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Jharkhand: अवैध पीजी और हॉस्टलों का मकड़जाल! बिना एग्रीमेंट ही वसूला जा रहा मनमाना किराया; बढ़ा विवाद
Tue, 07 Jul 2026 01:21 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 01:21 PM IST
सार
रांची में बिना पंजीकरण संचालित निजी पीजी और हॉस्टलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। छात्रों ने मनमाना किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट में कटौती और बिना रेंट एग्रीमेंट कमरे देने की शिकायत की है। विशेषज्ञों ने अनिवार्य पंजीकरण, डिजिटल भुगतान और रसीद व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
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रांची के बर्धमान कम्पाउंड स्थित निजी छात्रावास
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
रांची में बड़ी संख्या में निजी पीजी (पेइंग गेस्ट) और हॉस्टल बिना वैध पंजीकरण या लाइसेंस के संचालित होने के आरोप सामने आ रहे हैं। छात्रों और नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि कई हॉस्टल संचालक किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) के नाम पर मनमाना किराया वसूलते हैं। इसके अलावा सिक्योरिटी डिपॉजिट लेना, नकद भुगतान पर जोर देना और बिना लिखित रेंट एग्रीमेंट के कमरे उपलब्ध कराना जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में भविष्य में किराया, सिक्योरिटी राशि या अन्य विवाद होने पर दोनों पक्षों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बड़ी संख्या में निजी पीजी और हॉस्टल संचालित होते हैं
जानकारी के अनुसार लालपुर, मोरहाबादी, बरियातू, कांके रोड, डोरंडा और हरमू समेत शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में निजी पीजी और हॉस्टल संचालित हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक शहर में पंजीकृत पीजी और हॉस्टलों की संख्या केवल 50 से 100 के बीच बताई जाती है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने का दावा किया जा रहा है।
डिजिटल भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध
कुछ छात्रों और कामकाजी लोगों का आरोप है कि हॉस्टल छोड़ने के समय पेंटिंग, सफाई या रखरखाव (मेंटेनेंस) के नाम पर उनकी सिक्योरिटी राशि से कटौती कर ली जाती है। हालांकि, कई हॉस्टल संचालकों का कहना है कि यदि कमरे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा हो तो निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी सिक्योरिटी राशि लौटा दी जाती है। उनका यह भी दावा है कि उनके यहां डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।
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ये भी पढ़ें- झारखंड में इको टूरिज्म, खेल और कला-संस्कृति को मिलेगी नई रफ्तार; CM हेमंत सोरेन ने दिए अहम निर्देश
लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहे
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक हॉस्टल और पीजी में लिखित रेंट एग्रीमेंट होना चाहिए। साथ ही किराया और सिक्योरिटी राशि का भुगतान डिजिटल माध्यम से या रसीद के साथ किया जाना चाहिए, ताकि लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहे।
वहीं, चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव केडिया का दावा है कि शहर के अधिकांश निजी पीजी बिना समुचित दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं। उनका कहना है कि नकद लेन-देन के कारण आय का सही आकलन नहीं हो पाता। उन्होंने सभी पीजी और हॉस्टलों का अनिवार्य पंजीकरण, ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने तथा प्रत्येक भुगतान की रसीद जारी करने की व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
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बड़ी संख्या में निजी पीजी और हॉस्टल संचालित होते हैं
जानकारी के अनुसार लालपुर, मोरहाबादी, बरियातू, कांके रोड, डोरंडा और हरमू समेत शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में निजी पीजी और हॉस्टल संचालित हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक शहर में पंजीकृत पीजी और हॉस्टलों की संख्या केवल 50 से 100 के बीच बताई जाती है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने का दावा किया जा रहा है।
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डिजिटल भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध
कुछ छात्रों और कामकाजी लोगों का आरोप है कि हॉस्टल छोड़ने के समय पेंटिंग, सफाई या रखरखाव (मेंटेनेंस) के नाम पर उनकी सिक्योरिटी राशि से कटौती कर ली जाती है। हालांकि, कई हॉस्टल संचालकों का कहना है कि यदि कमरे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा हो तो निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी सिक्योरिटी राशि लौटा दी जाती है। उनका यह भी दावा है कि उनके यहां डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।
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लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहे
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक हॉस्टल और पीजी में लिखित रेंट एग्रीमेंट होना चाहिए। साथ ही किराया और सिक्योरिटी राशि का भुगतान डिजिटल माध्यम से या रसीद के साथ किया जाना चाहिए, ताकि लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहे।
वहीं, चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव केडिया का दावा है कि शहर के अधिकांश निजी पीजी बिना समुचित दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं। उनका कहना है कि नकद लेन-देन के कारण आय का सही आकलन नहीं हो पाता। उन्होंने सभी पीजी और हॉस्टलों का अनिवार्य पंजीकरण, ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने तथा प्रत्येक भुगतान की रसीद जारी करने की व्यवस्था लागू करने की मांग की है।