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Ranchi News: झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन की आपात बैठक, अनियमित आपूर्ति और कमीशन समेत कई मुद्दों पर चर्चा
Mon, 01 Jun 2026 10:14 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 10:14 PM IST
सार
बैठक में की-लॉक और वी-सैट जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं से जुड़े शुल्कों पर भी सवाल उठाए गए। डीलरों का कहना है कि इन प्रणालियों के रखरखाव का आर्थिक बोझ उन पर डाला जा रहा है, जबकि इससे जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आती हैं।
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झारखंड पेट्रोलियम एसोसिएशन डीलर्स की बैठक
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विस्तार
खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर पेट्रोलियम क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है। पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित होने से जहां आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पेट्रोल पंप संचालकों की समस्याएं भी बढ़ गई हैं। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को रांची में झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन की आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्यभर के डीलरों की विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष राजहंस मिश्रा और कोषाध्यक्ष मानस सिन्हा ने बताया कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी समस्या पेट्रोलियम उत्पादों की अनियमित आपूर्ति है। उन्होंने कहा कि सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा समेत कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर समय पर पेट्रोल-डीजल नहीं पहुंच पा रहा है, जिसके कारण कई पंपों के सूखने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे न केवल पंप संचालकों बल्कि आम लोगों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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राजहंस मिश्रा ने कहा कि डीलरों को वर्षों से कंपनी की ओर से उचित कमीशन नहीं मिल रहा है। कई बार अग्रिम भुगतान करने के बावजूद समय पर आपूर्ति नहीं की जाती, जिससे ग्राहकों का आक्रोश पंप संचालकों को झेलना पड़ता है। उन्होंने बताया कि शहरों में फिलहाल पेट्रोल-डीजल का स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के कई पंपों में ईंधन की कमी देखी जा रही है।
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बैठक में की-लॉक और वी-सैट जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं से जुड़े शुल्कों पर भी सवाल उठाए गए। डीलरों का कहना है कि इन प्रणालियों के रखरखाव का आर्थिक बोझ उन पर डाला जा रहा है, जबकि इससे जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आती हैं। इसके अलावा, पहले बिक्री बढ़ाने के लिए तेल कंपनियां क्रेडिट पर ईंधन उपलब्ध कराती थीं, लेकिन वर्तमान में अग्रिम भुगतान के बावजूद पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही है।
एसोसिएशन ने बताया कि उनकी पांच सूत्री प्रमुख मांगें हैं, जिन्हें लेकर तीनों सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के अधिकारियों से मिलने का समय मांगा गया है। डीलरों ने सरकार और प्रशासन से भी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पहल करने की मांग की है। राजहंस मिश्रा ने चेताया, पारदर्शी काम नहीं हुआ तो आंदोलन रूप रेखा तय होगा। डीलर राष्ट्र सेवा कर रहा है, भिखारी नहीं। सम्मान और व्यवहारिक नीति दो।