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Jammu News: नाला उफनाने का खौफ, घरों व दुकानों के बाहर बना ली चार फुट ऊंची दीवारें
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- संजय नगर के लोगों ने बाढ़ से निपटने के लिए अपने स्तर पर की तैयारियां
- कइयों ने दूसरे फ्लोर पर शिफ्ट किया सामान, निगम से मांग रहे स्थायी समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। कितनी बार गृहस्थी बसाएं। बाढ़ हर बार जख्म दे जाती है। यह कहना है संजय नगर सेक्टर-9 के लोगों का, जो हर साल बरसात में नुकसान झेल रहे हैं।
मानसून की दस्तक के साथ ही लोगों को बाढ़ का डर सताने लगा है। इससे निपटने के लिए अपने स्तर पर तैयारियां कर रखीं हैं। कई लोगों ने घरों और दुकानों के आगे चार-चार फुट ऊंची दीवारें बना ली हैं। कुछ ने लाखों रुपये खर्च कर अपने पूरे मकान और दुकानों का स्तर सड़क से साढ़े चार फुट तक ऊंचा कर लिया है। इसके बावजूद तेज बारिश में पानी घरों में घुस ही जाता है। नगर निगम समस्या का स्थायी समाधान करने में नाकाम है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते दस वर्षों से समस्या झेल रहे हैं। रात-दिन छतों और घरों के बाहर नजर बनाए रखते हैं कि कहीं अचानक नाले का पानी उफनकर घरों में न घुस जाए। सबसे अधिक चिंता जान की सुरक्षा और वर्षों की मेहनत से जुटाए घरेलू सामान को बचाने की रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ के बाद बिखरी गृहस्थी को दोबारा बसाने में महीनों लग जाते हैं और जब तक सामान्य स्थिति में लौटते हैं, मानसून फिर दस्तक दे देता है। संजय नगर में यह केवल जलभराव का नहीं बल्कि हर साल दोहराई जाने वाली एक ऐसी त्रासदी का सवाल है जिससे अब स्थायी समाधान के बिना राहत मिलती नहीं दिख रही।
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लाखों खर्च कर मकान ऊंचा
किया, फिर भी घुस जाता है पानी
स्थानीय निवासी व दुकानदार संजीव संधु बताते हैं कि पिछले कई वर्षों से हर मानसून उनके परिवार के लिए परीक्षा बनकर आता है। उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर घर की ऊंचाई सड़क से लगभग साढ़े चार फुट कराई। बावजूद इसके हर वर्ष एक से डेढ़ फुट तक पानी घर में घुस जाता है। कई बार उनकी कार, फ्रिज, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं खराब हो चुकी हैं। उनका कहना है कि समस्या की जड़ पर काम करने के बजाय केवल औपचारिक सफाई कर देना समाधान नहीं है। बठिंडी, छन्नी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले कई नालों का पानी इसी एक नाले में छोड़ दिया गया है जबकि इसकी क्षमता वर्षों से नहीं बढ़ाई गई। नतीजतन बारिश में पूरा दबाव इसी नाले पर पड़ता है और जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है।
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बाढ़ ने बर्बाद कर दिया था बेटी
की शादी के लिए रखा सामान
स्थानीय निवासी जोगिंदर गुप्ता बताते हैं कि करीब दस वर्ष पहले आई भीषण बाढ़ आज भी जख्मों को ताजा कर देती है। उस समय बेटी की शादी थी और अधिकतर सामान पानी में डूबकर खराब हो गया। उस एक हादसे में उन्हें करीब आठ से दस लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। तभी से हर बरसात से पहले घर के मुख्य द्वार पर लोहे की मजबूत दीवार लगाई जाती है ताकि पानी भीतर प्रवेश न कर सके। अब यह केवल उनके घर ही नहीं बल्कि पूरे इलाके की मजबूरी बन चुकी है। हर परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार कोई न कोई सुरक्षा इंतजाम कर रखा है क्योंकि प्रशासन से उम्मीदें लगातार टूटती जा रही हैं।
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महंगाई के दौर में हर साल घर
छोड़ कहीं और बसना संभव नहीं
उमेश शर्मा बताते हैं कि उनके मकान में तेज बारिश के दौरान कई बार पांच से छह फुट तक पानी भर जाता है। ऐसे में पूरा परिवार दहशत में रातें बिताता है। उन्होंने भी घर के सामने ऊंची दीवार बना ली है। इसके बावजूद पानी का दबाव इतना अधिक होता है कि सुरक्षा इंतजाम भी बेअसर साबित होते हैं। उनका कहना है कि आज महंगाई के दौर में हर साल घर छोड़कर कहीं और बसना संभव नहीं है। लोग मजबूरी में इसी डर के साथ जी रहे हैं। घर का सामान भी दूसरे फ्लोर पर चढ़ा दिया है। यदि नाले को चौड़ा करना संभव नहीं है तो कम से कम उसकी नियमित सफाई कराई जाए जिससे पानी की निकासी बेहतर हो सके।
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नालों पर अतिक्रमण हटाया जाए
स्थानीय निवासी कर्ण महाजन का कहना है कि तेज बारिश के दौरान नाले पर बनी पुलियों के ऊपर पानी पहुंच जाता है। कई बार ऐसा लगता है कि पूरा इलाका शहर से कट गया हो। चारों ओर केवल पानी ही पानी दिखाई देता है। आर्थिक नुकसान अपनी जगह है लेकिन सबसे बड़ा डर परिवार की सुरक्षा का रहता है। उनका आरोप है कि नालों पर लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण से इनकी चाैड़ाई कम होती जा रही है। कई क्षेत्रों से आने वाला बरसाती पानी इसी नाले में पहुंचने से हालात और गंभीर हो जाते हैं। प्रशासन को अतिक्रमण की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
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बाढ़ से प्रभावित इलाकों में नालों की साफ-सफाई का काम 90 फीसदी पूरा कर लिया गया है। शेष कार्य 10 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।
- डाॅ. देवांश यादव, आयुक्त, नगर निगम
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- कइयों ने दूसरे फ्लोर पर शिफ्ट किया सामान, निगम से मांग रहे स्थायी समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। कितनी बार गृहस्थी बसाएं। बाढ़ हर बार जख्म दे जाती है। यह कहना है संजय नगर सेक्टर-9 के लोगों का, जो हर साल बरसात में नुकसान झेल रहे हैं।
मानसून की दस्तक के साथ ही लोगों को बाढ़ का डर सताने लगा है। इससे निपटने के लिए अपने स्तर पर तैयारियां कर रखीं हैं। कई लोगों ने घरों और दुकानों के आगे चार-चार फुट ऊंची दीवारें बना ली हैं। कुछ ने लाखों रुपये खर्च कर अपने पूरे मकान और दुकानों का स्तर सड़क से साढ़े चार फुट तक ऊंचा कर लिया है। इसके बावजूद तेज बारिश में पानी घरों में घुस ही जाता है। नगर निगम समस्या का स्थायी समाधान करने में नाकाम है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते दस वर्षों से समस्या झेल रहे हैं। रात-दिन छतों और घरों के बाहर नजर बनाए रखते हैं कि कहीं अचानक नाले का पानी उफनकर घरों में न घुस जाए। सबसे अधिक चिंता जान की सुरक्षा और वर्षों की मेहनत से जुटाए घरेलू सामान को बचाने की रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ के बाद बिखरी गृहस्थी को दोबारा बसाने में महीनों लग जाते हैं और जब तक सामान्य स्थिति में लौटते हैं, मानसून फिर दस्तक दे देता है। संजय नगर में यह केवल जलभराव का नहीं बल्कि हर साल दोहराई जाने वाली एक ऐसी त्रासदी का सवाल है जिससे अब स्थायी समाधान के बिना राहत मिलती नहीं दिख रही।
लाखों खर्च कर मकान ऊंचा
किया, फिर भी घुस जाता है पानी
स्थानीय निवासी व दुकानदार संजीव संधु बताते हैं कि पिछले कई वर्षों से हर मानसून उनके परिवार के लिए परीक्षा बनकर आता है। उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर घर की ऊंचाई सड़क से लगभग साढ़े चार फुट कराई। बावजूद इसके हर वर्ष एक से डेढ़ फुट तक पानी घर में घुस जाता है। कई बार उनकी कार, फ्रिज, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं खराब हो चुकी हैं। उनका कहना है कि समस्या की जड़ पर काम करने के बजाय केवल औपचारिक सफाई कर देना समाधान नहीं है। बठिंडी, छन्नी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले कई नालों का पानी इसी एक नाले में छोड़ दिया गया है जबकि इसकी क्षमता वर्षों से नहीं बढ़ाई गई। नतीजतन बारिश में पूरा दबाव इसी नाले पर पड़ता है और जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है।
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बाढ़ ने बर्बाद कर दिया था बेटी
की शादी के लिए रखा सामान
स्थानीय निवासी जोगिंदर गुप्ता बताते हैं कि करीब दस वर्ष पहले आई भीषण बाढ़ आज भी जख्मों को ताजा कर देती है। उस समय बेटी की शादी थी और अधिकतर सामान पानी में डूबकर खराब हो गया। उस एक हादसे में उन्हें करीब आठ से दस लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। तभी से हर बरसात से पहले घर के मुख्य द्वार पर लोहे की मजबूत दीवार लगाई जाती है ताकि पानी भीतर प्रवेश न कर सके। अब यह केवल उनके घर ही नहीं बल्कि पूरे इलाके की मजबूरी बन चुकी है। हर परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार कोई न कोई सुरक्षा इंतजाम कर रखा है क्योंकि प्रशासन से उम्मीदें लगातार टूटती जा रही हैं।
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महंगाई के दौर में हर साल घर
छोड़ कहीं और बसना संभव नहीं
उमेश शर्मा बताते हैं कि उनके मकान में तेज बारिश के दौरान कई बार पांच से छह फुट तक पानी भर जाता है। ऐसे में पूरा परिवार दहशत में रातें बिताता है। उन्होंने भी घर के सामने ऊंची दीवार बना ली है। इसके बावजूद पानी का दबाव इतना अधिक होता है कि सुरक्षा इंतजाम भी बेअसर साबित होते हैं। उनका कहना है कि आज महंगाई के दौर में हर साल घर छोड़कर कहीं और बसना संभव नहीं है। लोग मजबूरी में इसी डर के साथ जी रहे हैं। घर का सामान भी दूसरे फ्लोर पर चढ़ा दिया है। यदि नाले को चौड़ा करना संभव नहीं है तो कम से कम उसकी नियमित सफाई कराई जाए जिससे पानी की निकासी बेहतर हो सके।
नालों पर अतिक्रमण हटाया जाए
स्थानीय निवासी कर्ण महाजन का कहना है कि तेज बारिश के दौरान नाले पर बनी पुलियों के ऊपर पानी पहुंच जाता है। कई बार ऐसा लगता है कि पूरा इलाका शहर से कट गया हो। चारों ओर केवल पानी ही पानी दिखाई देता है। आर्थिक नुकसान अपनी जगह है लेकिन सबसे बड़ा डर परिवार की सुरक्षा का रहता है। उनका आरोप है कि नालों पर लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण से इनकी चाैड़ाई कम होती जा रही है। कई क्षेत्रों से आने वाला बरसाती पानी इसी नाले में पहुंचने से हालात और गंभीर हो जाते हैं। प्रशासन को अतिक्रमण की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में नालों की साफ-सफाई का काम 90 फीसदी पूरा कर लिया गया है। शेष कार्य 10 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।
- डाॅ. देवांश यादव, आयुक्त, नगर निगम