Cancer Alert: एनीमिया-थकान को इग्नोर करती रही महिला, रिपोर्ट में जो सामने आया उससे डॉक्टर भी रह गए हैरान
दुनियाभर में 50 साल से कम उम्र के लोगों में बड़ी आंत के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में आयरन की कमी को जरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
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थकान-कमजोरी होना इस तेजी से भागती और न रुकने वाली दुनिया में काफी आम है। खासतौर पर महिलाओं में ये समस्याएं ज्यादा देखी जाती है। आमतौर पर महिलाएं मान लेती हैं कि दिनभर की भागदौड़, ऑफिस के तनाव और बच्चों की देखभाल की वजह से शरीर टूटता रहता है। लेकिन क्या हर थकान सिर्फ मेहनत की वजह से होती है? कई बार शरीर की यही मामूली लगने वाली शिकायत किसी गंभीर बीमारी का पहला और सबसे अहम संकेत भी हो सकती है।
38 वर्षीय लॉरा जैक्सन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्हें लगातार थकान रहती थी, लेकिन उन्होंने कभी इसे बीमारी नहीं माना। उन्हें लगता था कि बच्चों की देखभाल करने वाली किसी भी मां के साथ ऐसा होना सामान्य है। अगर वह उस दिन ब्लड डोनेट करने नहीं जातीं, तो शायद उन्हें अपनी बीमारी का पता भी नहीं चलता।
वहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर में आयरन की मात्रा बहुत कम है। हालांकि बाद में एहतियात के तौर पर एक साधारण स्टूल टेस्ट की रिपोर्ट में जो बात सामने आई उसने लॉरा के पैरों तले जमीन खिसका दी।
जांच में पता चला कि उन्हें स्टेज-3 बाउल कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन्हें न पेट में तेज दर्द था, न मल से खून आता था और न ही कोई अन्य समस्या थी। उन्हें सिर्फ लगातार थकान बनी रहती थी। यही थकान उनमें कैंसर का लक्षण हो सकता है, शायद लॉरा ने कभी सोचा भी नहीं था।
ब्रिटेन की स्थानीय मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में लॉरा के मामले का जिक्र मिलता है।
दुनियाभर में 50 साल से कम उम्र के लोगों में बड़ी आंत के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में आयरन की कमी को सिर्फ भारी पीरियड्स का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। अच्छी बात यह है कि समय रहते सही जांच हो जाए तो जान बचाई जा सकती है।
आयरन की कमी निकला खतरनाक
लॉरा जैक्सन को अक्सर बहुत ज्यादा थकान महसूस होती रहती थी। दो बच्चों की वजह से उन्हें अक्सर रात में ठीक से नींद नहीं मिल पाती थी, इसलिए उन्हें लगा कि शायद इसी वजह से उन्हें थकान बनी रहती है।
लॉरा का ब्लड ग्रुप-ए नेगेटिव है, जो काफी दुर्लभ माना जाता है। इसलिए वह नियमित रूप से रक्तदान करती थीं। इस बार जब वह रक्तदान करने पहुंचीं, तो जांच के बाद नर्स ने उन्हें रक्तदान करने से मना कर दिया। उन्हें बताया गया कि आपको आयरन की कमी है जिस वजह से रक्तदान नहीं कर सकती हैं।
वैसे तो महिलाओं में आयरन की कमी होना काफी आम है, पीरियड्स के कारण ये समस्या काफी कॉमन भी मानी जाती है। हालांकि लॉरा के मामले में ये लक्षण कॉमन नहीं था।
एफआईटी टेस्ट से पता चला बाउल कैंसर
ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट लेकर जब लॉरा अपने फैमिली डॉक्टर के पास पहुंचीं, तो डॉक्टर ने उन्हें फीकल इम्यूनोकेमिकल टेस्ट (एफआईटी) टेस्ट कराने की सलाह दी।
- एफआईटी एक प्रकार के मल की जांच) है, इससे पता चलता है किकहीं मल में खून तो नहीं है। यह खून आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन जांच में पकड़ में आ जाता है। कई बार यह बड़ी आंत के कैंसर का शुरुआती संकेत होता है।
- जब लॉरा की रिपोर्ट आई तो डॉक्टर हैरान रह गए। रिपोर्ट में मल में खून की मात्रा सामान्य से बहुत ज्यादा थी।
- डॉक्टर ने उन्हें अब कुछ और जांच कराने की सलाह दी जिसमें लॉरा को स्टेज-3 बाउल कैंसर का पता चला। बड़ी आंत का कैंसर अपनी शुरुआती जगह से आसपास के हिस्सों तक फैलना शुरू हो चुका था।
लॉरा कहती हैं, इस रिपोर्ट के बाद सबसे पहला यही ख्याल आया-
क्या मैं मर जाऊंगी? मेरे दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। मुझे उनके लिए जिंदा रहना है। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की थी कि मुझे कोई कैंसर का कोई लक्षण कभी महसूस ही नहीं हुआ था। बस पूरे समय मुझे सिर्फ थकान महसूस होती थी। मैं एक कामकाजी मां थी। मैंने हर बार अपनी थकान को नजरअंदाज कर दिया। मैंने कभी नहीं सोचा कि यह कैंसर या कोई गंभीर बीमारी हो सकती है।
एनीमिया और कैंसर का लिंक
विशेषज्ञों का कहना है कि आज भी बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं है कि शरीर में आयरन की कमी भी बड़ी आंत के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती है।
अध्ययनों के अनुसार, आयरन की सही स्थिति जानने के लिए सिर्फ सामान्य ब्लड टेस्ट नहीं, बल्कि फेरिटिन टेस्ट ज्यादा सटीक माना जाता है। यह ब्लड टेस्ट शरीर में जमा आयरन की मात्रा मापता है। कई बार सामान्य आयरन रिपोर्ट ठीक दिखाई देती है, लेकिन शरीर के अंदर आयरन का स्टोर कम हो चुका होता है। यह जांच उसी स्थिति का पता लगाती है।
ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने कैंसर वाला ट्यूमर और बड़ी आंत का एक हिस्सा निकाल दिया। उन्हें 12 सप्ताह तक कीमोथेरेपी भी करानी पड़ी। आज लॉरा पूरी तरह कैंसर मुक्त हैं।
बाउल कैंसर का बढ़ता खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक बाउल कैंसर दुनिया का तीसरा सबसे आम कैंसर है और कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। साल 2022 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर में इस कैंसर के लगभग 19 लाख नए मामलों और 9 लाख से ज्यादा मौतों की जानकारी दी।
बाउल कैंसर को कोलोरेक्टल कैंसर भी कहा जाता है। ये कोलन या रेक्टम में शुरू होता है। इसमें मल त्यागने की आदतों में लगातार बदलाव जैसे ढीला मल या कब्ज, मल में खून आना, बिना किसी कारण वजन कम होना और आयरन की कमी बहुत सामान्य है। पिछले कुछ दशकों में 30 से कम उम्र के लोगों में भी बाउल कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि रिपोर्ट की गई है।
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स्रोत:
More young adults developing type 2 diabetes and at more severe levels of obesity
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