माउंटेन रेस्क्यू टीम (एमआरटी) आपदा से निपटने के लिए जवानों व स्कूली बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दे रही है।
इस वर्ष 500 छात्रों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। एमआरटी के इंचार्ज इंस्पेक्टर राम सिंह ने बताया कि 35 वर्षों से वे पर्वतारोहण से जुड़े हैं। 2008 में माउंट एवरेस्ट अभियान के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस में एमआरटी विंग का गठन किया गया। आज दो से बढ़कर 18 टीमें हो चुकी हैं।
अमरनाथ यात्रा के दौरान 250 जवान पूरे रूट पर तैनात रहते हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि अमरनाथ यात्रा का मार्ग बेहद दुर्गम है जहां श्रद्धालु 15 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर दर्शन करने पहुंचते हैं। हाई एल्टीट्यूड के कारण कई बार यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आती हैं। ऐसे में एमआरटी टीम उन्हें मेडिकल सहायता प्रदान करने, खाई या पहाड़ से सुरक्षित निकालने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का कार्य करती है। जवान दिन-रात ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण कोर्स चलाया जाता है जिसमें जवानों को रैपलिंग, रॉक क्लाइंबिंग, जुमारिंग, जिपलाइन, जेट पुली सिस्टम के माध्यम से खाई से रेस्क्यू, स्ट्रेचर के जरिए पहाड़ से नीचे लाने और प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) व सीपीआर जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
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