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HIV: देश के इस राज्य में एचआईवी के सबसे ज्यादा मरीज, जानिए संक्रमण के खिलाफ जंग के दो बड़े अपडेट

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 26 Feb 2026 01:52 PM IST
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सार

India Me Sabse Jyada HIV Case Kaha Hai: भारत के कुछ राज्यों में एचआईवी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। मेघालय में देश के सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले हैं। यहां अभी 10 हजार से ज्यादा लोगों का इलाज चल रहा है। संक्रमण की रोकथाम और इलाज के लिए वैज्ञानिक लगातार नई उपचार विधियों की खोज कर रहे हैं। इस संबंध में दो बड़े अपडेट सामने आए हैं।  

Meghalaya has the highest HIV caseload in India new hiv medicine ARTISTRY and injection Lenacapavir
भारत में एचआईवी संक्रमण का खतरा - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

एचआईवी-एड्स के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा रहे हैं। ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। इसका समय रहते इलाज न हो पाए तो ये एड्स (अक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम) रोग का कारण बन सकता है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में अनुमानित 39.9 मिलियन (करीब 4 करोड़) लोग एचआईवी संक्रमण के साथ जी रहे थे, जिनमें से 53% महिलाएं और लड़कियां थीं। इसके अलावा लगभग 8 लाख लोगों की मौत हुईं। सब-सहारा अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका बना हुआ है, जहां दुनिया भर के ज्यादातर मामले हैं।
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भारत भी इस बीमारी का बड़ा बोझ झेल रहा है। तमाम प्रकार के जागरूकता अभियानों के बावजूद यहां संक्रमण के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मेघालय देश का सबसे ज्यादा एचआईवी प्रभावित राज्य बना हुआ है। यहां 10 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री डब्ल्यू शिला ने बुधवार को विधानसभा में बताया कि राज्य में एचआईवी के बढ़ते मामले लगातार चिंता बढ़ाते जा रहे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए पहले ही 25 करोड़ रुपये के पांच साल के इंटरवेंशन प्लान को मंजूरी दी गई है।

मेघालय में बढ़ती चिंताओं के बीच एचआईवी की रोकथाम और इलाज के लेकर दो बड़े अपडेट सामने आए हैं, जिसे जानना आपके लिए भी जरूरी है।

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मेघालय में एचआईवी का खतरा - फोटो : Adobe Stock

मेघालय में बढ़ती चिंता

एचआईवी की रोकथाम से संबंधित जानकारियों के बारे में जानने से पहले मेघालय की स्थिति पर एक नजर डाल लेते हैं।
 

  • स्वास्थ्य मंत्री डब्ल्यू शिला ने बताया कि अभी राज्य में एचआईवी से पीड़ित 10,293 लोग एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी ले रहे हैं।
  • मंत्री ने कहा कि पिछले दस वर्षों में इस बीमारी से 749 मौतें हुईं। 
  • स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, एचआईवी और एड्स रोकथाम और नियंत्रण एक्ट के तहत गोपनीयता के नियम और सामाजिक कलंक बड़ी चुनौतियां हैं।
  • एचआईवी स्टेटस को गोपनीय रखना होगा, बिना सहमति के टेस्ट नहीं किए जा सकते और हम लोगों को दवाएं लेने के लिए मजबूर भी नहीं कर सकते। 
  • सबसे बढ़कर, कलंक की भावना एक बड़ी भूमिका निभा रहा है जिसके कारण लोग टेस्टिंग के लिए आगे आने से डर रहे हैं।"


स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, सभी लोगों को ये जानना होगा कि एचआवी लाइलाज नहीं है, ये मौत की सजा जैसी नहीं है। इसे पूरी तरह से ठीक तो नहीं किया जा सकता है हालांकि इलाज के जरिए लोगों की क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर की जा सकती है।

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एचआईवी रोगियों के लिए असरदार दवा - फोटो : Adobe Stock Photos

एचआईवी के लिए सिंगल डोज दवा

दुनियाभर में बढ़ते एचआईवी के जोखिमों और चुनौतियों के बीच रोगियों के लिए अच्छी खबर है। विशेषज्ञों की टीम ने एक कारगर और रोजाना ली जाने वाली दवा के बारे में जानकारी दी है जो इसके इलाज में काफी मददगार हो सकती है। 
 

  • इस टैबलेट में एचआईवी के इलाज की दो मौजूदा दवाएं, बिक्टेग्राविर और लेनाकापाविर (BIC/LEN) दोनों शामिल हैं।
  • इस दवा के फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल के बेहतर नतीजे देखे गए हैं। 


द लैंसेंट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस ट्रायल में, जिसमें 15 देशों के 550 से ज्यादा एचआईवी संक्रमितों को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया है कि नया सिंगल-पिल एचआईवी वायरस को दबाने में बहुत असरदार था। जिन लोगों ने यह आसान तरीका अपनाया, उनमें से लगभग 96% लोगों में वायरल लोड कम पाया गया।



परीक्षण में देखे गए बेहतर परिणाम

इस नई दवा के ट्रायल में शामिल ज्यादातर लोग इलाज के तौर पर हर दिन दो से 11 गोलियां ले रहे थे। लगभग 40% लोगों को दिन में एक से ज्यादा बार इस तरह का एंटीरेट्रोवायरल उपचार लेना पड़  रहा था। कई लोगों को एचआईवी के साथ दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कार्डियोवैस्कुलर रोग या किडनी की बीमारी थी, जिसके कारण उन्हें रोजाना कई सारी दवाएं लेना पड़ रहा था।

अध्ययन में पाया गया है कि ये दवा, सिर्फ एक टैबलेट लेनी होती है जिससे न सिर्फ रोगियों को कई सारी दवाएं लेने को मजबूर होना पड़ता है साथ ही इसके कोई महत्वपूर्ण साइड-इफेक्ट्स भी नोटिस नहीं किए गए हैं। 
 
  • अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों ने बताया कि ये नई दवा लेना ज्यादा आसान और सुविधाजनक था। 
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि यह एचआईवी के साथ जी रहे बुजुर्गों, एचआवी ट्रीटमेंट के लिए पहले से रेजिस्टेंस डेवलप हो चुके लोगों, या जो एचआईवी दवा के साथ-साथ उम्र से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम को मैनेज करने के लिए अतिरिक्त दवाएं ले रहे हैं, उनके लिए यह खास तौर पर फायदेमंद हो सकता है।

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एचआईवी इंजेक्शन- लेनाकापेविर के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com

लेनाकापेविर इंजेक्शन को लेकर जानकारी

एचआईवी की इस नई दवा के अलावा दूसरा बड़ा अपडेट जिम्बाब्वे से सामने आ रहा है। जिम्बाब्वे पहला ऐसा देश बन गया है जिसने एचआईवी के इलाज के लिए प्रभावी इंजेक्शन लेनाकापेविर दवा देना शुरू कर दिया है। 

  • लेनाकापेविर एचआईवी के लिए साल में दो बार लगने वाली पहली इंजेक्टेबल प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) है।
  • ये रोजाना इलाज के लिए ली जाने वाली गोलियों का बहुत असरदार, लंबे समय तक असर करने वाला विकल्प है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि साल में सिर्फ दो डोज काफी असरदार हो सकती है। इसकी प्रभावशीलता दर लगभग 99%  देखी गई है।  


लेनाकापेविर इंजेक्शन के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।



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स्रोत
New daily tablet simplifies long-term HIV care


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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