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UPSC: यूपीएससी ने लागू किया फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम, परीक्षा में नहीं चल पाएगी नकल; जानें कैसे करेगा काम

जॉब्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Thu, 04 Jun 2026 04:39 PM IST
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सार

UPSC face Authentication: यूपीएससी ने सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 में एक नई तकनीक शुरू की है, जिसे फेस ऑथेंटिकेशन कहा जाता है। इसका उद्देश्य परीक्षा में नकल और फर्जी उम्मीदवारों को रोकना है।

UPSC Introduces Face Authentication to Prevent Exam Cheating
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) - फोटो : LinkedIn: UPSC
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विस्तार

UPSC: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 में एक नई तकनीक लागू की है। इसका नाम चेहरा प्रमाणीकरण (Face Authentication) है। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा में नकल और फर्जी उम्मीदवारों को रोकना है। इस तकनीक से यह सुनिश्चित किया जाता है कि परीक्षा देने वाला वही व्यक्ति है जिसने आवेदन किया था।

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यूपीएससी ने बताया कि 24 मई को हुई सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 में देशभर के 2,072 परीक्षा केंद्रों पर रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इस परीक्षा के लिए कुल 8,19,732 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से लगभग 5.49 लाख उम्मीदवार यानी करीब 67 प्रतिशत लोग परीक्षा में शामिल हुए।

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चेहरा प्रमाणीकरण क्या है?

  • यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें उम्मीदवार के चेहरे की पहचान उसकी पहले से अपलोड की गई फोटो से मिलाई जाती है।
  • आवेदन के समय अपलोड की गई फोटो सिस्टम में सेव रहती है
  • परीक्षा केंद्र पर लाइव फोटो ली जाती है। दोनों फोटो का मिलान किया जाता है और मिलान सही होने पर ही परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलती है

 

UPSC में फेस ऑथेंटिकेशन का सफल उपयोग

इस प्रणाली के जरिए परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षक मोबाइल फोन से उम्मीदवारों की लाइव फोटो लेकर तुरंत पहचान की जांच कर रहे हैं। इससे असली उम्मीदवार की सही पहचान कुछ ही सेकंड में हो जाती है और नकल या फर्जीवाड़े की कोई संभावना नहीं रहती। सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 के दौरान इसे देशभर के 2,072 परीक्षा केंद्रों पर लागू किया गया। यह तकनीक UPSC ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) के सहयोग से विकसित की है।

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कुमार ने कहा कि इस सिस्टम को पूरे देश में बड़े स्तर पर लागू करना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए मौजूदा पर्यवेक्षकों का इस्तेमाल करना, उन्हें जल्दी से प्रशिक्षण देना और कम समय में पूरी व्यवस्था तैयार करना जरूरी था। UPSC, NeGD और MeitY की टीमों ने मिलकर लगभग 5.5 लाख उम्मीदवारों के लिए 2000 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों पर इस तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

तेज और बड़ी क्षमता वाला फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम

इस एप्लिकेशन की खास बात इसकी तेज गति है। इसमें किसी भी उम्मीदवार की पहचान सिर्फ 6 से 8 सेकंड में हो जाती है। इससे परीक्षा केंद्रों पर भीड़ नहीं लगी और प्रवेश आसानी से हो गया। यह सिस्टम बहुत ज्यादा लोगों को एक साथ संभाल सकता है। एक समय में 7,000 से अधिक पर्यवेक्षकों ने इसका इस्तेमाल किया और व्यस्त समय में यह हर मिनट करीब 12,000 सत्यापन कर सकता था, जिससे पूरी प्रक्रिया बिना रुकावट के चलती रही।

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