{"_id":"687d52872a10b665360a993c","slug":"jowar-burger-millet-pizza-health-will-remain-good-2025-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"ज्वार का बर्गर, बाजरे का पिज्जा... जंक फूड का मिलेगा स्वाद, सेहत रहेगी दुरुस्त","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
ज्वार का बर्गर, बाजरे का पिज्जा... जंक फूड का मिलेगा स्वाद, सेहत रहेगी दुरुस्त
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: सचिन सोनी
Updated Mon, 21 Jul 2025 02:05 AM IST
विज्ञापन
सार
इन दिनों मैदा से बने जंक फूड खाने से बच्चे हो रहे हाइपरटेंशन, मोटापा और हृदय से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। वहीं, सरकार के जोर देने के बाद अब बाजार में मिलेट्स से बने उत्पाद आने लगे हैं। बीयू ने भी ज्वार का बर्गर, बाजरा का पिज्जा बनाया है।
मोटे अनाज से बना पास्ता और बर्गर
- फोटो : संवाद
विज्ञापन
विस्तार
राष्ट्रीय जंक फूड दिवस
झांसी। इन दिनों बच्चे मैदा से बने जंक फूड का जमकर सेवन कर रहे हैं। इससे वे हाइपरटेंशन, मोटापा से लेकर हृदय से जुड़ी बीमारियों तक का शिकार हो रहे हैं। वहीं, सरकार के मोटे अनाज पर जोर देने के बाद अब बाजार में मिलेट्स से बने उत्पाद आने लगे हैं। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने ही ज्वार का बर्गर, बाजरा का पिज्जा बनाया है। इनको खाने से बच्चों को न सिर्फ जंक फूड का स्वाद मिलेगा, बल्कि सेहत भी दुरुस्त रहेगी।
नूडल्स, पिज्जा, बर्गर से लेकर पास्ता तक अब बच्चों की पहली पसंद बन चुका है। पौष्टिक भोजन का सेवन करने के बजाय बच्चों के स्कूल टिफिन तक में नूडल्स, पास्ता देखने को मिल जाता है। बच्चे खुद परिजन पर जोर देकर लंच में इन्हें बनाकर टिफिन में रखने पर जोर देते हैं। मगर यह बच्चों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि एक बर्गर में दिनभर खाने के बराबर कैलोरी होती है। ऐसे में ज्यादा जंक फूड खाने से बच्चे के शरीर में उच्च कैलोरी, ज्यादा वसा शरीर में पहुंचता है। इससे वह मोटापा से लेकर फैटी लिवर तक का शिकार हो जाते हैं। नमक से लेकर तेल तक बहुतायत मात्रा में होने से हाइपरटेंशन और हृदय से जुड़ी बीमारियां बच्चों को घेर लेती हैं। इसके अलावा कार्बोनेटेड ड्रिंक और प्रिजरवेटिव फ्रूट जूस आदि में काफी शुगर होती है। दो साल से कम उम्र के बच्चों को तो इसका सेवन कराना ही नहीं चाहिए। लंबे समय तक इन्हें पीने से बच्चा मधुमेह का भी शिकार हो सकता है।
वहीं, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग ने बढ़ती मांग को देखते हुए मोटे अनाज से बने जंक फूड और बेकरी के कई उत्पाद बनाए हैं। विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर और बीयू मिलेट्स कमेटी की समन्वयक डॉ. नूपुर गौतम ने बताया कि ज्वार, कोदो, रागी का पास्ता बनाया है। इसके अलावा कोदो, सावा, ज्वार को मिलकर नूडल्स बनाए हैं। वहीं, ज्वार का बर्गर, बाजरा का पिज्जा, रागी की चॉकलेट, चेना से ब्रेड, सांवा का केक भी तैयार किया है। बीयू के मिलेट्स प्वॉइंट के जरिये समय-समय पर इनकी बिक्री भी करते हैं। ये खाने में बहुत स्वादिष्ट होते हैं। साथ ही विटामिन, मिनरल्स आदि भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इनके सेवन से बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता। उसे जंक फूड का स्वाद भी मिलता है और सेहत भी दुरुस्त रहती है।
महिलाओं को भी दिया प्रशिक्षण, एनजीओ भी आगे आया
डॉ. नूपुर ने बताया कि विभाग की ओर से कई महिलाओं को भी मोटे अनाज से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। एक एनजीओ भी आगे आया है, जिन्होंने ग्रामीण महिलाओं को मशीनें उपलब्ध कराने की बात कही है। आने वाले समय में इसके बने उत्पाद झांसी में कई जगहों पर उपलब्ध हो सकेंगे।
Trending Videos
झांसी। इन दिनों बच्चे मैदा से बने जंक फूड का जमकर सेवन कर रहे हैं। इससे वे हाइपरटेंशन, मोटापा से लेकर हृदय से जुड़ी बीमारियों तक का शिकार हो रहे हैं। वहीं, सरकार के मोटे अनाज पर जोर देने के बाद अब बाजार में मिलेट्स से बने उत्पाद आने लगे हैं। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने ही ज्वार का बर्गर, बाजरा का पिज्जा बनाया है। इनको खाने से बच्चों को न सिर्फ जंक फूड का स्वाद मिलेगा, बल्कि सेहत भी दुरुस्त रहेगी।
नूडल्स, पिज्जा, बर्गर से लेकर पास्ता तक अब बच्चों की पहली पसंद बन चुका है। पौष्टिक भोजन का सेवन करने के बजाय बच्चों के स्कूल टिफिन तक में नूडल्स, पास्ता देखने को मिल जाता है। बच्चे खुद परिजन पर जोर देकर लंच में इन्हें बनाकर टिफिन में रखने पर जोर देते हैं। मगर यह बच्चों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि एक बर्गर में दिनभर खाने के बराबर कैलोरी होती है। ऐसे में ज्यादा जंक फूड खाने से बच्चे के शरीर में उच्च कैलोरी, ज्यादा वसा शरीर में पहुंचता है। इससे वह मोटापा से लेकर फैटी लिवर तक का शिकार हो जाते हैं। नमक से लेकर तेल तक बहुतायत मात्रा में होने से हाइपरटेंशन और हृदय से जुड़ी बीमारियां बच्चों को घेर लेती हैं। इसके अलावा कार्बोनेटेड ड्रिंक और प्रिजरवेटिव फ्रूट जूस आदि में काफी शुगर होती है। दो साल से कम उम्र के बच्चों को तो इसका सेवन कराना ही नहीं चाहिए। लंबे समय तक इन्हें पीने से बच्चा मधुमेह का भी शिकार हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग ने बढ़ती मांग को देखते हुए मोटे अनाज से बने जंक फूड और बेकरी के कई उत्पाद बनाए हैं। विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर और बीयू मिलेट्स कमेटी की समन्वयक डॉ. नूपुर गौतम ने बताया कि ज्वार, कोदो, रागी का पास्ता बनाया है। इसके अलावा कोदो, सावा, ज्वार को मिलकर नूडल्स बनाए हैं। वहीं, ज्वार का बर्गर, बाजरा का पिज्जा, रागी की चॉकलेट, चेना से ब्रेड, सांवा का केक भी तैयार किया है। बीयू के मिलेट्स प्वॉइंट के जरिये समय-समय पर इनकी बिक्री भी करते हैं। ये खाने में बहुत स्वादिष्ट होते हैं। साथ ही विटामिन, मिनरल्स आदि भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इनके सेवन से बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता। उसे जंक फूड का स्वाद भी मिलता है और सेहत भी दुरुस्त रहती है।
महिलाओं को भी दिया प्रशिक्षण, एनजीओ भी आगे आया
डॉ. नूपुर ने बताया कि विभाग की ओर से कई महिलाओं को भी मोटे अनाज से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। एक एनजीओ भी आगे आया है, जिन्होंने ग्रामीण महिलाओं को मशीनें उपलब्ध कराने की बात कही है। आने वाले समय में इसके बने उत्पाद झांसी में कई जगहों पर उपलब्ध हो सकेंगे।