{"_id":"6a6517c94525e38b9a0b0113","slug":"unique-tribute-journey-from-india-gate-reaches-kargil-homage-to-the-martyrs-at-the-war-memorial-today-2026-07-26","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Kargil Vijay Diwas: इंडिया गेट से कारगिल पहुंची अनूठी श्रद्धांजलि यात्रा, आज युद्ध स्मारक पर बलिदानियों को नमन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kargil Vijay Diwas: इंडिया गेट से कारगिल पहुंची अनूठी श्रद्धांजलि यात्रा, आज युद्ध स्मारक पर बलिदानियों को नमन
Sun, 26 Jul 2026 04:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर/मटायन
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर/मटायन
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 26 Jul 2026 04:15 AM IST
सार
उत्तर प्रदेश के 25 वर्षीय युवा आयुष मद्धेशिया ने देश के शूरवीरों को नमन करने और नई पीढ़ी में देशभक्ति की अलख जगाने के उद्देश्य से दिल्ली स्थित इंडिया गेट से कारगिल वॉर मेमोरियल (द्रास) तक की एक हजार किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा की है।
विज्ञापन
कारगिल विजय दिवस आज।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कारगिल युद्ध के अमर बलिदानियों और भारतीय सेना के अतुलनीय शौर्य को समर्पित अनूठी श्रद्धांजलि यात्रा शनिवार को अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई। आज कारगिल विजय दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर वॉर मेमोरियल पहुंचकर बलिदानियों को पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के 25 वर्षीय युवा आयुष मद्धेशिया ने देश के शूरवीरों को नमन करने और नई पीढ़ी में देशभक्ति की अलख जगाने के उद्देश्य से दिल्ली स्थित इंडिया गेट से कारगिल वॉर मेमोरियल (द्रास) तक की एक हजार किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा की है। 26 जून को दिल्ली से शुरू हुआ यह सफर 30 दिनों के कठिन परिश्रम के बाद कारगिल वॉर मेमोरियल से महज 30 किलोमीटर दूर मटायन पहुंचा। आयुष आज वॉर मेमोरियल पहुंचकर बलिदानियों को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।
विज्ञापन
इस कठिन यात्रा के उद्देश्य को साझा करते हुए आयुष ने बताया कि पिछले वर्ष जब देश में सेना से जुड़े मुद्दों पर बहस हो रही थी और कुछ लोग जवानों के समर्पण पर सवाल उठा रहे थे, तब उनके मन में यह विचार आया कि भारतीय सशस्त्र बलों के प्रति सच्चा आभार व्यक्त किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
कंटेंट क्रिएटर के रूप में अपना सफर शुरू कर रहे आयुष ने अपनी जनरेशन (जेन-जी) को संदेश देते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी इतिहास और देश के वीरों के बलिदानों को भूलती जा रही है। अपनी इस यात्रा के दौरान आयुष हर दिन पैदल चलते हुए कारगिल युद्ध के एक-एक नायक की शौर्यगाथा को डिजिटल माध्यमों से युवाओं तक पहुंचा रहे हैं। विजय दिवस की पूर्व संध्या पर उन्होंने परमवीर चक्र विजेता ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव की अमर गाथा को याद किया। उनका मानना है कि जब तक युवा अपने इतिहास को नहीं जानेंगे, तब तक वे अपने भविष्य का सही मार्गदर्शन नहीं कर सकते।
यह यात्रा अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में जहां 44 से 45 डिग्री की भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ा, वहीं श्रीनगर, गांदरबल और लद्दाख प्रवेश करते ही तापमान गिरकर 2 से 3 डिग्री तक पहुंच गया। समुद्र तल से 3,200 मीटर यानी लगभग 10,500 फीट से अधिक की ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी, बदलता मौसम और जंगली जानवरों का खतरा जैसी तमाम बाधाएं भी इस 25 वर्षीय युवा के इरादों को डिगा नहीं सकीं।
मीडिया की छवि से अलग है कश्मीर : आयुष
यात्रा के दौरान हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लोगों से मिले अपार स्नेह को याद करते हुए आयुष ने कहा कि मीडिया में दिखाई जाने वाली छवि से इतर कश्मीर के लोग बेहद मिलनसार हैं। रुकने की जगह न मिलने पर एक स्थानीय कश्मीरी भाई ने उन्हें अपने घर में जगह दी। उन्होंने देश के युवाओं से अपील की है कि वे टीवी और सोशल मीडिया की धारणाओं से बाहर निकलकर खुद कश्मीर और लद्दाख आएं।