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New Pandemic: फिर आने वाला है कोरोना जैसी महामारी का दौर! दो नए वायरस बढ़ा रहे हैं वैज्ञानिकों की चिंता

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 30 Jan 2026 01:47 PM IST
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सार

New Pandemic Alert: वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और इंसानों-जानवरों के बीच बढ़ता संपर्क नई संक्रामक बीमारियों के जोखिम को बढ़ा रहा है। इन्फ्लूएंजा डी वायरस और कैनिन कोरोनावायरस दो नए वायरस बड़ी चिंता बनकर उभर रहे हैं।

influenza D virus and canine coronavirus Could Cause the Next Pandemic
दो नए वायरस को लेकर वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट - फोटो : Adobe Stock Photo
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विस्तार
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साल 2019 के आखिरी के महीनों में दुनियाभर में फैले कोरोनावायरस संक्रमण ने कई साल तक अपना प्रकोप दिखाया। कोरोनावायरस महामारी ने दुनिया को यह साफ तौर पर दिखा दिया कि कोई भी संक्रामक बीमारी कितनी तेजी से वैश्विक संकट का रूप ले सकती है। इस आपात स्थिति के चलते  स्वास्थ्य प्रणालियां चरमरा गईं, अर्थव्यवस्थाएं ठप हो गईं और आम जनजीवन पूरी तरह बदल गया।

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लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क जैसे शब्द हर इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए। इस महामारी ने न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर भी गहरा असर डाला। क्या ऐसी ही परिस्थितियां दोबारा से बनने वाली हैं?
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वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां भविष्य की संभावित महामारियों को लेकर लगातार चेतावनी दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और इंसानों-जानवरों के बीच बढ़ता संपर्क नई संक्रामक बीमारियों के जोखिमों को बढ़ा रहा है। एक हालिया रिपोर्ट में वैज्ञानिकों की टीम ने अलर्ट किया है कि इंसानों की सेहत के लिए दो नए वायरस बड़ा खतरा बनकर उभर सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने अलर्ट किया है कि ये दोनों वायरस सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं और इनके कारण एक और महामारी आने की भी आशंका है।

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जानवरों से इंसानों में फैलाने वाला संक्रमण - फोटो : Adobe Stock Photos

दो नए वायरस को लेकर अलर्ट

यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के वैज्ञानिकों ने पूरी दुनिया को एक नई महामारी के खतरे को लेकर सावधान किया है। विशेषज्ञों ने कहा, जानवरों से आए दो नए वायरस अभी तक लोगों की नजर में ज्यादा नहीं आए हैं, लेकिन अध्ययनों में इनकी प्रकृति को देखकर लगता है कि ये भविष्य में महामारी और पैनडेमिक का खतरा पैदा कर सकते हैं।

टीम ने कहा, इन्फ्लूएंजा डी वायरस और कैनिन कोरोनावायरस दोनों बड़ी चिंता के रूप में देखे जा रहे हैं। इनको लेकर बेहतर निगरानी, डायग्नोस्टिक्स और इलाज की खोज तेज करने की जरूरत है।

दोनों ही वायरस जानवरों के माध्यम से फैलने वाले माने जा रहे हैं। इंसानों में इसका प्रसार काफी तेजी से होने की आशंका है, जिसको लेकर पूरी दुनिया को पहले से ही सावधान हो जाने की जरूरत है ताकि कोरोनावायरस के संक्रमण जैसा दौर फिर से न आने पाए।

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दोनों वायरस इंसानों के लिए हो सकते हैं खतरनाक - फोटो : Adobe Stock Images

वैज्ञानिकों ने नई महामारी को लेकर किया सावधान

जर्नल इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज में प्रकाशित इस रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने अलर्ट किया है कि कोरोनावायरस की ही तरह से ये दोनों वायरस भी इंसानों में श्वसन समस्याओं को बढ़ाने वाली प्रवृत्ति के हो सकते हैं। 

फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड हेल्थ प्रोफेशन में एनवायरनमेंटल एंड ग्लोबल हेल्थ डिपार्टमेंट के प्रोफेसर जॉन लेडनिकी कहते हैं, हमारी समीक्षा से पता चलता है कि ये दोनों वायरस इंसानों के लिए सांस की बीमारी का खतरा पैदा करते हैं। 

  • चूंकि इन वायरस के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए इससे होने वाले संक्रमण की रोकथाम और इलाज के लिए अभी बहुत कम काम किया गया है। 
  • अगर ये वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो ये महामारी फैला सकते हैं। 
  • ज्यादातर लोगों में इनके प्रति इम्युनिटी नहीं होगी, ऐसे में ये वायरस न सिर्फ तेजी से बढ़ सकते हैं बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट भी पैदा करने वाले हो सकते हैं।

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इन्फ्लूएंजा-डी वायरस का संक्रमण - फोटो : Freepik

इन्फ्लूएंजा-डी वायरस के बारे में जान लीजिए

इन्फ्लूएंजा-डी वायरस को सुअरों और गायों में संक्रमण से जुड़ा हुआ पाया गया है। लेकिन यह कई अन्य पालतू जानवरों और जंगली जानवरों की प्रजातियों में भी देखा जा चुका है।

  • साल 2011 में पहली बार इन्फ्लूएंजा-डी वायरस की खोज की गई थी।
  • विशेषज्ञों की आशंका है कि ये बोवाइन रेस्पिरेटरी डिजीज का कारण बन सकता है, जिसके कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।
  • सुअरों और गायों के अलावा हिरण, जिराफ और कंगारू जैसे जंगली जानवरों में भी इस वायरस की पुष्टि की गई है। 
  • चीन में हाल ही में इन्फ्लूएंजा-डी वायरस के एक स्ट्रेन को इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता वाला भी पाया गया है।


फ्लोरिडा में मवेशी श्रमिकों पर पिछले अध्ययनों में पाया गया कि 97% लोगों में इन्फ्लूएंजा-डी वायरस के एंटीबॉडी थे, जिससे पता चलता है कि श्रमिकों को पहले ये संक्रमण हो चुका होगा। अब तक, ये संक्रमण सबक्लिनिकल माने जाते हैं, जिसका मतलब है कि इससे बीमारी के लक्षण पैदा नहीं हुए। हालांकि अब वैज्ञानिकों का कहना है कि इन्फ्लूएंजा-डी वायरस में तेजी से विकसित होने वाले वायरस के लक्षण हैं और ये गंभीर रोग भी पैदा कर सकता है। 

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श्वसन संक्रमण और इसका जोखिम - फोटो : Freepik.com

कैनिन कोरोनावायरस और इसका खतरा

इसी तरह कैनिन कोरोनावायरस या CCoV कुत्तों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी पैदा करने वाला माना जाता है। हालांकि यह SARS-CoV-2 वायरस जैसा नहीं है, जो COVID-19 का कारण बनता है। इंसानों में कैनिन कोरोनावायरस संक्रमण के मामले हालांकि अभी भी दुर्लभ हैं, लेकिन दक्षिण पूर्व एशिया में इसके जोखिम देखे गए हैं। 

यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की टीम ने 2017 में एक व्यक्ति में कैनिन कोरोनावायरस की आशंका जताई थी। यात्रा के बाद में उसे हल्का बुखार और बेचैनी महसूस हुई थी। टीम ने इस स्ट्रेन का नाम HuCCoV_Z19Haiti रखा था।

  • यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में ग्रेगरी ग्रे, एम.डी. के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने 2021 में एक नए कैनिन कोरोनावायरस स्ट्रेन, CCoV-HuPn-2018 की खोज की रिपोर्ट दी। 
  • इस स्ट्रेन को मलेशिया में अस्पताल में भर्ती एक बच्चे में देखा गया था। यह यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की टीम द्वारा खोजे गए कैनिन कोरोनावायरस के लगभग समान था।
  • CCoV-HuPn-2018 थाईलैंड, वियतनाम और कई अन्य हिस्सों में रहने वालों में श्वसन संबंधी बीमारी फैलाने वाला पाया गया है। हालांकि अभी भी इस वायरस के बारे में विस्तार से समझना बाकी है।




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स्रोत:
Scientists say these two viruses may become the next public health threats

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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