Amir Khan Marriage: आमिर खान की शादी में छिपी है आत्महत्या रोकथाम की बड़ी सीख, क्या इस पहलू पर गया आपका ध्यान?
आमिर खान की शादी सिर्फ एक सेलिब्रिटी इवेंट नहीं, बल्कि सम्मानजनक रिश्तों, परिवार के सहयोग और बेहतर मेंटल हेल्थ की अहम सीख भी देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे समाज को सीख लेने की जरूरत है कि स्वस्थ अलगाव, तनाव-डिप्रेशन और आत्महत्या से हमेशा बेहतर विकल्प होता है।
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विस्तार
फिल्म अभिनेता आमिर खान (61 वर्ष) ने रविवार (5 जुलाई 2026) को अपनी लंबे समय की पार्टनर गौरी स्प्रैट से शादी कर ली। इस समारोह में परिवार के करीबी सदस्य, आमिर की पूर्व पत्नियां और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्त भी शामिल हुए।आमिर-गौरी का रिश्ता हाल-फिलहाल की जान-पहचान का नहीं, बल्कि दशकों पुराने जुड़ाव पर आधारित है। मार्च 2025 में अपने 60वें जन्मदिन के जश्न के दौरान आमिर ने गौरी को दुनिया के सामने अपनी 'पार्टनर' के तौर पर पेश किया और फिर रविवार को शादी कर ली। यह आमिर खान की तीसरी शादी है। इससे पहले आमिर ने साल 1986 में रीना दत्ता और फिर साल 2005 में किरण राव से शादी की थी।
60 की उम्र में आमिर की तीसरी शादी को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स की भरमार है। कोई कह रहा है 'बुढ़ापे में भाई की मौज है', कोई कह रहा है- 'इनका बढ़िया है, हमसे एक नहीं झिलती ये तीन-तीन शादी कर चुका है'।
लोगों की नजर केवल गौरी-आमिर की शादी पर नहीं है, बल्कि उन तस्वीरों पर भी टिक गई है जिसमें उनकी दोनों पूर्व पत्नियां और बच्चे भी बेहद सहज अंदाज में दिखाई दे रहे हैं। न कोई असहजता, न कोई नाराजगी और न ही एक-दूसरे से दूरी बनाने की कोशिश।
आमिर ने समाज में स्वस्थ अलगाव (Healthy Divorce) की एक नई छवि पेश की है। इसे स्वीकार करना सामाजिक दृष्टि से ज्यादातर लोगों के लिए कठिन हो सकता है, पर ये उस समाज के लिए भी मिसाल है जहां लोग अपने रिश्तों में घुटते रहते हैं, मानसिक तनाव-डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, आत्महत्या तक करना आसान पाते हैं लेकिन रिश्ते से अलग होना नहीं।
तलाक का मतलब लड़ाई-दुश्मनी नहीं...
हमारे समाज में तलाक का मतलब अक्सर लड़ाई, कटुता, एक-दूसरे से हमेशा के लिए रिश्ता खत्म कर लेना और बच्चों का बीच में फंस जाना माना जाता है। ऐसे में अगर कोई परिवार अलग होने के बाद भी एक-दूसरे का सम्मान करता हुआ दिखे, तो लोगों के लिए इसे स्वीकार करना कठिन हो जाता है।
असल में, भारतीय समाज में शादी को बहुत अहम माना जाता है। यह अच्छी बात भी है। लेकिन कई बार लोग सिर्फ समाज के डर, रिश्तेदारों की बातों या बदनामी के डर से ऐसे रिश्ते में भी बने रहते हैं, जहां हर दिन झगड़े होते हैं, तनाव रहता है और खुशी बिल्कुल नहीं बचती। बाहर से सब ठीक दिखता है, लेकिन घर के अंदर रोज तकरार, चुप्पी और तनाव का माहौल रहता है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि पारिवारिक समस्याएं और वैवाहिक विवाद आत्महत्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। विशेषज्ञ भी कहते हैं, हम रिश्तों को सिर्फ निभाने के नजरिए से न देखें, बल्कि यह भी सोचें कि क्या उस रिश्ते में सम्मान, भरोसा और मानसिक शांति बची हुई है या नहीं।
अगर साथ रहकर ये सब बना रहे, तो इससे अच्छी बात कोई नहीं। लेकिन अगर हर दिन सिर्फ दुख, तनाव और अपमान ही मिले, तो समझदारी से लिया गया फैसला और सम्मानजनक अलगाव कई बार सभी के लिए बेहतर साबित हो सकता है।
ये पूरे समाज के मानसिक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में अच्छी पहल हो सकती है।
पहले आमिर खान की दोनों शादियों के बारे में जान लीजिए।
आमिर ने 1986 में रीना दत्ता से शादी की थी। 2002 में अपनी शादी खत्म करने से पहले, इनसे दो बच्चे हुए - जुनैद खान और इरा खान। कुछ साल बाद, 'लगान' पर काम करते समय उन्हें फिर से प्यार हुआ। फिल्ममेकर किरण राव इस मशहूर फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर थीं, और धीरे-धीरे उनकी दोस्ती रिश्ते में बदल गई। दोनों ने 2005 में शादी की और बाद में 2011 में सरोगेसी के ज़रिए उनके बेटे आजाद का जन्म हुआ। साल 2021 में आमिर ने किरण राव से भी अलग होने की घोषणा की। लेकिन उनके बीच अच्छे संबंध बने रहे।
अलग होने के बावजूद आमिर खान के अपनी पूर्व पत्नियों के साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं। तलाक के बाद भी आमिर, रीना और किरण दोनों के करीब रहे हैं। बेटी इरा खान की शादी के जश्न के दौरान उन्हें रीना के साथ डांस करते देखा गया था और बाद में रीना के पिता के निधन पर वे उनके साथ खड़े रहे। शादी के बाद भी किरण के साथ उनका रिश्ता मजबूत बना रहा। आजाद की परवरिश साथ मिलकर करने के अलावा, दोनों पेशेवर तौर पर भी साथ काम करते रहे हैं। आमिर ने किरण के निर्देशन में बनी फिल्म 'लापता लेडीज' को सपोर्ट किया, जिसे 2025 के एकेडमी अवार्ड्स के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया था।
आमिर खान के रिश्तों को लेकर बात करते हुए एक इंटरव्यू में डायरेक्टर फराह खान कहती हैं-
"मैं सुजैन (ऋतिक की पूर्व पत्नी) के लिए खुश हूं। मैं ऋतिक और सबा के लिए भी खुश हूं। यह जरूरी है कि लोगों को ऐसे साथी मिलें जो उन्हें खुश रखें। जब हम सब एक साथ मिलते हैं- जिसमें सबके एक्स और मौजूदा साथी शामिल होते हैं - तो समाज को यह देखकर हैरानी होती है कि हम इसे लेकर कितने सहज हैं। लेकिन यह सिर्फ सहजता की बात नहीं है, बल्कि इसका मतलब है कि मन में कोई कड़वाहट, कोई बोझ या कोई नकारात्मकता नहीं है।
जब आप जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं, तो उस व्यक्ति के लिए खुश क्यों न हों जिसे आपने पीछे छोड़ दिया है? खुश होने के लिए किसी और को दुखी देखने की क्या जरूरत है? खुशी तो तब बढ़ती है जब आप किसी और को खुश करते हैं, जब आप किसी के लिए कुछ अच्छा करते हैं। अपने बारे में अच्छा महसूस करना जरूरी है।''
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?
समाज में बढ़ती रिश्तों में कड़वाहट और ऐसे दौर में स्वस्थ अलगाव के साथ आमिर के नए रिश्ते को मनोचिकित्सक सकारात्मक पहल मानते हैं।
अमर उजाला से बातचीत में मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, लोगों को आमिर खान की तीसरी शादी से ज्यादा, वह दृश्य आश्चर्यचकित कर रहा है जिसमें उनकी दोनों पूर्व पत्नियां और बच्चे भी सहजता से शामिल दिखाई दिए। भारतीय समाज में तलाक के बाद रिश्तों को अक्सर कटुता, दूरी या टकराव के चश्मे से देखा जाता है। ऐसे में यदि कोई परिवार अलग होने के बाद भी सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण व्यवहार करता दिखाई दे, तो वह लोगों की वर्षों से बनी सामाजिक धारणाओं को चुनौती देता है।
मनोवैज्ञानिक दृष्टि से इसे स्कीमा वायलेशन कहा जा सकता है अर्थात जब कोई घटना हमारी स्थापित अपेक्षाओं के विपरीत होती है, तो वह स्वाभाविक रूप से अधिक ध्यान आकर्षित करती है। हालांकि, किसी सार्वजनिक तस्वीर या समारोह के आधार पर किसी परिवार के निजी संबंधों की गुणवत्ता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। परिपक्व लोग कई बार बच्चों के हित, आपसी सम्मान या पारिवारिक गरिमा के लिए भी सौहार्दपूर्ण व्यवहार बनाए रखते हैं।
पारिवारिक कलह-वैवाहिक विवाद आत्महत्या का प्रमुख कारण
स्वस्थ अलगाव मेंटल हेल्थ सुधार की दिशा में अच्छा कदम हो सकता है। एनसीआरबी के डेटा भी पहले से पारिवारिक कलह और आत्महत्या के खतरे को लेकर अलर्ट करते रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट बताती है, पारिवारिक तनाव और वैवाहिक विवाद जैसी परिस्थितियां कई लोगों को मानसिक रूप से इतना कमजोर कर देती हैं कि वे जीवन से हार मानने जैसा कठोर कदम उठा लेते हैं।
- एनसीआरबी की 'एक्सीडेंटल डेथ एंड सुसाइड इन इंडियाट (ADSI) 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में देशभर में आत्महत्या के 1.70 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए।
- कुल दर्ज आत्महत्याओं में से लगभग 33% मामले पारिवारिक कलह या समस्याओं के कारण होते हैं।
- इसके अलावा लगभग 5 प्रतिशत मामलों में विवाह संबंधी समस्याएं को आत्महत्या का कारण बताया गया। इसमें पति-पत्नी के झगड़े, वैवाहिक तनाव, तलाक, दहेज विवाद या अन्य वैवाहिक परेशानियां शामिल थीं।
- आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में 67.5 प्रतिशत लोग विवाहित थे।
एनसीआरबी के डेटा से ये तो पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोग वैवाहिक संबंधों में खुश न होने और बढ़ते तनाव-डिप्रेशन की वजह से आत्महत्या का राश्ता चुनते हैं पर सामाजिक तौर पर ऐसे टॉक्सिक रिश्ते से अलग होना उन्हें, आत्महत्या से ज्यादा कठिन लगता है।
यही वजह है कि भारत में तलाक की दर दुनिया के मुकाबले अब भी काफी कम है।
भारत में तलाक की दर बहुत कम
विभिन्न राष्ट्रीय सर्वेक्षणों और जनसांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, रिश्ते खराब होने के बाद भी भारत में केवल 1% से 1.5% लोग ही तलाक का रास्ता चुनते हैं।
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार, 15-49 वर्ष की विवाहित महिलाओं में लगभग 1.1% महिलाएं तलाकशुदा या अलग रह रही थीं, जो बताता है कि भारत में वैवाहिक संबंध अपेक्षाकृत अधिक स्थायी बने हुए हैं।
- मिज़ोरम में तलाकशुदा या अलग रहने वाले लोगों का अनुपात सबसे ज्यादा लगभग 3.8% दर्ज किया गया।
- वहीं बिहार में यह अनुपात सबसे कम रहा, जहां तलाक के मामले लगभग 0.05% थे।
डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, दुनियाभर में हेल्दी सेपरेशन यानी सम्मानजनक अलगाव की बात होने लगी है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि तलाक अच्छी चीज है या रिश्ते आसानी से तोड़ देने चाहिए। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि अगर हर कोशिश के बाद भी रिश्ता सिर्फ तनाव, अपमान और दुख दे रहा हो, तो बिना लड़ाई-झगड़े, बिना नफरत और बिना एक-दूसरे को नीचा दिखाए अलग होना भी एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि अलग होने के बाद भी इंसानियत और सम्मान बना रहे। अगर बच्चे हैं, तो उन्हें यह महसूस न होने दिया जाए कि उन्हें किसी एक पक्ष को चुनना है। माता-पिता पति-पत्नी भले न रहें, लेकिन अच्छे माता-पिता बने रह सकते हैं। यही परिपक्वता होती है।
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स्रोत:
National Family Health Survey
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