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Friendship Tips: टॉक्सिक दोस्त की 10 निशानियां, पहचानिए वरना नुकसान तय

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 29 Jan 2026 12:04 PM IST
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सार

Friendship Tips: टाॅक्सिक दोस्त जीवन में नकारात्मकता और असफलता लाता है। ऐसे दोस्तों की पहचान करके उनसे दूरी बनाई जा सकती है।

Friendship Tips Toxic Friend Signs in Hindi
टॉक्सिक दोस्त की 10 निशानियां - फोटो : Istock
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विस्तार
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Toxic Friend Signs: दोस्ती को हम अक्सर भरोसे, अपनापन और सहारे का दूसरा नाम मानते हैं। लेकिन हर साथी दोस्त नहीं होता, हर दोस्त भला नहीं सोचता। कुछ दोस्त धीरे-धीरे आपके आत्मविश्वास, मानसिक शांति और खुशियों को खोखला कर देते हैं। इन्हें ही टॉक्सिक दोस्त कहा जाता है। समस्या यह है कि ऐसे दोस्त शुरू में अच्छे लगते हैं, लेकिन समय के साथ नुकसान साफ दिखने लगता है। इसलिए समय रहते पहचान जरूरी है। ऐसी दोस्ती आत्मसम्मान गिराती है, मानसिक तनाव बढ़ाती है और धीरे-धीरे आप खुद पर शक करने लगते हैं। रिश्ते आपको मजबूत बनाते हैं, कमज़ोर नहीं, यह बात याद रखें। आइए जानते हैं टाॅक्सिक दोस्त की क्या पहचान होती है, ताकि ऐसी दोस्ती से बचा जा सके।

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टॉक्सिक दोस्त की 10 निशानियां


हर बात में नकारात्मकता
आप कुछ भी अच्छा करें, टाॅक्सिक दोस्त कमी निकाल देगा। उसकी बातें आपको हतोत्साहित करती हैं।


आपकी खुशी से जलन
आपकी सफलता उस दोस्त को चुभती है। वह खुश होने के बजाय तुलना और ताने देता है।


सिर्फ जरूरत पर याद करना
टाॅक्सिक दोस्त खुद को काम हो तो कॉल करता है, वरना महीनों ग़ायब रहता है। दोस्ती एकतरफा हो जाती है।


हमेशा खुद को सही मानना
गलती उसकी हो, फिर भी माफी आपको मांगनी पड़े, यह बड़ा रेड फ़्लैग है।


आपकी बातों को हल्के में लेना
आपकी भावनाएं उसके लिए मायने नहीं रखतीं। आपकी समस्या उसे “ओवरड्रामा” लगती है।


दूसरों के सामने नीचा दिखाना
मज़ाक के नाम पर आपकी बेइज्ज़ती करना उस दोस्त को सामान्य लगता है।


कंट्रोल करने की कोशिश
किससे मिलें, क्या करें, टाॅक्सिक दोस्त ये बातें तय करना चाहता है। यह दोस्ती नहीं, नियंत्रण है।


पीठ पीछे बुराई करना
ऐसा दोस्त आपकी निजी बातें दूसरों तक पहुंचाता है, इससे भरोसा टूटता है।


हमेशा आपसे तुलना
टाॅक्सिक दोस्त आपसे बेहतर साबित होने की होड़ में रहता है और दोस्ती भूल जाता है।


उसके साथ रहकर थकान महसूस होना
जब उस दोस्त से मिलने के बाद मन भारी हो जाए तो समझिए कुछ ग़लत है।



क्या करें?

  • साफ़ सीमाएं तय करें

  • खुद को दोष देना बंद करें

  • ज़रूरत पड़े तो दूरी बनाएं

  • उन रिश्तों को चुनें जो आपको आगे बढ़ाएं

दोस्ती का मतलब सुकून है, बोझ नहीं।

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