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Jharkhand: ‘हिंसा छोड़ विकास की मुख्यधारा से जुड़ें माओवादी’, सारंडा मुठभेड़ के बाद झारखंड DGP का बड़ा संदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चाईबासा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 24 Jan 2026 06:04 PM IST
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सार

Chaibasa News: सारंडा मुठभेड़ के बाद झारखंड डीजीपी ने माओवादियों से हिंसा छोड़ विकास की राह अपनाने की अपील की। 17 माओवादी मारे गए, भारी हथियार बरामद हुए। सुरक्षा बलों का दावा है कि राज्य में माओवाद उन्मूलन अंतिम चरण में है।

After Saranda encounter, Jharkhand DGP says Maoists should leave violence and join mainstream of development
झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की माओवादियों से अपील - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर राज्य के विकास अभियानों से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने माओवाद उन्मूलन की दिशा में अभियान तेज कर दिया है और मार्च तक राज्य से वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।

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सारंडा मुठभेड़ के बाद दौरा
डीजीपी तदाशा मिश्रा पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा पहुंचीं। यह दौरा सारंडा जंगल में गुरुवार सुबह हुई उस मुठभेड़ के बाद हुआ, जिसमें सुरक्षा बलों ने 17 माओवादियों को मार गिराया। मारे गए माओवादियों में कुख्यात पतिराम मांझी उर्फ अनल दा भी शामिल था, जिस पर कुल 2.35 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
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सुरक्षा बलों की कार्रवाई को बताया ऐतिहासिक
चाईबासा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी ने इस अभियान को बेहतर आकलन, समन्वय, योजना और क्रियान्वयन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई ऐतिहासिक है। इस संयुक्त अभियान में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस शामिल थी, जिसमें मारे गए माओवादियों में पांच महिलाएं भी थीं।
 
बड़े पैमाने पर तैनात रहे सुरक्षा बल
इस ऑपरेशन में करीब 1,500 सुरक्षा कर्मियों को लगाया गया था। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि सारंडा को नक्सलवाद से मुक्त कराना उनकी प्राथमिकता है और मुख्यमंत्री भी नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के पक्षधर हैं।
 
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार सुबह शुरू हुई तलाशी अभियान शनिवार को समाप्त हुई। इस दौरान चार एके-47, चार इंसास राइफल और तीन एसएलआर सहित भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए।
 
माओवाद के खिलाफ अंतिम दौर की लड़ाई
प्रेस वार्ता में मौजूद आईजी सीआरपीएफ साकेत कुमार सिंह ने बताया कि झारखंड में अब करीब 65 माओवादी बचे थे, जिनमें से मुठभेड़ के बाद संख्या 50 से कम रह गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में माओवाद के खिलाफ लड़ाई अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और इसे जल्द खत्म करने की रणनीति पर चर्चा की गई है।

पढ़ें- Jharkhand: सारंडा में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, दो दिनों में डेढ़ करोड़ के इनामी समेत 21 नक्सली मार गिराए
 
अनल दा का आपराधिक इतिहास
अनल दा कई बड़े हमलों में शामिल रहा था। वह मार्च 2006 में बोकारो के सीआईएसएफ कैंप पर हुए हमले, जून 2019 में सरायकेला-खरसावां के कुकड़ू हाट में पांच सुरक्षाकर्मियों की हत्या और मई 2025 में ओडिशा से पांच टन विस्फोटक लूट की घटनाओं में संलिप्त था। झारखंड, ओडिशा और एनआईए ने उस पर अलग-अलग इनाम घोषित कर रखे थे।


 
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कोल्हान क्षेत्र का सारंडा इलाका झारखंड में माओवादियों का अंतिम मजबूत गढ़ माना जाता है। बुढ़ा पहाड़, चतरा, लातेहार, गुमला, लोहरदगा, रांची और पारसनाथ जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने माओवादियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण कर लिया है।
 
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में अब तक 11 हजार से अधिक माओवादी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। लगभग 250 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं, जबकि 350 से ज्यादा ने आत्मसमर्पण किया है।

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