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Jharkhand: तेज रफ्तार बनी काल, 2025 में 527 मौतें; सबसे ज्यादा 18-30 साल के युवाओं ने गंवाई जान
Sun, 12 Jul 2026 06:26 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2026 06:26 PM IST
सार
Jharkhand: झारखंड की राजधानी रांची में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष 2025 में 1,096 सड़क हादसों में 527 लोगों की मौत हुई, जिनमें 149 युवा (18 से 30 वर्ष आयु वर्ग) शामिल थे। विशेषज्ञों के अनुसार तेज रफ्तार, स्टंट, बिना हेलमेट वाहन चलाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी हादसों के प्रमुख कारण हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Jharkhand News: झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार चिंता बढ़ा रहा है। खासकर 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवा तेज रफ्तार, स्टंट और बिना हेलमेट बाइक चलाने की वजह से सबसे अधिक हादसों का शिकार हो रहे हैं। सड़क सुरक्षा कार्यालय और रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट्स के आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों में युवाओं की संख्या सबसे अधिक है।
2025 में 527 लोगों की गई जान
राजधानी रांची में वर्ष 2025 के दौरान 1,096 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 527 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 149 युवा शामिल थे। इनमें 116 युवक और 33 युवतियां थीं। वहीं 413 लोग घायल हुए, जिनमें कई गंभीर रूप से घायल होकर स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए।
रिंग रोड और ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा हादसे
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं रांची के ग्रामीण क्षेत्रों और रिंग रोड पर दर्ज की गईं। वर्ष 2026 में भी मई तक सड़क हादसों में करीब 150 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है।
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तेज रफ्तार और स्टंट बन रहे जानलेवा
विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज रफ्तार, स्टंट करने की प्रवृत्ति, बिना हेलमेट वाहन चलाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह हैं। युवाओं में स्टाइल और रोमांच की चाह कई बार उनकी जिंदगी पर भारी पड़ रही है। राजधानी रांची में हर महीने औसतन 40 से 45 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है।
ट्रैफिक पुलिस चला रही जागरूकता अभियान
रांची ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने बताया कि पुलिस लगातार सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है। स्कूलों और कॉलेजों में युवाओं को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी जा रही है। हेलमेट वितरण, नियमित वाहन जांच और ऑनलाइन चालान की कार्रवाई भी की जा रही है। इसके बावजूद कई युवा नियमों का पालन नहीं करते और हादसों का शिकार हो जाते हैं।
यह भी पढ़ें: सुरक्षा के बाद सरकारी गाड़ी भी लौटाई, क्या इस्तीफा देने वाले हैं वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर?
अभिभावकों की भूमिका भी है अहम
राकेश सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक तभी लग सकती है, जब अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। घर से निकलते समय बच्चों को हेलमेट पहनने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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2025 में 527 लोगों की गई जान
राजधानी रांची में वर्ष 2025 के दौरान 1,096 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 527 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 149 युवा शामिल थे। इनमें 116 युवक और 33 युवतियां थीं। वहीं 413 लोग घायल हुए, जिनमें कई गंभीर रूप से घायल होकर स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए।
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रिंग रोड और ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा हादसे
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं रांची के ग्रामीण क्षेत्रों और रिंग रोड पर दर्ज की गईं। वर्ष 2026 में भी मई तक सड़क हादसों में करीब 150 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है।
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तेज रफ्तार और स्टंट बन रहे जानलेवा
विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज रफ्तार, स्टंट करने की प्रवृत्ति, बिना हेलमेट वाहन चलाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह हैं। युवाओं में स्टाइल और रोमांच की चाह कई बार उनकी जिंदगी पर भारी पड़ रही है। राजधानी रांची में हर महीने औसतन 40 से 45 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है।
ट्रैफिक पुलिस चला रही जागरूकता अभियान
रांची ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने बताया कि पुलिस लगातार सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है। स्कूलों और कॉलेजों में युवाओं को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी जा रही है। हेलमेट वितरण, नियमित वाहन जांच और ऑनलाइन चालान की कार्रवाई भी की जा रही है। इसके बावजूद कई युवा नियमों का पालन नहीं करते और हादसों का शिकार हो जाते हैं।
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अभिभावकों की भूमिका भी है अहम
राकेश सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक तभी लग सकती है, जब अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। घर से निकलते समय बच्चों को हेलमेट पहनने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।