Jharkhand News: झामुमो की दो सीटों पर दावेदारी से बढ़ी सियासी गर्मी, क्या कांग्रेस पर दबाव की नई चाल?
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा से महागठबंधन के भीतर तनाव के संकेत मिल रहे हैं।
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झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा ने कांग्रेस सहित राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। महागठबंधन के भीतर पहले यह सहमति बनी थी कि कांग्रेस और झामुमो एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन झामुमो के अचानक बदले रुख ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
झामुमो ने बैद्यनाथ राम को बनाया उम्मीदवार
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पार्टी ने अपने केंद्रीय उपाध्यक्ष बैद्यनाथ राम को प्रत्याशी बनाया है। रांची स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में झामुमो के केंद्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी ताकत के साथ बैद्यनाथ राम की जीत सुनिश्चित करेगी। उन्होंने बताया कि बैद्यनाथ राम 8 जून को नामांकन दाखिल करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित राज्य सरकार के कई मंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे।
क्या यह दबाव बनाने की रणनीति है?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झामुमो का यह कदम गठबंधन तोड़ने की मंशा नहीं बल्कि दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। इसे ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी की राजनीतिक ताकत का एहसास कराया जा सके।
बिहार चुनाव का उदाहरण भी सामने
विश्लेषकों के अनुसार, झामुमो ने पहले भी बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। उस समय सीट बंटवारे से असंतुष्ट होकर पार्टी ने पहले 12 और बाद में 6 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन अंततः पीछे हट गई थी। इस बार भी माना जा रहा है कि अंतिम समय में स्थिति सामान्य हो सकती है और दोनों दल फिर से एक-एक सीट पर सहमति बना सकते हैं।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संकेत
कांग्रेस की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि महागठबंधन में कोई संकट नहीं है और बातचीत से समाधान निकाल लिया जाएगा। वहीं झामुमो के इस कदम ने भाजपा समेत सभी राजनीतिक दलों का ध्यान भी खींच लिया है। सीएम हेमंत सोरेन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे अटकलों को और बल मिला है।