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Jammu News: चिंगारी से सुलगे किसानों के अरमान
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- सीमावर्ती इलाकों में खेतों से गुजरते बिजली के तारों की भेंट चढ़ गई है 100 कनाल गेहूं की फसल
- फसल से मिलने वाले पैसे से किसी ने खरीदना था बीज तो किसी ने कराना था बच्चे का स्कूल में दाखिला
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सीमावर्ती इलाकों में खेतों के ऊपर से गुजरते बिजली के तार किसानों के लिए बड़ी आफत बन गए हैं। शॉर्ट सर्किट से खेतों में गिरी एक चिंगारी ने महीनों से संजोकर रखे अरमान राख कर दिए हैं। बिश्नाह और परगवाल में ही बीते माह करीब 100 कनाल में पककर तैयार गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई है। फसल बेचकर मिलने वाले पैसे से किसी ने बीज खरीदना था तो किसी ने स्कूल में बच्चे का दाखिला करवाना था। वे अब अपनी जली हुई मेहनत को देखकर सिर्फ आंसू बहा रहे हैं।
बिश्नाह के लसवाड़ा गांव में 21 अप्रैल को लगी आग ने किसानों को गहरा सदमा दिया है। यहां देखते ही देखते करीब 80 कनाल में फसल जल गई। बेबस किसान अपनी आंखों के सामने खून-पसीने की कमाई को जलता देखने को मजबूर थे। जोगिंदर शर्मा की करीब पांच कनाल 11 मरला, कुलदीप सिंह की नौ कनाल नौ मरला, पुरुषोत्तम दास की एक कनाल पांच मरला, सुशील की चार कनाल 14 मरला फसल जली है। चुन्नी लाल की एक कनाल 19 मरला, गिरधारी लाल की आठ कनाल, रमेश सिंह की पांच कनाल, देवराज की 12 कनाल, पद्मदेव सिंह की सात कनाल नौ मरला, गिरधारी लाल की सात कनाल, रमेश लाल की एक कनाल पांच मरला, प्रेमनाथ की दो कनाल और चमन लाल की दो कनाल 16 मरला भूमि में गेहूं की फसल जल गई है। सीमावर्ती क्षेत्र परगवाल के गांव चिब्बे चक में भी 21 अप्रैल को किसान कुलदीप सिंह की चार कनाल में फसल जली है। ग्रामीणों का कहना है कि खेत के ऊपर से बिजली की लाइन गुजर रही है। तार आपस में टकराने से निकली चिंगारी से आग लगने का अंदेशा है।
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कटाई से एक दिन पहले
खाक हुई मेहनत : जोगिंदर
बिश्नाह के किसान जोगिंदर ने बताया कि पूरा परिवार खेती पर निर्भर है। इस बार पांच कनाल में गेहूं की फसल लगाई थी। इस पर करीब 10 हजार रुपये का खर्च आया था। पहले बेमौसमी बारिश से फसल बर्बाद होने का डर सता रहा था। जब मौसम साफ हुआ तो उम्मीद जगी कि इस बार फसल घर जरूर पहुंचेगी लेकिन कटाई से सिर्फ एक दिन पहले लगी आग ने उनकी पूरी फसल जलाकर राख कर दी। अब वे परिवार पालने के लिए सिर्फ सरकारी मुआवजे के इंतजार में हैं।
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लागत से बहुत कम मिलता
है मुआवजा : गिरधारी लाल
किसान गिरधारी लाल की आठ कनाल गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई। उन्होंने बताया कि जब तक दमकल विभाग की गाड़ी पहुंची तब तक आग सारी मेहनत निगल चुकी थी। बताया कि फसल बेचकर मिलने वाले पैसे से बीज और खेतीबाड़ी का अन्य सामान खरीदना था। गिरधारी लाल ने बताया कि फसल लगाने पर खर्च बहुत अधिक आता है। प्रशासन से जो मुआवजा मिलता है उससे नुकसान की आधी भरपाई भी नहीं हो पाती। उन्होंने प्रशासन से जल्द उचित राहत देने की गुहार लगाई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सीमावर्ती इलाकों में खेतों के ऊपर से गुजरते बिजली के तार किसानों के लिए बड़ी आफत बन गए हैं। शॉर्ट सर्किट से खेतों में गिरी एक चिंगारी ने महीनों से संजोकर रखे अरमान राख कर दिए हैं। बिश्नाह और परगवाल में ही बीते माह करीब 100 कनाल में पककर तैयार गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई है। फसल बेचकर मिलने वाले पैसे से किसी ने बीज खरीदना था तो किसी ने स्कूल में बच्चे का दाखिला करवाना था। वे अब अपनी जली हुई मेहनत को देखकर सिर्फ आंसू बहा रहे हैं।
बिश्नाह के लसवाड़ा गांव में 21 अप्रैल को लगी आग ने किसानों को गहरा सदमा दिया है। यहां देखते ही देखते करीब 80 कनाल में फसल जल गई। बेबस किसान अपनी आंखों के सामने खून-पसीने की कमाई को जलता देखने को मजबूर थे। जोगिंदर शर्मा की करीब पांच कनाल 11 मरला, कुलदीप सिंह की नौ कनाल नौ मरला, पुरुषोत्तम दास की एक कनाल पांच मरला, सुशील की चार कनाल 14 मरला फसल जली है। चुन्नी लाल की एक कनाल 19 मरला, गिरधारी लाल की आठ कनाल, रमेश सिंह की पांच कनाल, देवराज की 12 कनाल, पद्मदेव सिंह की सात कनाल नौ मरला, गिरधारी लाल की सात कनाल, रमेश लाल की एक कनाल पांच मरला, प्रेमनाथ की दो कनाल और चमन लाल की दो कनाल 16 मरला भूमि में गेहूं की फसल जल गई है। सीमावर्ती क्षेत्र परगवाल के गांव चिब्बे चक में भी 21 अप्रैल को किसान कुलदीप सिंह की चार कनाल में फसल जली है। ग्रामीणों का कहना है कि खेत के ऊपर से बिजली की लाइन गुजर रही है। तार आपस में टकराने से निकली चिंगारी से आग लगने का अंदेशा है।
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कटाई से एक दिन पहले
खाक हुई मेहनत : जोगिंदर
बिश्नाह के किसान जोगिंदर ने बताया कि पूरा परिवार खेती पर निर्भर है। इस बार पांच कनाल में गेहूं की फसल लगाई थी। इस पर करीब 10 हजार रुपये का खर्च आया था। पहले बेमौसमी बारिश से फसल बर्बाद होने का डर सता रहा था। जब मौसम साफ हुआ तो उम्मीद जगी कि इस बार फसल घर जरूर पहुंचेगी लेकिन कटाई से सिर्फ एक दिन पहले लगी आग ने उनकी पूरी फसल जलाकर राख कर दी। अब वे परिवार पालने के लिए सिर्फ सरकारी मुआवजे के इंतजार में हैं।
लागत से बहुत कम मिलता
है मुआवजा : गिरधारी लाल
किसान गिरधारी लाल की आठ कनाल गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई। उन्होंने बताया कि जब तक दमकल विभाग की गाड़ी पहुंची तब तक आग सारी मेहनत निगल चुकी थी। बताया कि फसल बेचकर मिलने वाले पैसे से बीज और खेतीबाड़ी का अन्य सामान खरीदना था। गिरधारी लाल ने बताया कि फसल लगाने पर खर्च बहुत अधिक आता है। प्रशासन से जो मुआवजा मिलता है उससे नुकसान की आधी भरपाई भी नहीं हो पाती। उन्होंने प्रशासन से जल्द उचित राहत देने की गुहार लगाई है।
