Vande Mataram Lyrics: क्या हैं राष्ट्रीय गीत के बोल? 150 साल पुराने वंदे मातरम् का इतिहास जानकर होगा गर्व
150 Years Of Vande Mataram : स्वतंत्र भारत में वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता मिली। वहीं ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रीय गान है। वर्ष 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी थी।
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Vande Mataram Lyrics And History in hindi: 15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। आजादी के आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। सरकार ने 2025 से 2026 तक 150 Years of Vande Mataram (वंदे मातरम् के 150 वर्ष) के उपलक्ष्य में देशभर में सालभर चलने वाले कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इस अवसर पर पहली बार 15 अगस्त पर लाल किले से वंदे मातरम का ऐतिहासिक और आधिकारिक गायन भी किया जाएगा।
अगर आप भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वंदे मातरम गाकर देशप्रेम की लौ को जलाना चाहते हैं तो यहां इस राष्ट्रीय गीत के बोल दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही वंदे मातरम के इतिहास के बारे में भी जान लीजिए, ताकि 150वीं वर्षगांठ पर वंदे मातरम पर गर्व महसूस कर सकें।
वंदे मातरम के 150 वर्ष?
- वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के लिए केंद्र सरकार ने वर्षभर चलने वाले राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों की शुरुआत नवंबर 2025 में की थी।
- यह स्मरणोत्सव 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक चलने के लिए निर्धारित किया गया है।
- सरकारी कार्यक्रमों में सामूहिक गायन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संगीत कार्यक्रम और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया गया है।
- 2026 में भी देश के अलग-अलग हिस्सों में ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े कार्यक्रम आयोजित हुए हैं।
वंदे मातरम किसने लिखा था?
- वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय थे।
- सरकारी सामग्री के अनुसार इसकी रचना 7 नवंबर 1875 को हुई थी।
- बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’, जो 1882 में प्रकाशित हुआ, में शामिल किया गया।
- 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया था।
- जिसके बाद यह स्वतंत्रता आंदोलन की राष्ट्रीय चेतना से और गहराई से जुड़ गया।
वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा कब मिला?
- स्वतंत्र भारत में वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता मिली।
- वहीं ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रीय गान है।
- वर्ष 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी थी।
- 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा इसे देश के राष्ट्रीय गीत का आधिकारिक दर्जा मिला।
वंदे मातरम के नियम
- वंदे मातरम में कुल 6 छंद हैं।
- पूर्व नियम के अनुसार लंबे समय तक केवल शुरुरआती दो छंद ही गाए जाते थे।
- 150वीं वर्षगांठ पूरे होने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश में, सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके सभी 6 छंद गाना अनिवार्य कर दिया गया है।
- पूरे 6 छंदों के गायन की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है।
- इसके गायक और वादन के दौरान भी राष्ट्रगान की तरह ही सावधान की मुद्रा मे सीधे खड़े होना अनिवार्य है।
वंदे मातरम के लिरिक्स
वंदे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्।
वंदे मातरम्॥
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वंदे मातरम्॥
कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
के बॉले मां तुमि अबले,
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीं मातरम्।
वन्दे मातरम्।।
तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वम् हि प्राणाः शरीरे,
बाहुते तुमि मां शक्ति,
हृदये तुमि मां भक्ति,
तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे।
वन्दे मातरम् ।।
त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्,
नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वन्दे मातरम्।।
श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम्,
धरणीम् भरणीम् मातरम्।
वन्दे मातरम्।।
ये शुरुआती पंक्तियां ‘वंदे मातरम्’ के सबसे व्यापक रूप से गाए जाने वाले हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं। सरकारी प्रकाशनों में भी राष्ट्रीय गीत के बोलों का यही शुरुआती अंश दिया गया है।