मेंटल हेल्थ की समस्याएं मौजूदा समय में तेजी से बढ़ती जा रही हैं। स्ट्रेस-एंग्जाइटी हो या डिप्रेशन, ये दिक्कतें पहले की तुलना में अब काफी आम हो गई हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं लंबे समय तक बनी रहने वाली ये परेशानियां शरीर के लिए कई तरह की नुकसानदायक हो सकती हैं।
Stress & Obesity: ज्यादा स्ट्रेस लेने वालों का क्यों बढ़ने लगता है वजन? जानिए इसके पीछे का पूरा साइंस
Emotional Eating Disorder: अध्ययनों में पाया गया है कि जो लोग स्ट्रेस अक्सर स्ट्रेस में रहते हैं उनमें नींद विकारों के साथ हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियों और डायबिटीज का जोखिम अधिक होता है। लगातार बनी रहने वाली स्ट्रेस की दिक्कत आपमें मोटापे का खतरा भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
स्ट्रेस और इमोशनल ईटिंग से मोटापे का खतरा
बैरिएट्रिक सर्जन और ओबेसिटी मेडिसिन फिजिशियन डॉ केविन जेंड्रेउ ने हाल ही में सोशल मीडिया पर खुद के वजन बढ़ने की समस्या के बारे में बताया। एक वीडियो में उन्होंने बताया कि स्ट्रेस, लंबे समय तक काम करने और इमोशनल ईटिंग की वजह से उनका वजन बढ़ गया था। हालांकि सिर्फ 18 महीने में उन्होंने अपना वजन 56 किलो तक कम कर लिया है।
A post shared by Kevin Gendreau, MD (@kevingendreau)
अब आपके मन में भी दो सवाल होंगे कि आखिर इमोशनल ईटिंग क्या है और स्ट्रेस में शरीर का वजन आखिर क्यों बढ़ने लग जाता है। आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
स्ट्रेस के कारण बढ़ जाता है इमोशनल ईटिंग
इमोशनल ईटिंग को स्ट्रेस ईटिंग भी कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तनाव, गुस्सा, डर, बोरियत, उदासी और अकेलेपन जैसी नेगेटिव भावनाओं को दबाने या शांत करने के लिए लोग अधिक खाने लगते हैं। जिंदगी की बड़ी घटनाएं या रोजमर्रा की परेशानियां नेगेटिव भावनाओं को ट्रिगर कर सकती हैं, जिससे इमोशनल ईटिंग होती है।
- साइकोलॉजिकल अध्ययनों के अनुसार, इमोशनल ईटिंग में दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम एक्टिव हो जाता है।
- मीठा या जंक फूड खाने से दिमाग में डोपामिन रिलीज होता है, जिससे थोड़ी देर के लिए अच्छा महसूस होता है। यही वजह है कि व्यक्ति बार-बार इस तरह की चीजें खाने लगता है।
- आमतौर पर इमोशनल ईटिंग में खाई जाने वाली ज्यादातर चीजें हाई कैलोरी वाली होती हैं, जिसके कारण तेजी से वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है।
इमोशनल ईटिंग होता क्यों है?
जब व्यक्ति लंबे समय तक मानसिक दबाव में रहता है, तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है। ये हार्मोन भूख बढ़ाता है और हाई-कैलोरी वाली चीजों की क्रेविंग भी बढ़ने लगती है।
- विशेषज्ञ कहते हैं, जो लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते या उन्हें समझ नहीं पाते, वे अधिक खाने को एक आसान तरीका मान लेते हैं।
- धीरे-धीरे दिमाग यह सीख लेता है कि किसी भी नेगेटिव भावना से निपटने का सबसे आसान तरीका खाना है।
- यही आदत आगे चलकर इमोशनल ईटिंग में बदल जाती है।
इमोशनल ईटिंग से बढ़ सकता है मोटापा
इमोशनल ईटिंग का सीधा असर वजन पर पड़ता है। इस दौरान खाई जाने वाली चीजें हाई कैलोरी वाली होती है, जिससे कैलोरी इनटेक बढ़ जाता है।
- अतिरिक्त कैलोरी शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगती है। इससे पेट और कमर के आसपास फैट बढ़ने लगता है।
- स्ट्रेस मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है, जिससे फैट बर्न कम होता है, जो और तेजी से वजन बढ़ाने लगता है।
- बार-बार ओवरईटिंग से मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है।
---------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।