MP Assembly Special Session: 'बेटियां अब न रुकेंगी, नया इतिहास रचेंगी', मंत्री संपतिया उइके ने किया पलटवार
नमस्कर! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आज 27 अप्रैल को मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र है। महिला आरक्षण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर अहम चर्चा चल रही है। वहीं, कांग्रेस सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतर चुकी है। विशेष सत्र से जुड़े हर एक बड़े अपडेट के लिए बने रहिए हमारे साथ।
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भाजपा विधायक गौरव सिंह पारधी ने कांग्रेस को घेरा
भाजपा विधायक गौरव सिंह पारधी ने कहा कि राजनीतिक और आर्थिक सशक्तिकरण एक-दूसरे के पूरक हैं। सरकार ने 18 नई नीतियां लागू कर महिलाओं को विभिन्न सुविधाएं प्रदान की हैं। उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कराने वालों में लगभग 18 प्रतिशत महिलाएं हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2006-07 में मध्यप्रदेश पंचायतों में आरक्षण देने वाले शुरुआती राज्यों में शामिल था। कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रहने और दो-तिहाई बहुमत होने के बावजूद महिला आरक्षण विधेयक नहीं ला सकी।
पारधी ने कहा कि संसद में जो विधेयक गिरा, उसके पीछे एक बड़ी रणनीति थी। भाजपा ने कांग्रेस सरकार के दौरान भी इस मुद्दे पर समर्थन दिया था, लेकिन कांग्रेस ने ठोस कदम नहीं उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नहीं चाहती कि सदन में आदिवासियों और महिलाओं की संख्या बढ़े।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान सरकार जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि देश के हर नागरिक की आवाज सदन तक पहुंचे। सरकार महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और मध्यप्रदेश नीतिगत रूप से लगातार आगे बढ़ रहा है।
सीएम के नहीं होने पर सिंघार बिफरे
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने कहा कि सदन में महिलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है, लेकिन न तो मुख्यमंत्री उपस्थित हैं, न उपमुख्यमंत्री और न ही संसदीय कार्य मंत्री यह सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाता है। इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने जवाब देते हुए कहा कि राजेंद्र शुक्ला सदन में मौजूद हैं। वहीं विधायक रामेश्वर शर्मा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला चर्चा को गंभीरता से सुन रहे हैं और बाद में जवाब देंगे।
कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया का बयान
कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि हम राम को सिया से अलग करने वाले लोग नहीं हैं, न ही राधा को कृष्ण से अलग करने वाले लोग हैं। नारी जननी है और उसका सम्मान हमारी संस्कृति का मूल है। हमारी विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन हमारा संविधान सबसे प्रिय है। जब सदन में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का हनन हो रहा था, तब पूरा विपक्ष एकजुट होकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और परंपराओं को बचाने में लगा था। अब यदि सब कुछ पहले ही तय हो चुका है, तो ऐसी बैठक की आवश्यकता क्या है? आप 2023 के 106वें संविधान संशोधन को स्वीकार करते हैं, लेकिन आपकी मंशा पर सवाल उठते हैं।”
महिलाओं के अधिकारों से अब भी वंचित: सदन में बोले गोपाल भार्ग
विधायक गोपाल भार्गव ने सदन में कहा कि महिलाओं को आज भी उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को दुर्दशा से उभारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हमारी सरकार संसद में महत्वपूर्ण कानून लेकर आई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पुरुष प्रधान मानसिकता को समाप्त करने का काम हमारी सरकार कर रही है और अब महिलाएं देश की बागडोर संभालने के लिए आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक नारी-प्रधान देश है, जहां हम महिलाओं को शक्ति के रूप में पूजते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि पूजा तो करते हैं, पर उन्हें कानून की वास्तविक शक्ति देने में पीछे रह जाते हैं।
उन्होंने श्रमिक महिलाओं की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले महिलाएं सिर पर लकड़ी ढोकर घर आती थीं और फिर खाना बनाती थीं। उनकी दुर्दशा हमने नजदीक से देखी है। अंत में उन्होंने कहा कि हम बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन महिलाओं के वास्तविक कल्याण के लिए अभी भी अपेक्षित कार्य नहीं कर पा रहे हैं।
छह महीने से बिना PA के, क्या यही नारी सम्मान: अनुभा बंजारे
कांग्रेस विधायक अनुभा बंजारे ने एक महिला जनप्रतिनिधि के साथ हो रहे कथित अन्याय को लेकर नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि मैं एक विधायक हूं, लेकिन मेरे साथ अन्याय हो रहा है। पिछले छह महीनों से मेरा पीए मुझसे छीन लिया गया है और मैं बिना पीए के काम करने को मजबूर हूं। क्या यही नारी शक्ति वंदन है?
उन्होंने प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब इस संबंध में कलेक्टर से बात की गई, तो उन्होंने दूसरा पीए रखने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। अनुभा बंजारे ने अपने बयान में कहा कि हमारे शास्त्रों में भी नारी सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जहां नारी का सम्मान होता है, वह घर और समाज आगे बढ़ता है, और जहां नारी का अपमान होता है, वह समाज कभी प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि सभी को राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए काम करना चाहिए। तभी वास्तविक अर्थों में नारी सशक्तिकरण संभव हो सकेगा।
कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे बोलीं
कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही मूर्त रूप ले चुका है, लेकिन अब सरकार राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं को भ्रमित करने के उद्देश्य से नया वैधानिक बिल ला रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में महिलाएं अब भी सुरक्षित नहीं हैं, तो ऐसे कदमों का क्या औचित्य है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत में लगभग 23% लड़कियां मासिक धर्म के दौरान स्कूल छोड़ देती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में सेनेटरी पैड और शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन यदि इन बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बच्चियां स्कूल नहीं जा पा रहीं, तो वे उच्च शिक्षा तक कैसे पहुंचेंगी? ऐसे में महिला सशक्तिकरण की बात कैसे सार्थक होगी? अनुभा मुंजारे ने भारतीय जनता पार्टी से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि उनके गठबंधन की जिन राज्यों में सरकार है, वहां महिलाओं को कितना आरक्षण दिया जा रहा है।
मंत्री संपतिया उइके का संबोधन
मंत्री संपतिया उइके ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बेटियां अब नहीं रुकेंगी, बल्कि नया इतिहास रचेंगी। उन्होंने कहा कि पूरे देश की बहनें और माताएं संसद की ओर टकटकी लगाए देख रही थीं। हमारी केंद्र और राज्य सरकार ने महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए लगातार काम किया है। त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में हमारी सरकार ने 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया है। पंचायत से संसद तक महिलाओं को पहुंचाने का कार्य हमारी सरकार ने किया है। आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। आत्मनिर्भर भारत, लखपति दीदी, ड्रोन दीदी, स्टार्टअप इंडिया और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है।
MP: कांग्रेस का भाजपा पर गुमराह करने और कानून लागू न करने का आरोप
कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है और वर्ष 2023 में भी इसका समर्थन किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब तक इसे लागू नहीं कर पाई है और संशोधन विधेयक लाकर महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है। उनके अनुसार, जनगणना और परिसीमन के नाम पर महिला आरक्षण को जानबूझकर रोका जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक ओर महिलाओं के अधिकार और सम्मान की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर गरीब वर्ग की लड़कियों को सामूहिक विवाह योजनाओं में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गरीबी रेखा के कार्ड को अनिवार्य करने और संख्या सीमित करने से कई जरूरतमंद लड़कियों के विवाह प्रभावित हो रहे हैं।
वाल्मीकि ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कुछ मंत्री महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बयान देते रहे हैं, जो महिला सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के सम्मान को लेकर गंभीर है, तो आदिवासी, अनुसूचित जाति और महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर एक विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए।
MP: महिला कांग्रेस अध्यक्षा बोलीं- तुरंत लागू हो नारी शक्ति वंदन अधिनियम
महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्षा रीना बोरासी ने विधानसभा पहुंचकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को जल्द लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जब यह बिल 2023 में संसद से पास हो चुका है, तो अब तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर समय पर कानून लागू होता, तो 2024 के चुनाव में ज्यादा महिला प्रतिनिधि संसद में पहुंचतीं। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को टाला जा रहा है।उन्होंने मांग रखी कि महिला आरक्षण को तुरंत लोकसभा की 543 सीटों और मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर लागू किया जाए। साथ ही, परिसीमन और जनगणना की शर्तों को देरी का बहाना बताते हुए इसे तुरंत लागू करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने इस बिल का समर्थन किया था और अब पार्टी सड़क से सदन तक इसके तत्काल क्रियान्वयन की मांग कर रही है।
Madhya Pradesh: ट्रैक्टर से विधानसभा पहुंचे विधायक शाह, किसानों का उठाया मुद्दा
मध्य प्रदेश विधानसभा के 27 अप्रैल के विशेष सत्र में कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह अलग अंदाज में नजर आए। वे ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि, ट्रैक्टर को बाहर ही रोक दिया गया, लेकिन वे अंदर गेहूं की बालियां लेकर पहुंचे और किसानों के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।अभिजीत शाह ने कहा कि राजस्थान में भाजपा सरकार किसानों से गेहूं 2735 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है, तो मध्य प्रदेश में किसानों को कम कीमत क्यों दी जा रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के किसानों के साथ अन्याय हो रहा है और उन्हें गुमराह किया जा रहा है। यहां भले ही महिला आरक्षण पर चर्चा हो रही है, लेकिन किसानों की परेशानियों पर भी गंभीरता से बात करना जरूरी है।

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