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Jharkhand News: रांची में गर्मी का डबल अटैक; 42 डिग्री की तपिश में 18 वार्ड प्यासे, पानी को तरसे लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 03:55 PM IST
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सार
Bihar News: रांची में भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहराता जा रहा है। 18 वार्डों में पानी की किल्लत बढ़ गई है और टैंकरों की संख्या 60 से बढ़ाकर 120 कर दी गई है, फिर भी लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। गिरता भूजल स्तर और अधूरी पाइपलाइन समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।
नगर निगम के कर्मी वार्ड में टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति करते हुए
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
रांची इस समय भीषण गर्मी के साथ गंभीर जल संकट से जूझ रही है। शहर में तापमान लगातार 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे जल स्रोत तेजी से सूखते जा रहे हैं। उमस भरी गर्मी और गिरते जल स्तर के कारण कई इलाकों में पेयजल की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है।
टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता
नगर निगम द्वारा कई वार्डों में पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था लोगों की जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी साबित हो रही है। “नल से जल” योजना भी कई क्षेत्रों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। फरवरी में जहां करीब 10 वार्डों में पानी की कमी महसूस की जा रही थी, वहीं अब यह समस्या बढ़कर 18 वार्डों तक पहुंच चुकी है।
कई इलाकों में अधूरा पाइपलाइन कार्य
वार्ड संख्या 9, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 34, 35, 37, 38, 39, 49, 52, 53 और 55 जैसे क्षेत्रों में पाइपलाइन का काम अधूरा है या जलापूर्ति अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। जल संकट के चलते मार्च के अंत तक जहां लगभग 60 टैंकरों से पानी सप्लाई किया जा रहा था, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर करीब 120 कर दी गई है। इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
भूजल स्तर में तेज गिरावट से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक भूजल दोहन के कारण शहर में जल स्तर 10 से 25 मीटर तक नीचे चला गया है। इसका असर कांके रोड, हरमू, लालपुर, चुटिया, डोरंडा, अरगोड़ा और हिंदपीढ़ी जैसे प्रमुख इलाकों में सबसे ज्यादा देखा जा रहा है, जहां लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में कठिनाई हो रही है।
ये पढ़ें- रामभद्राचार्य ने शिष्य दीनानाथ को बनाया महंत, मठ को दिलाएंगे अंतरराष्ट्रीय पहचान; गांव का नाम बदलने की अपील
प्रशासन के प्रयास जारी, फिर भी चुनौती बरकरार
नगर निगम के मुताबिक शहर में प्रतिदिन करीब 311 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन बढ़ती आबादी और सीमित संसाधनों के कारण स्थिति नियंत्रण में नहीं आ पा रही है। प्रशासन ने टैंकरों की संख्या बढ़ाकर राहत देने की कोशिश की है, फिर भी जमीनी स्तर पर जल संकट लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।
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टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता
नगर निगम द्वारा कई वार्डों में पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था लोगों की जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी साबित हो रही है। “नल से जल” योजना भी कई क्षेत्रों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। फरवरी में जहां करीब 10 वार्डों में पानी की कमी महसूस की जा रही थी, वहीं अब यह समस्या बढ़कर 18 वार्डों तक पहुंच चुकी है।
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कई इलाकों में अधूरा पाइपलाइन कार्य
वार्ड संख्या 9, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 34, 35, 37, 38, 39, 49, 52, 53 और 55 जैसे क्षेत्रों में पाइपलाइन का काम अधूरा है या जलापूर्ति अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। जल संकट के चलते मार्च के अंत तक जहां लगभग 60 टैंकरों से पानी सप्लाई किया जा रहा था, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर करीब 120 कर दी गई है। इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
भूजल स्तर में तेज गिरावट से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक भूजल दोहन के कारण शहर में जल स्तर 10 से 25 मीटर तक नीचे चला गया है। इसका असर कांके रोड, हरमू, लालपुर, चुटिया, डोरंडा, अरगोड़ा और हिंदपीढ़ी जैसे प्रमुख इलाकों में सबसे ज्यादा देखा जा रहा है, जहां लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में कठिनाई हो रही है।
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प्रशासन के प्रयास जारी, फिर भी चुनौती बरकरार
नगर निगम के मुताबिक शहर में प्रतिदिन करीब 311 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन बढ़ती आबादी और सीमित संसाधनों के कारण स्थिति नियंत्रण में नहीं आ पा रही है। प्रशासन ने टैंकरों की संख्या बढ़ाकर राहत देने की कोशिश की है, फिर भी जमीनी स्तर पर जल संकट लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।

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