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Ranchi: रांची विश्वविद्यालय में एडमिशन का बढ़ेगा संकट; क्लस्टर सिस्टम से घटेंगी सीटें! कट-ऑफ बढ़ने की आशंका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 12:30 PM IST
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सार
Ranchi: रांची विश्वविद्यालय में राज्य सरकार के क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद स्नातक सीटों में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। वर्तमान 40 हजार सीटें घटकर लगभग 36 हजार रह सकती हैं, जिससे छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा और कट-ऑफ बढ़ने की आशंका है। सीटों के पुनर्निर्धारण के कारण नामांकन प्रक्रिया भी फिलहाल शुरू नहीं हो सकी है।
रांची विश्वविद्यालय
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद हजारों छात्र-छात्राओं की निगाहें अब स्नातक नामांकन प्रक्रिया पर टिकी हैं। हालांकि, इस वर्ष रांची विश्वविद्यालय में एडमिशन की राह पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकती है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए जा रहे क्लस्टर सिस्टम के कारण स्नातक स्तर की सीटों में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है।
क्लस्टर सिस्टम के इंतजार में अटकी नामांकन प्रक्रिया
यही कारण है कि विश्वविद्यालय के अंगीभूत एवं संबद्ध कॉलेजों में अभी तक नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन क्लस्टर सिस्टम के पूर्ण रूप से लागू होने और सीटों के पुनर्निर्धारण का इंतजार कर रहा है। नई व्यवस्था के तहत सीटों का निर्धारण कॉलेजों में उपलब्ध शिक्षकों, आधारभूत संरचना और संसाधनों के अनुसार किया जाएगा। इसके बाद ही नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
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40 हजार से घटकर 36 हजार तक पहुंच सकती हैं सीटें
वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में स्नातक स्तर पर लगभग 40 हजार सीटों पर नामांकन होता है। लेकिन क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद यह संख्या घटकर करीब 36 हजार तक पहुंच सकती है। सीटों में कमी आने से विद्यार्थियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कट-ऑफ भी पहले की अपेक्षा अधिक जा सकती है।
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क्षमता से अधिक नामांकन बना चिंता का विषय
विश्वविद्यालय का मानना है कि कई कॉलेजों में क्षमता से अधिक छात्रों का नामांकन होने के कारण शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उदाहरण के तौर पर, किसी विषय में जहां पहले 150 सीटें थीं, नई व्यवस्था में उसे घटाकर लगभग 130 किया जा सकता है।
लाखों सफल छात्रों पर पड़ सकता है सीधा असर
इस वर्ष झारखंड में मैट्रिक परीक्षा में चार लाख से अधिक तथा इंटरमीडिएट की तीनों संकायों में करीब पौने तीन लाख विद्यार्थी सफल हुए हैं। ऐसे में सीटों में संभावित कमी का सीधा असर छात्रों पर पड़ सकता है।
'पहले संसाधन बढ़ाएं, फिर सीटें घटाएं'
डोरंडा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. बी. एस. तिवारी का कहना है कि सीटों में कटौती से पहले शिक्षकों की नियुक्ति, भवन निर्माण और अन्य शैक्षणिक संसाधनों को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के हित प्रभावित न हों।
अंतिम फैसले का इंतजार, डीएसडब्ल्यू ने दी जानकारी
वहीं, रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश साहू ने कहा कि सीटों की अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। क्लस्टर सिस्टम लागू होने और राज्य सरकार के अंतिम निर्णय के बाद ही नामांकन प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता
फिलहाल हजारों छात्र-छात्राएं और अभिभावक एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने तथा सीटों की अंतिम संख्या घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं। क्लस्टर सिस्टम का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है, लेकिन इसके साथ ही छात्रों के सामने सीमित सीटों और बढ़ती कट-ऑफ की चुनौती भी खड़ी हो सकती है।