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कोरोना और लॉकडाउन: कहीं तलाक तो कहीं शादी, यूं बदल गई रिश्तों की दुनिया
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश जोशी
Updated Wed, 17 Jun 2020 12:01 PM IST
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लॅाकडाउन में रिश्तों की डोर खिंच गई- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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कितने अजीब रिश्ते हैं यहां के...
दो पल मिलते हैं,साथ-साथ चलते हैं
जब मोड़ आए तो बच के निकलते हैं...
कोविड-19 की महामारी के बाद की दुनिया को बॉलीवुड फिल्म 'पेज थ्री' का ये गाना बिल्कुल सटीक बयां करता है। एक वायरस ने दुनिया में रिश्तों को पूरी तरह से बदल डाला है। लॉकडाउन के दौरान जब बहुत से लोग एक ही छत के नीचे रहने को मजबूर हुए। साथ-साथ ज्यादा वक्त बिताने लगे तो रिश्तों का तनाव खुलकर सामने आ गया।
मजे की बात ये है कि हम जिन परिवार वालों से दूर-दूर रहते थे, लॉकडाउन के दौरान उनके साथ ज्यादा वक्त बिताने लगे। वहीं, दफ्तर के जिन सहकर्मियों और अपने दोस्तों के साथ ज्यादा रहते थे, उनसे दूरी बनाने लगे। कोविड-19 से बचने के लिए लोग घरों की चारदीवारी में कैद हुए, फिर अर्थव्यवस्था बंद होने से रिश्तों पर आर्थिक दबाव भी पड़ा। नतीजा ये कि रिश्तों की डोर खिंच गई। तनाव बढ़ गया।
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चीन में लोग सोशल मीडिया प्लेटफॅार्म वीचैट पर भी तलाक की अर्जी दे सकते हैं- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कोविड-19 ने रिश्तों को किस तरह बदला है?
इसे समझने के लिए हमें चीन और हॉन्ग कॉन्ग की मिसालें देखनी होंगी, क्योंकि नए कोरोना वायरस ने सबसे पहले चीन और हॉन्ग कॉन्ग पर ही हमला बोला था।
कोरोना वायरस के रिश्तों पर बुरे प्रभाव की सबसे बड़ी मिसाल चीन के शांक्ची प्रांत में देखने को मिली है। यहां के शियान शहर में तलाक के मामलों की बाढ़ सी आ गई है। ऑनलाइन दुनिया में शियान डिवोर्स के नाम से हैशटैग पर करीब सवा तीन करोड़ पोस्ट किए गए।
वुहान शहर, जहां से इस महामारी की शुरुआत हुई, वहां पर भी दांपत्य जीवन खतरे में नजर आ रहे हैं। वुहान में भी सोशल मीडिया पर तलाक के मामलों की भारी संख्या देखने को मिली है।
वैसे तो चीन में तलाक के मामले 2003 से ही लगातार बढ़ रहे हैं। आज वहां लोग सोशल मीडिया प्लेटफॅार्म वीचैट पर भी तलाक की अर्जी दे सकते हैं।
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लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा और तलाक के मामलों में भारी इजाफा हो गया है- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixa
लॉकडाउन के दौरान घरों में साथ-साथ ज्यादा समय गुजारने को मजबूर दंपतियों के बीच घरेलू हिंसा और तलाक के मामलों में भारी इजाफा हो गया है। घरेलू हिंसा के मामले तो यूरोप में भी बढ़ गए हैं। इनसे बचने की हेल्पलाइन पर कॉल की तादाद में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
चीन और हॉन्ग कॉन्ग में भी यही स्थिति देखी जा रही है। घरेलू हिंसा से बचने के लिए महिलाएं अपने बच्चों के साथ शेल्टर होम में पनाह ले रही हैं।
हॉन्ग कॉन्ग में ऐसे ही शेल्टर होम में पनाह लेने वाली एक महिला पिंग पिंग (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि लॉकडाउन से पहले भी उनका पति उनके साथ मार-पीट करता था, लेकिन, लॉकडाउन के बाद जब से वो घर में रहने लगा, तो बात-बात पर झगड़ा होने लगा।
घर की साफ-सफाई से लेकर खाना बनाने तक, हर बात को लेकर तनाव बढ़ गया। वो अक्सर पिंग पिंग का बनाया हुआ खाना फेंक देता था। अब पिंग पिंग कहती हैं कि वो जल्द से जल्द तलाक ले लेना चाहती हैं।
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आज की तारीख में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो रहे हैं- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pexel
हॉन्ग कॉन्ग की स्वयंसेवी संस्था हार्मनी हाउस की सुजाना लैम कहती हैं, "हालांकि हॉन्ग कॉन्ग में पूरी तरह से कभी लॉकडाउन नहीं लगाया गया, लेकिन जिन घरों में हिंसा नहीं हुई, वहां अलग तरह के तनाव देखने को मिले। घर की साफ-सफाई हो या फिर फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे किया जाए। इन मसलों को लेकर घरों में झगड़े बढ़ गए हैं।
हॉन्ग कॉन्ग की सामाजिक मनोचिकित्सक शर्मीन श्रॉफ कहती हैं, "आज की तारीख में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो रहे हैं। जैसे कि बच्चों को खेलने के लिए बाहर भेजा जाए या नहीं। इसके कारण परिवारों पर दबाव बढ़ा है।लॉकडाउन ने रिश्तों का सख्त इम्तिहान लिया है।"
लॉकडाउन के कारण एक और बड़ी समस्या ये पैदा हुई है कि घर के काम काज में इजाफा हो गया है। घर में ही लोगों को क्वारंटीन किया गया, फिर बच्चों के स्कूल बंद होने से उन्हें पढ़ाने की चुनौती बढ़ गई और इस बढ़े हुए काम के बोझ का ज्यादा हिस्सा महिलाओं को ही उठाना पड़ रहा है।
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महिलाओं को घर के काम का भी ज्यादा बोझ उठाना पड़ रहा है- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social media
आज चीन में महिलाएं, घर के काम-काज में पहले के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा समय देने को मजबूर हैं। जानकार कहते हैं कि कोविड-19 के कारण नौकरी गंवाने का ज्यादा दुष्प्रभाव महिलाएं ही झेल रही हैं। इसकी प्रमुख वजह तो ये है कि एक तो उनकी नौकरियां चली गईं, फिर उन्हें घर के काम का भी ज्यादा बोझ उठाना पड़ रहा है।
महिलाएं ज्यादातर उन उद्योगों में काम करती हैं जिन पर कोविड-19 की सबसे अधिक मार पड़ी है, जैसे कि होटल, रेस्टोरेंट, एयरलाइन या टूरिज्म।
शंघाई की सुसी गाओ लॉकडाउन से पहले से ही नई नौकरी तलाश रही थीं। वो ऑनलाइन रिटेल सेक्टर में काम करती हैं। अब अर्थव्यवस्था की तालाबंदी के कारण वो घर पर रहने को मजबूर हैं। अपनी दो साल की बेटी की पूरी जिम्मेदारी सुसी के ही ऊपर आ गई है।
वो कहती हैं, "मैं जितने परिवारों को जानती हूं, उनमें से ज्यादातर में आर्थिक बोझ मर्दों पर पड़ा है, तो घर के काम-काज का बोझ महिलाओं को उठाना पड़ रहा है."।
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