फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Health & Fitness ›   New research says the world is heading for an insulin shortage

Year Ender 2018: दुनिया भर में क्यों कम पड़ रहे इंसुलिन, क्या करेंगे डायबिटीज पीड़ित

Mon, 31 Dec 2018 04:23 PM IST
मंजू ममगाईं लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला Published by: मंजू ममगाईं Updated Mon, 31 Dec 2018 04:23 PM IST
विज्ञापन
New research says the world is heading for an insulin shortage

डायबिटीज को शहरों की खराब जीवनशैली की उपज माना जाता है।टाइप-2 डायबिटीज के मामले में पीड़ित के खून में मौजूद सुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन पैदा नहीं हो पाता है।वैज्ञानिकों का मानना है कि टाइप-2 डायबिटीज के शिकार लाखों लोगों के लिए अगले एक दशक या उससे भी ज़्यादा समय के लिए इंसुलिन हासिल करना मुश्किल हो सकता है। दुनिया भर में इस समय 20 साल से 79 साल की उम्र वाले लगभग 40 करोड़ लोग टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हैं।इनमें से आधे से ज़्यादा लोग चीन, भारत और अमरीका में रहते हैं।

विज्ञापन

साल 2030 तक टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों का आंकड़ा 50 करोड़ तक पहुंचने की आशंका है। इसके अलावा टाइप-1 डायबिटीज भी होता है।इसमें पीड़ित का शरीर इंसुलिन पैदा करने वाली पेनक्रेटिक सेल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है।

विज्ञापन

New research says the world is heading for an insulin shortage

दुनिया में इंसुलिन का अभाव

लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलोजी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, साल 2030 तक टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लगभग 8 करोड़ लोगों को इंसुलिन की जरूरत होगी।2030 तक इस दवा की मांग में 20 फीसद की बढ़ने की संभावना है।लेकिन इनमें से लगभग आधे से ज़्यादा लोग (संभवत: एशिया और अफ़्रीका में) इस दवा को हासिल नहीं कर पाएंगे।इस समय लगभग 3.3 करोड़ लोगों को इंसुलिन की दरकार है और वे इस दवा को हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

इंसुलिन के अभाव का मतलब

इंसुलिन की उपलब्धता पर अध्ययन करने वाली टीम के प्रमुख डॉ. संजय बासु इस दवा की उपलब्धता, मांग और पूर्ति के समीकरण को समझाते हुए कहते हैं, "मधुमेह पीड़ितों की इस दवा तक पहुंच का मतलब ये है कि इंसुलिन लोगों के लिए उपलब्ध हो और लोग इसे खरीदने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम भी हों।"कीमत के साथ-साथ एक सप्लाई चेन भी होनी चाहिए ताकि फ्रिज में रखी जाने वाली इस दवा और इसके साथ दी जाने वाली सुइयों को सुरक्षित ढंग से वितरित किया जा सके।"

New research says the world is heading for an insulin shortage
diabetes

इंसुलिन इतनी महंगी क्यों?

इंसुलिन 97 साल पुरानी दवा है, जिसे 20वीं सदी में 'चमत्कारी दवा' कहा गया था।ऐसे में इतने सालों बाद भी ये दवा इतनी महंगी क्यों है? ये एक बड़ा सवाल है।वैज्ञानिकों के मुताबिक, 1554 अरब रुपए के वैश्विक इंसुलिन बाजार का 99 फीसद हिस्सा तीन मल्टीनेशनल कंपनियों- नोवो नोरडिस्क, इलि लिली एंड कंपनी और सनोफी के पास है।इसके साथ ही बाजार के आकार के लिहाज से इन कंपनियों के पास 96 फीसदी हिस्सेदारी है।यही तीन कंपनियां पूरे अमरीका को इंसुलिन की आपूर्ति करवाती हैं।

वैश्विक नियंत्रण

दुनिया भर के 132 देशों में से 91 से ज़्यादा देश इंसुलिन पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाते हैं।लेकिन इसके बावजूद ये दवा लोगों के लिए काफी महंगी है क्योंकि करों के साथ-साथ सप्लाई चेन पर होने वाले खर्च की वजह से ये दवा लोगों की पहुंच से बाहर हो जाती है।अमरीका में लगभग दो करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं।साल 2000 से 2010 के बीच डायबिटीज पीड़ितों का इंसुलिन पर होने वाला खर्च 89 फीसद तक बढ़ गया।इंश्योरेंस की परिधि में रहने वाले वयस्क लोगों पर भी ये बात लागू होती है। 

विज्ञापन

New research says the world is heading for an insulin shortage
insulin

प्रति शीशी इंसुलिन की कीमत लगभग 2960 रुपए से बढ़कर लगभग 9620 रुपए हो चुकी है।एक शीशी बस कुछ दिनों तक ही चलती है।इस दवा की उपलब्धता को लेकर भी कई सवाल उठते हैं।जेनेवा यूनिवर्सिटी अस्पताल और जेनेवा यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. डेविड हेनरी बेरन के मुताबिक, "देशों के पास आपूर्तिकर्ताओं के रूप में काफी कम विकल्प हैं। ऐसे में लोगों को इंसुलिन का टाइप बदलने पर विवश होना पड़ता है क्योंकि कंपनियों ने कुछ फॉर्म्युलेशंस को उपलब्ध कराना बंद कर दिया है।"इस समय दुनिया में पांच तरह की इंसुलिन वाली दवाएं मौजूद है। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को वह दवा लिखते हैं जो कि उनकी जीवनशैली, उम्र, ब्लड सुगर गोल और रोज लेने वाले इंजेक्शंस की संख्या के लिहाज से सबसे ज़्यादा फायदा पहुंचाए।लेकिन अगर दवा की उपलब्धता की बात करें तो इंसुलिन की आपूर्ति उन देशों के लिए एक समस्या हैं, जहां औसत आय कम या मध्यम स्तर की है।

इंसुलिन की उपलब्धता पर हुए अध्ययन में सामने आया है कि बांग्लादेश, ब्राजील, मालावी, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में इंसुलिन की उपलब्धता कम पाई गई।इसके साथ ही खराब प्रबंधन और अप्रभावी वितरण की वजह से आपूर्ति में समस्या पैदा हो सकती है।उदाहरण के लिए मोजाम्बिक में इंसुलिन की 77 फीसद आपूर्ति यहां की राजधानी में ही संभव है।इसकी वजह से पूरे देश में इंसुलिन की कमी देखी जाती है।डॉ. बेरन कहते हैं, "दुनिया भर में इंसुलिन की उपलब्धता न होना और खरीदने की क्षमता से बाहर होना जिंदगी के लिए खतरा है और ये स्वास्थ्य के अधिकार को चुनौती देता है।"

New research says the world is heading for an insulin shortage

इंसुलिन की जेनरिक दवा

ऐसे में सवाल ये है कि लगभग सौ साल पहले खोज की गई दवा अभी भी लोगों के लिए जेनरिक दवा के रूप में उपलब्ध क्यों नहीं है।इंसुलिन का अविष्कार करने वाले वैज्ञानिकों ने अपनी दवा का पेटेंट टोरंटो यूनिवर्सिटी को एक डॉलर में बेच दिया था।किसी भी दवा के पेटेंट की अवधि खत्म होने के बाद वह आम तौर पर काफी सस्ती हो जाती है।इसके लिए जेनरिक दवाएं बनाने वाली कंपनियों को शुक्रिया कहा जाना चाहिए लेकिन इस दवा के मामले में ऐसा नहीं हुआ।

वैज्ञानिक जेरेमी ए ग्रीन और केविन रिग्स कहते हैं कि इसकी एक वजह ये हो सकती है कि इंसुलिन लिविंग सेल्स से बनती है और इसका फॉर्म्युला कॉपी करने के लिहाज से ज़्यादा जटिल है।इसके साथ ही जेनरिक दवाएं बनाने वाली कंपनियों ने अब तक इस दवा को इस लायक नहीं समझा है कि इसकी जेनरिक दवा बनाने की कोशिश की जाए।

जैविक स्तर पर मिलती जुलती इंसुलिन भी बाजार में उपलब्ध हैं और अपेक्षाकृत सस्ते दामों में उपलब्ध हैं। लेकिन वे जेनरिक दवाओं जितनी सस्ती नहीं हैं।वैज्ञानिक कहते हैं कि इंसुलिन यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज पैकेज में शामिल की जानी चाहिए।इसके साथ ही डायबिटीज के वितरण और रखरखाव में अन्वेषण के लिए धन खर्च किए जाने की जरूरत है। इससे साफ पता चलता है कि कमजोर मेडिकल सिस्टम, इंसुलिन की खर्चीली वितरण प्रणाली और कीमत जैसे कारक मिलकर इंसुलिन की लोगों तक पहुंच पर प्रभाव डालते हैं।डॉ. बासु कहते हैं, "कीमत और वितरण प्रक्रिया को लेकर काम की जरूरत है। जब तक इन मुद्दों पर काम नहीं होता तब तक इंसुलिन की कमी से लोग उबरने वाले नहीं हैं।"

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed