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झारखंड: हजारीबाग-बरही मार्ग पर पौधारोपण को लेकर हाईकोर्ट सख्त, पौधों के बीच दूरी अनिवार्य
Thu, 29 Oct 2026 08:25 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Thu, 29 Oct 2026 08:25 PM IST
सार
झारखंड उच्च न्यायालय ने एनएच-33 के हजारीबाग-बरही मार्ग चौड़ीकरण के दौरान पौधारोपण को लेकर अहम निर्देश दिया है। अदालत ने एनएचएआई और राज्य के वन विभाग को पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखने का निर्देश दिया।
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झारखंड उच्च न्यायालय
- फोटो : ANI
विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनएच-33 के हजारीबाग-बरही मार्ग चौड़ीकरण के दौरान पौधारोपण को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने सड़क निर्माण के दौरान उजड़ते पेड़ों के संरक्षण के लिए इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य सरकार के वन विभाग को निर्देश दिया कि सड़क किनारे पौधे लगाते समय किन्हीं भी दो पौधों के बीच पर्याप्त और उचित दूरी छोड़ी जानी अनिवार्य होगी। उचित दूरी होने से सभी पौधे और उनके फल-फूल पूरी तरह से सुरक्षित रह सकेंगे। अदालत ने इस मामले में एमिकस क्यूरी को भी अधिकृत किया है कि वे पौधारोपण के सही तौर-तरीकों को लेकर दोनों विभागों को अपने बहुमूल्य सुझाव दें।
पौधारोपण के नए मानक
पर्यावरण संतुलन को पुख्ता करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और वन विभाग एमिकस क्यूरी के सुझावों पर अमल करेंगे। मामले की पिछली सुनवाई में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से अदालत में एक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल किया गया था। प्राधिकरण ने अदालत को आश्वस्त किया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग के 15 किलोमीटर लंबे उस हिस्से पर, जहां सामान्य रूप से पौधे लगाना संभव नहीं था, वहां पर्यावरण संतुलन के मद्देनजर वैकल्पिक प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। इसके साथ ही प्राधिकरण ने अदालत को यह जानकारी भी दी कि राजमार्ग के दोनों किनारों पर निर्धारित संख्या में पौधे पहले ही रोपे जा चुके हैं।
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स्वतंत्र निगरानी और निष्पादन
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अदालत को मौखिक तौर पर बताया कि लगाए गए सभी पेड़ों के रख-रखाव, संरक्षण और जमीनी हकीकत की जांच के लिए एक स्वतंत्र मॉनिटरिंग एजेंसी नियुक्त की गई है। यह एजेंसी लगातार स्थल निरीक्षण करके पेड़ों की देखरेख सुनिश्चित कर रही है। अदालत ने एनएचएआई और वन विभाग द्वारा उठाए गए इन सभी कदमों पर संतोष व्यक्त किया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने हजारीबाग-बरही सड़क पर पौधारोपण और पेड़ों के संरक्षण से जुड़ी इस जनहित याचिका को पूरी तरह से निष्पादित कर दिया।
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सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य सरकार के वन विभाग को निर्देश दिया कि सड़क किनारे पौधे लगाते समय किन्हीं भी दो पौधों के बीच पर्याप्त और उचित दूरी छोड़ी जानी अनिवार्य होगी। उचित दूरी होने से सभी पौधे और उनके फल-फूल पूरी तरह से सुरक्षित रह सकेंगे। अदालत ने इस मामले में एमिकस क्यूरी को भी अधिकृत किया है कि वे पौधारोपण के सही तौर-तरीकों को लेकर दोनों विभागों को अपने बहुमूल्य सुझाव दें।
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पौधारोपण के नए मानक
पर्यावरण संतुलन को पुख्ता करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और वन विभाग एमिकस क्यूरी के सुझावों पर अमल करेंगे। मामले की पिछली सुनवाई में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से अदालत में एक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल किया गया था। प्राधिकरण ने अदालत को आश्वस्त किया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग के 15 किलोमीटर लंबे उस हिस्से पर, जहां सामान्य रूप से पौधे लगाना संभव नहीं था, वहां पर्यावरण संतुलन के मद्देनजर वैकल्पिक प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। इसके साथ ही प्राधिकरण ने अदालत को यह जानकारी भी दी कि राजमार्ग के दोनों किनारों पर निर्धारित संख्या में पौधे पहले ही रोपे जा चुके हैं।
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स्वतंत्र निगरानी और निष्पादन
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अदालत को मौखिक तौर पर बताया कि लगाए गए सभी पेड़ों के रख-रखाव, संरक्षण और जमीनी हकीकत की जांच के लिए एक स्वतंत्र मॉनिटरिंग एजेंसी नियुक्त की गई है। यह एजेंसी लगातार स्थल निरीक्षण करके पेड़ों की देखरेख सुनिश्चित कर रही है। अदालत ने एनएचएआई और वन विभाग द्वारा उठाए गए इन सभी कदमों पर संतोष व्यक्त किया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने हजारीबाग-बरही सड़क पर पौधारोपण और पेड़ों के संरक्षण से जुड़ी इस जनहित याचिका को पूरी तरह से निष्पादित कर दिया।